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कुछ चीजें बेहतर तो कहीं सुधार की जरूरत, जानिए नई शिक्षा नीति पर क्या बोले थरूर

Thu, 30 Jul 2020 06:49 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 30 Jul 2020 06:49 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में नई शिक्षा नीति 2020 को अनुमति दे दी गई। इस नीति में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ कई अहम सुधार लाने का लक्ष्य तय किया गया है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने गुरुवार को नई शिक्षा नीति पर अपने विचार रखे। थरूर ने एक के बाद एक किए गए ट्वीट में इस नीति के कई पक्षों की सराहना की तो कुछ सवाल भी उठाए। 

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Congress Leader Shashi Tharoor presents his views on New Education Policy 2020
शशि थरूर - फोटो : इंस्टाग्राम

विस्तार

थरूर ने कहा कि रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा घोषित की घई नई शिक्षा नीति 2020 में अब तक जो हमने देखा है उसमें बहुत कुछ स्वागत योग्य है। हममें से कुछ लोगों द्वारा दिए गए कई सुझावों को भी शामिल किया गया है। फिर भी, एक सवाल जो बना हुआ है वह यह कि इसे चर्चा के लिए पहले संसद में क्यों नहीं लाया गया।

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कांग्रेस नेता ने कहा, मैं मानव संसाधन विकास मंत्रालय में अपने दिनों से ही 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति को 21वीं सदी में लाने को उसमें संशोधन की वकालत करता रहा हूं। मुझे खुशी है कि मोदी सरकार ने आखिरकार यह कर दिया है भले ही इसमें उन्हें छह साल लग गए। अब उम्मीदों और क्रियान्वयन में समानता की चुनौती है।

उदाहरण के तौर पर शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के छह फीसदी को खर्च करने का लक्ष्य सबसे पहले 1948 में व्यक्त किया गया था। हर सरकार इस लक्ष्य को तय करती है और फिर बाद में अपने ही वित्त मंत्रालय के खिलाफ आ जाती है। उन्होंने कहा कि असल मायनों में देखें तो पिछले छह साल में शिक्षा पर खर्च में गिरावट आई है। ऐसे में यह छह फीसदी कैसे पहुंचेगा।

उच्च शिक्षा में 50 फीसदी सकल नामांकन अनुपात और माध्यमिक विद्यालय में 100 फीसदी के लक्ष्य प्रशंसनीय हैं। लेकिन जब आपको पता चलता है कि वर्तमान में उच्च शिक्षा में यह 25.8 फीसदी है और कक्षा नौ में 68 फीसदी, तो आश्चर्य होता है कि क्या ऐसे लक्ष्य सरकार द्वारा पेरिस में सौर-ऊर्जा प्रतिबद्धताओं के मुकाबले अधिक यथार्थवादी हैं। 

नई शिक्षा नीति में अनुसंधान के लिए अधिक ठोस और वास्तविक लक्ष्य पेश करने चाहिए थे। भारत में अनुसंधान और नवाचार पर कुल निवेश साल 2008 में जीडीपी के 0.84 फीसदी से घटकर साल 2018 में 0.6 फीसदी हो गया है। प्रति एक लाख की जनसंख्या पर शोधकर्ताओं की संख्या भारत में महज 15 है वहीं, चीन में यह संख्या 111 है। 


कुछ प्रस्तावों पर विस्तृत विवरण की जरूरत है। उदाहरण के तौर पर स्कूलों के कमजोर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के स्थान पर नई शिक्षा नीति कहती है कि स्कूल परिसर इस समस्या का समाधान हैं, जिसमें बड़े भौगोलिक क्षेत्र में फैले संसाधनों को साझा किया जाएगा। यह कितना व्यावहारिक है? बच्चे इसके लिए मीलों का सफर नहीं तय कर सकते। 

थरूर ने कहा कि कुल मिलाकर नई शिक्षा नीति 2020 में बहुत कुछ प्रशंसा के योग्य है और मैं इसे लेकर संसद में सकारात्मक चर्चा की उम्मीद करता हूं, जहां इन चिंताओं को उठाया जा सके और इन पर स्पष्टीकरण दिया जा सके। मैं रमेश पोखरियाल निशं और उनकी टीम को उनके प्रयासों के लिए बधाई देता हूं। एक बेहतर शिक्षित भारत सबके लिए जरूरी है।

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