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Congress Chintan Shivir: कांग्रेस सोशल इंजीनियरिंग की राह पर, संगठन में कमजोर वर्गों को दे सकती है 50 फीसदी प्रतिनिधित्व
Sat, 14 May 2022 11:28 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sat, 14 May 2022 11:28 PM IST
सार
समूह के संयोजक सलमान खुर्शीद का कहना है कि पार्टी समाज के लोगों को विश्वास दिलाना चाहती है कि कथनी और करनी में अंतर नहीं है। हम रोजगार के साथ सामाजिक भागीदारी चाहते हैं। पार्टी जातियों की भागीदारी को लेकर भी संगठन में बदलाव ला रही है।
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राजस्थान में कांग्रेस का चिंतन शिविर
- फोटो : Social Media
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विस्तार
कांग्रेस सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले की तरफ कदम बढ़ाते हुए संगठन में सभी स्तरों पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दे सकती है। पार्टी महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण की अपनी पुरानी नीति में कोटे में जाति आधारित आरक्षण के समर्थन में उतरेगी। वहीं निजी क्षेत्र में भी कमजोर औंर पिछड़ी जातियों के आरक्षण के पक्ष में खुलकर सामने आई है। कांग्रेस सरकार आने पर जातिगत आधार पर जनगणना पर भी सहमत है।
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निजी क्षेत्र में आरक्षण को लेकर पार्टी नेता के. राजू का तर्क है कि सरकारी क्षेत्रों में नौकरी के मौके बहुत कम होते जा रहे हैं इसलिए निजी क्षेत्रों में आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए। चिंतन शिविर के लिए गठित सामाजिक न्याय, महिला और अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर गठित समूह की सिफारिश पर रविवार को सीडब्ल्यूसी में मुहर लगनी है।
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समूह के संयोजक सलमान खुर्शीद का कहना है कि पार्टी समाज के लोगों को विश्वास दिलाना चाहती है कि कथनी और करनी में अंतर नहीं है। हम रोजगार के साथ सामाजिक भागीदारी चाहते हैं। पार्टी जातियों की भागीदारी को लेकर भी संगठन में बदलाव ला रही है।
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कांग्रेस में पहले एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के लिए 20 फीसदी का आरक्षण था उसे बढ़ाकर 50 फीसदी करने की तैयारी है। जिन समुदायों को मौका नहीं मिलता उन्हें भी शामिल किया जाएगा। पार्टी में कमजोर और पिछड़े वर्गों के लिए एक सामाजिक न्याय सलाहकार परिषद के गठन का भी प्रस्ताव है। कांउसिल की मदद से पार्टी इन वर्गों से संबंधित नीतिगत मुद्दों पर विचार करेगी।
संसद में महिला आरक्षण बिल में तब जातिगत आरक्षण पर सहमति को लेकर पार्टी नेताओं का कहना है कि उस समय सरकार में शामिल कुछ दल इसके लिए तैयार नहीं थे लेकिन पार्टी अब इसे जरूरी मानती है और इसके पक्ष में है।
धर्मस्थलों की स्थिति में बदलाव न हो अन्यथा विवाद बढ़ेगा : कांग्रेस
कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि देश में किसी भी धर्मस्थल की स्थिति में बदलाव नहीं होना चाहिए अन्यथा इससे बड़े विवाद पैदा होंगे। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि ऐसे विवादों को टालने के लिए नरसिंह राव सरकार ने धर्मस्थल कानून बनाया था। कांग्रेस का यह बयान ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे रोकने का आदेश देने से सुप्रीम कोर्ट के इनकार के एक दिन बाद आया है। चिदंबरम ने कहा, धर्मस्थल कानून व्यापक विचार-विमर्श के बाद बनाया गया था और इसमें एकमात्र अपवाद राम जन्मभूमि था। हमारा विश्वास है कि अन्य सभी धर्मस्थल उसी स्थिति में रहेंगे जिसमें वे अभी हैं और आगे भी ऐसा ही होगा।
ज्ञानवापी मस्जिद मामले पर कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने दिया बयान
ज्ञानवापी मस्जिद मामले पर कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने ट्वीट किया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या फैसले में ही धर्मस्थल कानून को मंजूरी दे दी है। यह बहुत ही सोच-समझकर किया जा रहा था, अयोध्या को उस कानून से बाहर रखा गया। इसलिए हम वह कानून लाए और हम उस विधायिका के साथ पूरी तरह खड़े हैं। हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।