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भारतीय अवधारणा का अंत होगा हिंदुत्व मूवमेंट की कामयाबी : थरूर

Sun, 01 Nov 2020 03:17 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Sun, 01 Nov 2020 03:17 AM IST
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Congress leader Shashi Tharoor says success of Hindutva movement will end of Indian concept
शशि थरूर (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हिंदुत्व मूवमेंट को 1947 की मुस्लिम सांप्रदायिकता का प्रतिबिंब करार दिया। उन्होंने कहा कि इसकी कामयाबी का अर्थ भारतीय अवधारणा का अंत होगा। उन्होंने यह जोर देकर कहा कि हिंदुत्व कोई धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक सिद्धांत है। उन्होंने अपनी नई किताब ‘द बैटल ऑफ बिलांगिंग’ में कहा कि ‘हिंदू भारत’ किसी भी तरह से हिंदू नहीं होगा, बल्कि ‘संघी हिंदुत्व राज्य’ होगा जो पूरी तरह से अलग तरह का देश होगा। उनकी इस पुस्तक का शनिवार को विमोचन हुआ।

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कांग्रेस सांसद ने कहा कि उनके जैसे लोग जो अपने प्रिय भारत को संजोकर रखना चाहते हैं, उनकी परवरिश इस तरह से हुई है कि वे धार्मिक राज्य का तिरस्कार करें। हिंदुत्व आंदोलन की जो बयानबाजी है, उससे उसी कट्टरता की गूंज सुनाई देती है जिसको खारिज करने के लिए भारत का निर्माण हुआ था। एलेफ बुक कंपनी द्वारा प्रकाशित किताब में थरूर ने हिंदुत्व और संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) की आलोचना की है।
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उनका कहना है कि ये भारतीयता के बुनियादी पहलू के लिए चुनौती हैं। अपने ‘हिंदू पाकिस्तान’ वाले बयान से संबंधित विवाद पर पूरा एक अध्याय उन्होंने लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा कि सत्तारूढ़ दल की ओर से पाकिस्तान का हिंदुत्व वाला संस्करण बनाने के प्रयास की निंदा की थी क्योंकि इसके लिए हमारा स्वतंत्रता आंदोलन नहीं था और न ही यह भारत की अवधारणा है जिसे हमारे संविधान में समाहित किया गया। उन्होंने लिखा कि यह केवल अल्पसंख्यकों के बारे में नहीं है जैसा भाजपा हमें मनवाना चाहेगी। उनके जैसे बहुत सारे गौरवान्वित हिंदू हैं जो अपनी आस्था के समावेशी स्वभाव को संजोते हैं और अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान के लोगों की तरह असहिष्णु एवं एक धर्म आधारित राज्य में रहने का इरादा नहीं रखते।
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सीएए देश की बुनियाद पर करता है सवाल
सीएए की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह पहला कानून है जो देश की उस बुनियाद पर सवाल करता है कि धर्म हमारे पड़ोस और हमारी नागरिकता को तय करने का पैमाना नहीं हो सकता। यह संशोधित कानून एक समावेशी राज्य के तौर पर भारत को लेकर जो धारणा है उस पर भी चोट करता है। हिंदुत्व के संदर्भ में कांग्रेस नेता ने किताब में लिखा है कि हिंदुत्व आंदोलन 1947 की मुस्लिम सांप्रदायिकता का प्रतिबिंब है। इससे संबंधित बयानबाजी से उस कट्टरता की गूंज सुनाई देती है जिसे खारिज करने के लिए भारत का निर्माण हुआ था। उन्होंने कहा कि इस हिंदुत्व की सफलता का मतलब यह होगा कि भारतीय अवधारण का अंत हो गया।


हम दूसरों के मुंह में अपने शब्द नहीं डाल सकते
एआईएमआईएम नेता वारिस पठान के भारत माता की जय का नारा नहीं लगाने से जुड़े विवाद पर उन्होंने कहा कि कुछ मुस्लिम कहते हैं कि हमें जय हिंद, हिंदुस्तान जिंदाबाद, जय भारत कहने के लिए कहिए, लेकिन भारत माता की जय कहने के लिए मत कहिए। उन्होंने कहा कि संविधान हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आजादी देता है और हमें चुप रहने की भी आजादी देता है। हम दूसरों के मुंह में अपने शब्द नहीं डाल सकते।

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