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Congress : कांग्रेस के ग्रह-नक्षत्र खराब हैं या फिर कोई और बात है? राहुल गांधी पर निशाना साधने का सीधा फायदा

Wed, 31 Aug 2022 07:13 AM IST
योगेश साहू शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली।
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 31 Aug 2022 07:13 AM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार अपने अंदाज को बदलकर राजनीति में लोकप्रियता और रोचकता दोनों बनाए रहते हैं। प्रधानमंत्री देश हित में कड़े फैसले लेने से नहीं हिचकिचाते और उससे उनकी जनता के बीच में लोकप्रियता पर बड़ा असर नहीं पड़ता।

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Congress: has bad luck, or something else, Direct advantage of targeting Rahul Gandhi
congress logo - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने की तैयारी कर रही है। लेकिन जम्मू-कश्मीर से आने वाले पार्टी के पूर्व महासचिव, धुर राजनीतिज्ञ और पूर्व केन्द्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद अपनी पुरानी पार्टी को लगातार बड़ा झटका दे रहे हैं। उनके समर्थन में कांग्रेस के 64 नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। गुलाम नबी आजाद ने मार्च में ही कहा था कि उन्होंने अभी राजनीति छोड़ी नहीं है। जम्मू-कश्मीर की तरह ही कांग्रेस पंजाब और उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में झटका खा चुकी है। पार्टी के कुछ नेताओं को फिलहाल गुजरात के प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है। इस बारे में पार्टी के कई नेताओं से राय ली गई। सवाल यह भी है कि क्या कांग्रेस पार्टी का ग्रह नक्षत्र खराब है?

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जो कांग्रेस को छोड़कर जाता है, उसके निशाने पर क्यों रहते हैं राहुल?
इस सवाल के जवाब पर कांग्रेस के नेता चुप हो जाते हैं। कांग्रेस छोड़कर तृणमूल में शामिल हुई नेता के मुताबिक इसका सवाल तो पहले राहुल गांधी से ही पूछा जाना चाहिए। जबकि एक पूर्व महासचिव का कहना है कि जिस दिन कांग्रेस छोड़ने वाले नेता राहुल गांधी को बख्श देंगे, उसके अगले दिन से कांग्रेस की केंद्र में सरकार बनने का रोड-मैप भी दिखाई देने लगेगा। राजनीति विज्ञान के प्रो. एसके सिंह कहते हैं कि आप 2014 से देखिए। सत्तारुढ़ दल के निशाने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी कम रहती हैं। यह हमला प्रियंका पर भी कम होता है। पिछले सात साल से अकेले राहुल गांधी इसे झेल रहे हैं। 
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चाहे असम के मुख्यमंत्री हिमंता ने कांग्रेस छोड़ी हो या फिर कैप्टन अमरिंदर सिंह अथवा अब गुलाम नबी आजाद। जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सभी ने राहुल गांधी को जरूर निशाने पर लिया। एसके सिंह कहते हैं कि दरअसल राहुल गांधी को कांग्रेस के ही नेताओं द्वारा पार्टी छोड़ते समय निशाने पर लेना भाजपा को सूट करता है। इससे राहुल गांधी की छवि खराब होती है और कांग्रेस के विपरीत जनभावना बनाने में मदद मिलती है। इसका भाजपा को सीधा फायदा मिलता है।
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जब तक विरोधी समझते हैं, भाजपा लिख देती है पटकथा
उत्तराखंड के एक कांग्रेस नेता कहते हैं कि हम विधानसभा चुनाव जीतते-जीतते हार गए। भाजपा उत्तर प्रदेश में भी सत्ता परिवर्तन से घबराते-घबराते चुनाव जीत गई। दोनों से सबक लेना चाहिए। कांग्रेस पार्टी की पंजाब की पूर्व प्रभारी का कहना है कि मुझे कहने की जरूरत नहीं है। राज्य में सरकार हमारी होने की संभावना थी, लेकिन मुख्यमंत्री आम आदमी पार्टी के भगवंत मान कुर्सी पर बैठे हैं। उन्हें अंदेशा है कि गुजरात के प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के विधायकों की संख्या भले ही नगण्य हो, लेकिन इससे भाजपा को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद दिखाई पड़ रही है। कांग्रेस विधायकों के साथ हार-जीत का अंतर बढ़ सकता है। इसमें कांग्रेस की बड़ी चूक से इनकार नहीं किया जा सकता।

'ग्रह नक्षत्र को छोड़िए कर्म का भी हिस्सा नहीं मिल पा रहा है'
कांग्रेस पार्टी के सचिव हैं। बहुत सक्रिय रहते हैं। वह सवाल के जवाब में कहते हैं कि ग्रह-नक्षत्र के खराब होने को छोड़िए। यहां तो कर्म का भी हिस्सा खाते में नहीं आ रहा है। वह कहते हैं कि ऐसा संघ और भाजपा द्वारा फैलाए गए दुष्प्रचार के कारण हो रहा है। भाजपा के नेता सुधीर अग्रवाल इसे दूसरे नजरिए से देखते हैं। उनका कहना है कि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है और उन्हें नहीं बोलना चाहिए। लेकिन उन्हें लगता है कि राहुल गांधी लगातार एक ही तरह की राजनीति कर रहे हैं। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार अपने अंदाज को बदलकर राजनीति में लोकप्रियता और रोचकता दोनों बनाए रहते हैं। 

प्रधानमंत्री देश हित में कड़े फैसले लेने से नहीं हिचकिचाते और उससे उनकी जनता के बीच में लोकप्रियता पर बड़ा असर नहीं पड़ता। वरिष्ठ पत्रकार श्याम नारायण पांडे के मुताबिक कांग्रेस इसी की काट नहीं ढूंढ पा रही है। वह अपने नेता राहुल गांधी की छवि खराब होने से बचाने का फार्मूला भर ढूंढ ले तो राजनीति का दृश्य बदल जाएगा। राहुल गांधी के मुताबिक उन्हें भाजपा और संघ के नेताओं ने दुष्प्रचार करके 'पप्पू' बताया है। हालांकि राहुल लगातार कहते रहे कि वो इस छवि को तोड़ देंगे। लेकिन अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिल सकी है। सुल्तानपुर जिले के पुराने कांग्रेसी प्रदीप पाठक कहते हैं कि मौजूदा समय में कांग्रेस का कर्म और भाग्य दोनों सांसद राहुल गांधी हैं।


कब बदलेंगे दिन?
कांग्रेस के एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री इस सवाल पर कहते हैं कि वह कोई ज्योतिषी नहीं हैं। हालांकि वह मानते हैं कि कांग्रेस को अपने कुछ फैसलों पर विचार करना चाहिए। संगठन में मजबूती, परिवर्तन और पार्टी के अभियानों में संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। वह कहते हैं कि हमारे नेता, हमारी पार्टी को नुकसान पहुंचाते हैं और पार्टी इस बीमारी को ठीक करने के लिए गंभीर नहीं रहती। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि 2023 तक राजनीति का दृश्य बदलेगा। दृश्य बदलने में वह कांग्रेस के योगदान को उतना कारगर नहीं मानते। उनका कहना है कि परिस्थितियां इस तरह का अवसर दे सकती हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस इसे कितना भुना पाती है। इसी आधार पर 2024 की दशा और दिशा दोनों तय हो जाएगी।

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