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कांग्रेस सांसद ने फिर उठाई राष्ट्रगान में बदलाव की मांग, कहा-सिंध को उत्तर पूर्व से बदलें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 16 Mar 2018 05:11 PM IST
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कांग्रेस सांसद रिपुन बोरा ने शुक्रवार को राज्यसभा में राष्ट्र गान को लेकर एक संशोधन की मांग करते हुए प्रस्ताव पेश किया है। असम से सांसद बोरा ने राष्ट्रगान से 'सिंध' शब्द निकालने की मांग की। उनका कहना है कि क्योंकि यह एक ऐसे राज्य को संदर्भित करता है जो साल 1947 में भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान का हिस्सा बन गया।
कांग्रेस सांसद ने कहा है कि 'सिंध' की जगह 'नार्थ ईस्ट' शब्द को राष्ट्रगान में सम्मिलित किया जाना चाहिए जो भारत के पूर्वोत्तर इलाके में स्थित राज्यों का उल्लेख करेगा। उन्होंने यह भी लिखा है कि नॉर्थ ईस्ट भारत का अभिन्न अंग है लेकिन राष्ट्रगान में इस राज्य का कोई जिक्र नहीं है।
कांग्रेस सांसद रिपुन बोरा द्वारा राष्ट्रगान में सिंध के स्थान पर उत्तर पूर्व लिखे जाने की मांग पर वर्ल्ड सिंधी कांग्रेस के लखू लुहाना ने कड़ा ऐतराज जताया है। लखू ने कहा कि हिंद शब्द कहीं से नहीं आया है बल्कि यह सिंध से ही निकला है। उन्होंने कहा कि सिंध से हिंद और हिंद से हिंदुस्तान बना है।
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उन्होंने आगे कहा 'रबींद्रनाथ टैगोर इतिहास के बेहतर जानकार थे और उन्होंने सिंध को राष्ट्रगान में जगह दी। क्या कोई राष्ट्र अपनी सभ्यता का आधार हटा सकता है। माना कि सिंध अब पाकिस्तान का हिस्सा है लेकिन ज्यादात्तर सिंधी खुद को पाकिस्तान से जुड़ा हुआ महसूस नहीं करते।'
इससे पहले इसी तरह की मांग मार्च 2016 में शिवसेना के सांसद अरविंद सावंत ने उठाई थी, जिन्होंने 'सिंध' शब्द को राष्ट्रगान से हटाने की मांग की थी, क्योंकि अब प्रांत पाकिस्तान का हिस्सा है ।
1911 में नोबेल पुरस्कार विजेता रबींद्रनाथ टैगोर ने राष्ट्र गान 'जन गण मन' लिखा था, जब भारतीय क्षेत्र पश्चिम में बलूचिस्तान से लेकर पूर्व तक और सिलहट तक फैला था। हालांकि, बंटवारे के बाद, सिंध, बलूचिस्तान, खैबर-पख्तूनख्वा और पंजाब के कुछ हिस्से पाकिस्तान में चले गए हैं। वहीं सिलहट, ढाका और बंगाल के अन्य भागों को पूर्वी पाकिस्तान को सौंप दिया गया जो कि बाद में बांग्लादेश बन गया।
रिपुन ने अपनी मांग में यह भी लिखा है कि तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा में 24 जनवरी 1950 को कहा था कि यदि सरकार चाहे तो वह राष्ट्रगान में बदलाव ला सकती है।
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कांग्रेस सांसद ने कहा है कि 'सिंध' की जगह 'नार्थ ईस्ट' शब्द को राष्ट्रगान में सम्मिलित किया जाना चाहिए जो भारत के पूर्वोत्तर इलाके में स्थित राज्यों का उल्लेख करेगा। उन्होंने यह भी लिखा है कि नॉर्थ ईस्ट भारत का अभिन्न अंग है लेकिन राष्ट्रगान में इस राज्य का कोई जिक्र नहीं है।
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कांग्रेस सांसद रिपुन बोरा द्वारा राष्ट्रगान में सिंध के स्थान पर उत्तर पूर्व लिखे जाने की मांग पर वर्ल्ड सिंधी कांग्रेस के लखू लुहाना ने कड़ा ऐतराज जताया है। लखू ने कहा कि हिंद शब्द कहीं से नहीं आया है बल्कि यह सिंध से ही निकला है। उन्होंने कहा कि सिंध से हिंद और हिंद से हिंदुस्तान बना है।
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उन्होंने आगे कहा 'रबींद्रनाथ टैगोर इतिहास के बेहतर जानकार थे और उन्होंने सिंध को राष्ट्रगान में जगह दी। क्या कोई राष्ट्र अपनी सभ्यता का आधार हटा सकता है। माना कि सिंध अब पाकिस्तान का हिस्सा है लेकिन ज्यादात्तर सिंधी खुद को पाकिस्तान से जुड़ा हुआ महसूस नहीं करते।'
इससे पहले इसी तरह की मांग मार्च 2016 में शिवसेना के सांसद अरविंद सावंत ने उठाई थी, जिन्होंने 'सिंध' शब्द को राष्ट्रगान से हटाने की मांग की थी, क्योंकि अब प्रांत पाकिस्तान का हिस्सा है ।
1911 में नोबेल पुरस्कार विजेता रबींद्रनाथ टैगोर ने राष्ट्र गान 'जन गण मन' लिखा था, जब भारतीय क्षेत्र पश्चिम में बलूचिस्तान से लेकर पूर्व तक और सिलहट तक फैला था। हालांकि, बंटवारे के बाद, सिंध, बलूचिस्तान, खैबर-पख्तूनख्वा और पंजाब के कुछ हिस्से पाकिस्तान में चले गए हैं। वहीं सिलहट, ढाका और बंगाल के अन्य भागों को पूर्वी पाकिस्तान को सौंप दिया गया जो कि बाद में बांग्लादेश बन गया।
Congress' Ripun Bora moves private member's resolution in Rajya Sabha, seeking amendment of the National Anthem & replacing the word 'Sindh' with 'Northeast India.' pic.twitter.com/iqEWI9ADOz
— ANI (@ANI) March 16, 2018
रिपुन ने अपनी मांग में यह भी लिखा है कि तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा में 24 जनवरी 1950 को कहा था कि यदि सरकार चाहे तो वह राष्ट्रगान में बदलाव ला सकती है।