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AICC Resolution: कांग्रेस ने जातिगत जनगणना, SC-ST सब प्लान पर केंद्रीय कानून जैसे वादे किए; 12 पेज का प्रस्ताव
Wed, 09 Apr 2025 10:39 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 09 Apr 2025 10:39 PM IST
सार
- अहमदाबाद अधिवेशन में कांग्रेस ने 12 पन्ने का प्रस्ताव पारित किया।
- कांग्रेस ने वादा किया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC-ST) सब प्लान पर केंद्रीय कानून बनाया जाएगा।
- राहुल गांधी ने जातिगत जनगणना को लेकर भी बड़ा बयान दिया।
- पीएम मोदी और अमित शाह के गृह राज्य में दिग्गज कांग्रेस नेताओं का जमघट।
- मंथन के बाद
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अहमदाबाद में कांग्रेस का 84वां अधिवेशन
- फोटो : एएनआई
विस्तार
कांग्रेस ने बुधवार को 'न्यायपथ' शीर्षक के साथ 12 पेज का प्रस्ताव पारित किया। गुजरात के अहमदाबाद में 64 साल बाद हो रहे इस आयोजन के संबंध में कांग्रेस ने कहा कि पार्टी एससी/एसटी उपयोजना के लिए केंद्रीय कानून बनाएगी। कांग्रेस पार्टी के प्रस्ताव के मुताबिक कांग्रेस अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों की आबादी के अनुसार बजटीय आवंटन की गारंटी देने की अपनी प्रतिबद्धता पर भी अडिग है।
अहमदाबाद अधिवेशन में 12 पेज का प्रस्ताव, जाति और SC-ST पर क्या बोली कांग्रेस?
कांग्रेस ने कहा, 20 जनवरी, 2006 को तत्कालीन यूपीए सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 15 (5) के तहत अहम मौलिक गारंटी देने का वादा किया था। इसके तहत निजी शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), एससी और एसटी के लिए आरक्षण के प्रावधानों को बिना देरी के लागू किया जाना चाहिए। अहमदाबाद अधिवेशन में पारित प्रस्ताव के मुताबिक कांग्रेस ने कहा कि सामाजिक न्याय की सांविधानिक गारंटी वाली नींव को राष्ट्रव्यापी जाति जनगणना से ही मजबूत किया जा सकता है।
ये भी पढ़ें- कांग्रेस अधिवेशन: राहुल गांधी ने उठाया जाति जनगणना का मुद्दा, वक्फ कानून को बताया संविधान पर आक्रमण
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भाजपा के गढ़ में बड़े कांग्रेस नेताओं का जमघट
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी और राहुल गांधी, पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश सहित कई वरिष्ठ नेता मंथन में शामिल हुए। बुधवार को दिन भर विचार-विमर्श के बाद हाथ उठाकर प्रस्ताव पारित किया गया। भाजपा शासित राज्य गुजरात में 64 साल के बाद 'न्यायपथ: संकल्प, समर्पण और संघर्ष' विषय पर आयोजित कांग्रेस पार्टी के अधिवेशन में छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल, मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम, अंबिका सोनी, कुमारी सैलजा जैसी हस्तियों ने भी भाग लिया।
एससी-एसटी के लिए बजटीय आवंटन पर गंभीर सवाल
कांग्रेस ने प्रस्ताव में सामाजिक न्याय पर एक खंड समर्पित है। पार्टी के मुताबिक यही इस राजनीतिक दल का 'वैचारिक आधार' है। प्रस्ताव में कहा गया, हमारा दृढ़ विश्वास है कि कोई भी राष्ट्र या समाज उत्पीड़ित, हाशिए पर पड़े और पिछड़े समुदायों को पीछे छोड़कर वास्तविक तरक्की नहीं कर सकता। आरक्षण के सांविधानिक प्रावधानों का आधार भी यही है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में, सत्तारूढ़ पार्टी- भाजपा की वास्तविकता यह है कि एससी/एसटी सब-प्लान और इस समुदाय के लिए होने वाले बजटीय आवंटन को लगभग खत्म कर दिया गया है।
सत्तारूढ़ भाजपा की ओबीसी विरोधी मानसिकता
कांग्रेस ने कहा, आरक्षण पर 50 फीसदी की मनमानी सीमा और जनगणना नहीं कराने ने ओबीसी, एससी और एसटी समुदाय के लोग उचित हक से वंचित हैं। यहां तक कि निजी शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी आरक्षण से भी इनकार किया गया है। यह सब सत्तारूढ़ भाजपा की "एससी, एसटी और ओबीसी विरोधी मानसिकता" दिखाता है।
प्रगतिशील कानूनों को कमजोर किया जा रहा है
12 पेज के प्रस्ताव में कांग्रेस पार्टी ने दावा किया है कि दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के खिलाफ अमानवीय अत्याचारों में हर साल 13 फीसदी की खतरनाक वृद्धि हो रही है। सत्तारूढ़ पार्टी के नेता खुद भी अत्याचारों के ऐसे कई मामलों में संलिप्त पाए गए हैं। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बनाए गए प्रगतिशील कानूनों जैसे पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम (पेसा), 1996; वन अधिकार अधिनियम, 2006 को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें- AICC Convention: कांग्रेस आने वाले दिनों में कैसी राजनीति करेगी? खरगे-थरूर और कार्ति चिदंबरम ने बताई योजनाएं
राहुल गांधी ने जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाया
इससे पहले उत्तर प्रदेश की रायबरेली सीट से निर्वाचित लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने कांग्रेस के 84वें अधिवेशन में कहा, तेलंगाना में कांग्रेस सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। हमने जाति जनगणना करायी है। राहुल गांधी ने कहा कि कुछ महीने पहले, मैंने संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा था कि हमें देश में जाति जनगणना करवानी चाहिए... मैं जानना चाहता था कि इस देश में किसकी कितनी हिस्सेदारी है और क्या यह देश सही मायने में आदिवासी, दलित और पिछड़े समुदायों का सम्मान करता है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस ने जाति जनगणना से साफ इनकार कर दिया क्योंकि वे नहीं चाहते कि इस देश में अल्पसंख्यकों को कितनी हिस्सेदारी मिलती है, यह पता चले। मैंने उनसे कहा कि हम संसद में आपके सामने ही जाति जनगणना कानून पारित करेंगे।
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अहमदाबाद अधिवेशन में 12 पेज का प्रस्ताव, जाति और SC-ST पर क्या बोली कांग्रेस?
कांग्रेस ने कहा, 20 जनवरी, 2006 को तत्कालीन यूपीए सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 15 (5) के तहत अहम मौलिक गारंटी देने का वादा किया था। इसके तहत निजी शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), एससी और एसटी के लिए आरक्षण के प्रावधानों को बिना देरी के लागू किया जाना चाहिए। अहमदाबाद अधिवेशन में पारित प्रस्ताव के मुताबिक कांग्रेस ने कहा कि सामाजिक न्याय की सांविधानिक गारंटी वाली नींव को राष्ट्रव्यापी जाति जनगणना से ही मजबूत किया जा सकता है।
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भाजपा के गढ़ में बड़े कांग्रेस नेताओं का जमघट
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी और राहुल गांधी, पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश सहित कई वरिष्ठ नेता मंथन में शामिल हुए। बुधवार को दिन भर विचार-विमर्श के बाद हाथ उठाकर प्रस्ताव पारित किया गया। भाजपा शासित राज्य गुजरात में 64 साल के बाद 'न्यायपथ: संकल्प, समर्पण और संघर्ष' विषय पर आयोजित कांग्रेस पार्टी के अधिवेशन में छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल, मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम, अंबिका सोनी, कुमारी सैलजा जैसी हस्तियों ने भी भाग लिया।
एससी-एसटी के लिए बजटीय आवंटन पर गंभीर सवाल
कांग्रेस ने प्रस्ताव में सामाजिक न्याय पर एक खंड समर्पित है। पार्टी के मुताबिक यही इस राजनीतिक दल का 'वैचारिक आधार' है। प्रस्ताव में कहा गया, हमारा दृढ़ विश्वास है कि कोई भी राष्ट्र या समाज उत्पीड़ित, हाशिए पर पड़े और पिछड़े समुदायों को पीछे छोड़कर वास्तविक तरक्की नहीं कर सकता। आरक्षण के सांविधानिक प्रावधानों का आधार भी यही है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में, सत्तारूढ़ पार्टी- भाजपा की वास्तविकता यह है कि एससी/एसटी सब-प्लान और इस समुदाय के लिए होने वाले बजटीय आवंटन को लगभग खत्म कर दिया गया है।
सत्तारूढ़ भाजपा की ओबीसी विरोधी मानसिकता
कांग्रेस ने कहा, आरक्षण पर 50 फीसदी की मनमानी सीमा और जनगणना नहीं कराने ने ओबीसी, एससी और एसटी समुदाय के लोग उचित हक से वंचित हैं। यहां तक कि निजी शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी आरक्षण से भी इनकार किया गया है। यह सब सत्तारूढ़ भाजपा की "एससी, एसटी और ओबीसी विरोधी मानसिकता" दिखाता है।
प्रगतिशील कानूनों को कमजोर किया जा रहा है
12 पेज के प्रस्ताव में कांग्रेस पार्टी ने दावा किया है कि दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के खिलाफ अमानवीय अत्याचारों में हर साल 13 फीसदी की खतरनाक वृद्धि हो रही है। सत्तारूढ़ पार्टी के नेता खुद भी अत्याचारों के ऐसे कई मामलों में संलिप्त पाए गए हैं। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बनाए गए प्रगतिशील कानूनों जैसे पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम (पेसा), 1996; वन अधिकार अधिनियम, 2006 को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है।
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राहुल गांधी ने जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाया
इससे पहले उत्तर प्रदेश की रायबरेली सीट से निर्वाचित लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने कांग्रेस के 84वें अधिवेशन में कहा, तेलंगाना में कांग्रेस सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। हमने जाति जनगणना करायी है। राहुल गांधी ने कहा कि कुछ महीने पहले, मैंने संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा था कि हमें देश में जाति जनगणना करवानी चाहिए... मैं जानना चाहता था कि इस देश में किसकी कितनी हिस्सेदारी है और क्या यह देश सही मायने में आदिवासी, दलित और पिछड़े समुदायों का सम्मान करता है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस ने जाति जनगणना से साफ इनकार कर दिया क्योंकि वे नहीं चाहते कि इस देश में अल्पसंख्यकों को कितनी हिस्सेदारी मिलती है, यह पता चले। मैंने उनसे कहा कि हम संसद में आपके सामने ही जाति जनगणना कानून पारित करेंगे।
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