फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Congress is worried about its position in Maharashtra in fight between Shivsena and Kangana Ranaut

महाराष्ट्र : शिवसेना और कंगना के बीच लड़ाई में डूब रही है कांग्रेस पार्टी की लुटिया

Sun, 13 Sep 2020 06:13 PM IST
गौरव पाण्डेय सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 13 Sep 2020 06:13 PM IST
सार

महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार में शामिल कांग्रेस के सामने अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है। बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रणौत से शिवसेना के विवाद के बीच पूर्व नौसेना अधिकारी की पिटाई से प्रदेश कांग्रेस के नेता असहज हैं। लेकिन गठबंधन की मजबूरी में उनके मुंह बंद हैं। लेकिन अंदरखाने कांग्रेस नेताओं में अकुलाहट है। उन्हें यह चिंता होनी शुरू हो गई है कि कहीं यह मामला महाराष्ट्र में कांग्रेस की लुटिया न डुबो दे।

विज्ञापन
Congress is worried about its position in Maharashtra in fight between Shivsena and Kangana Ranaut
कांग्रेस - फोटो : फाइल

विस्तार

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार बनाने के बाद से ही कांग्रेस की तुलना में एनसीपी को ज्यादा महत्व मिल रहा है। उद्धव ठाकरे और एनसीपी प्रमुख शरद पवार कई बार बंद कमरे में कोई निर्णय ले लेते हैं जिसकी कांग्रेस मंत्रियों तक को खबर नहीं होती। कांग्रेस के मंत्री इस पर अपना विरोध भी व्यक्त कर चुके हैं। इन सब के बीच हाल के दिनों में उद्धव सरकार की कार्यपद्धति में भी काफी बदलाव आया है। 

विज्ञापन


कंगना रणौत का ऑफिस तोड़े जाने और पूर्व नौसेना अधिकारी मदन शर्मा की पिटाई के मामले में कांग्रेस बैकफुट पर है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कहते हैं कि मुख्यमंत्री ठाकरे मंत्रियों से जल्दी बात नहीं करते। मौजूदा परिस्थिति में कांग्रेस के अनुभवी मंत्री काफी सहयोग दे सकते हैं। इसलिए कांग्रेस सत्ता में रहकर भी कुछ नहीं कर पा रही है। अगर राहुल गांधी पार्टी के अध्यक्ष होते तो महाराष्ट्र में कांग्रेस की हैसियत कुछ और होती।
विज्ञापन



राउत के बाबरी मस्जिद तोड़ने वाले बयान से भी खफा हैं नेता
शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत के बाबरी मस्जिद तोड़ने वाले बयान से भी कांग्रेस के नेता खफा हैं। कंगना ने ऑफिस तोड़े जाने पर ट्वीट कर शिवसेना को बाबर सेना कहा था। इसके बाद संजय राउत ने कहा था कि शिवसेना को बाबर सेना कहने वाले जान लें कि हम वही लोग हैं जिन्होंने बाबरी मस्जिद तोड़ी थी। अब कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं का कहना है कि कल जब शिवसेना नेता मंच से यह बात कहेंगे तो कांग्रेस क्या जवाब देगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


विभागीय निधि को लेकर भी कांग्रेस के साथ हो रहा भेदभाव
महाविकास आघाड़ी सरकार में कांग्रेस को तीसरे दर्जे की वरीयता प्राप्त है। इसलिए विभागीय निधि को लेकर भेदभाव की बातें सामने आई हैं। हाल ही में राज्य विधानमंडल का दो दिवसीय मानसून सत्र आयोजित हुआ था। सत्र में 29 हजार 84 करोड़ की पूरक मांग मंजूर की गई। लेकिन इसमें शिवसेना और एनसीपी के मंत्रियों वाले विभागों पर मेहबानी दिखाई गई। इस पर कांग्रेस के नेता कहते हैं कि वैसे भी उन्हें कम महत्व वाले विभाग मिले हैं। ऐसे में उन्हें कहां तवज्जो मिल पाएगी।


शिवसेना के खिलाफ अकेले मुखर नेता हैं संजय निरूपम
महाराष्ट्र में संजय निरूपम एकमात्र ऐसे नेता हैं जो शिवसेना और उद्धव ठाकरे सरकार के खिलाफ मुखर रहते हैं। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत मौत के मामले से लेकर कंगना का ऑफिस तोड़े जाने पर भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने शिवसेना को गुंडा पार्टी तक कहा है। लेकिन पार्टी के अन्य नेता या तो उद्धव सरकार के समर्थन में ही ढपली बजाते दिखाई देते हैं या फिर चुप्पी साधे रहते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed