फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Congress Gen Secy jairam ramesh released Project Cheetahs letter of 2009 on Twitter targeted PM Narendra Modi

Project Cheetah: अब चीते को लाने के श्रेय पर विवाद, जयराम रमेश ने पत्र जारी कर कहा- प्रधानमंत्री आदतन झूठे

Mon, 19 Sep 2022 01:52 AM IST
निर्मल कांत एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 19 Sep 2022 01:52 AM IST
सार

पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश ने ट्वीट किया कि यह वो पत्र है, जिसके जरिए 2009 में प्रोजेक्ट चीता शुरू किया गया था। हमारे प्रधानमंत्री आदतन झूठे हैं। मैं इस पत्र को पहले जारी नहीं कर सका, क्योंकि भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त था।

विज्ञापन
Congress Gen Secy jairam ramesh released Project Cheetahs letter of 2009 on Twitter targeted PM Narendra Modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता जयराम रमेश (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देश में 70 साल बाद चीते को लाने के श्रेय पर अब विवाद हो गया है। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को दावा किया कि उन्होंने 2009 में प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत की थी। रमेश ने इस संबंध में एक पत्र भी ट्विटर पर जारी किया। उन्होंने पीएम के लगाए गए आरोपों को आदतन झूठा करार दिया।

विज्ञापन


दरअसल, शनिवार को मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीते छोड़ने के दौरान निशाना साधा था कि सात दशक पहले देश में विलुप्त हो जाने के बाद चीतों को लाने के लिए कोई रचनात्मक प्रयास नहीं किए गए। 
विज्ञापन


पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश ने ट्वीट किया कि यह वो पत्र है, जिसके जरिए 2009 में प्रोजेक्ट चीता शुरू किया गया था। हमारे प्रधानमंत्री आदतन झूठे हैं। मैं इस पत्र को पहले जारी नहीं कर सका, क्योंकि भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त था। पत्र को उन्होंने तत्कालीन पर्यावरण और वन मंत्री के रूप में 2009 में भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट के एम के रंजीतसिंह को लिखा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


पत्र में क्या लिखा है?
पत्र में लिखा है, मुझे आपका 28 सितंबर और 6 अक्तूबर 2009 का पत्र मिला है। कृपया चीता के मामले में एक विस्तृत रोडमैप तैयार करें, जिसमें विभिन्न  संभावित स्थलों का विस्तृत विश्लेषण शामिल होना चाहिए। विश्लेषण भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा बीएनएचएस और डब्ल्यूटीआई जैसे अन्य संगठनों के सहयोग से किया जाना चाहिए। आप इस अध्ययन में राज्य वन विभागों को भी साथ ले सकते हैं। उम्मीद है कि जनवरी, 2010 के अंत तक रोडमैप पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को सौंप दिया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed