{"_id":"686524d99e95d132010bb2ee","slug":"cong-will-negotiate-only-with-uddhav-sharad-pawar-prithviraj-chavan-on-maharashtra-merger-buzz-2025-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Politics: 'कांग्रेस केवल उद्धव-शरद से करेगी बात', ठाकरे भाइयों और NCP गुटों के विलय की अटकलों पर पृथ्वीराज","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Politics: 'कांग्रेस केवल उद्धव-शरद से करेगी बात', ठाकरे भाइयों और NCP गुटों के विलय की अटकलों पर पृथ्वीराज
Wed, 02 Jul 2025 05:54 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 02 Jul 2025 05:54 PM IST
सार
Politics: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस केवल उद्धव ठाकरे और शरद पवार से ही गठबंधन पर चर्चा करेगी और उप-गठबंधन का फैसला उन्हीं पर छोड़ देगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर एनसीपी का विलय होकर वह एनडीए के साथ जाती है, तो कांग्रेस के लिए महाराष्ट्र में उनके साथ गठबंधन बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। चव्हाण ने शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की पार्टी के एक साथ आने को परिवार का मामला बताया।
विज्ञापन
पृथ्वीराज चव्हाण
- फोटो : एएनआई (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस गठबंधन के मामले पर केवल शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के शरद पवार के साथ चर्चा करेगी और उप-गठबंधन का फैसला उन पर छोड़ देगी। चव्हाण ने यह बात तब कही है, जब इस तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं कि ठाकरे भाई (राज-उद्धव ठाकरे) और राकांपा गुट हाथ मिला सकते हैं।
हालांकि, चव्हाण ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर राकांपा का विलय होता है और वह एनडीए के साथ जाती है, तो कांग्रेस के लिए महाराष्ट्र में उनके साथ गठबंधन बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। पीटीआई से बातचीत में चव्हाण ने शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के एक साथ आने की बात को 'परिवार का मामला' बताया। उन्होंने कहा कि अगर हम किसी गठबंधन में जाते हैं तो सीटों का बंटवारा उद्धव ठाकरे और शरद पवार के साथ होगा और वे किसके साथ उप-गठबंधन करेंगे यह उनका फैसला होगा।
ये भी पढ़ें: 'भविष्य में भी ऐसी नीति स्वीकार नहीं करेंगे', हिंदी भाषा से जुड़ा आदेश वापस होने पर राउत की दो टूक
विज्ञापन
चव्हाण ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति कांग्रेस के मूल्यों के खिलाफ होगा तो हम आपत्ति जताएंगे, अन्यथा यह पारिवारिक परिवार का मामला है। राज ठाकरे के बारे में पूछे जाने पर चव्हाण ने कहा कि वह महाराष्ट्र की राजनीति में एक वरिष्ठ नेता हैं और बड़ी भीड़ खींचते हैं, लेकिन यह भीड़ वोटों में बदलती नहीं दिखती, इसलिए उनका वर्तमान विधानसभा में कोई प्रभाव नहीं है। उन्होंने कहा कि शिवसेना के वोट जुड़ने से कुछ फायदा हो सकता है, लेकिन कांग्रेस केवल उद्धव ठाकरे और शरद पवार से ही बातचीत करेगी।
20 साल में पहली बार मंच साझा करेंगे उद्धव और राज
करीब 20 वर्षों में पहली बार चचेरे भाई उद्धव और राज ठाकरे पांच जुलाई को शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा आयोजित संयुक्त विजय रैली में एक मंच साझा करेंगे। शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने मंगलवार को 'मराठी विजय दिवस' कार्यक्रम के लिए संयुक्त आमंत्रण जारी किया।
उद्धव से मतभेद के बाद राज ने छोड़ी थी पार्टी
शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे ने जनवरी 2006 में पार्टी छोड़ दी थी, जिसके पीछे उद्धव के साथ मतभेद बताए जाते हैं। कुछ महीने पहले राज ठाकरे ने कहा था कि 'मराठी मानुष' के हित में एक होना मुश्किल नहीं है। वहीं, उद्धव ने भी अपने चचेरे भाई के साथ हाथ मिलाने की इच्छा जताई थी। एनसीपी गुटों के विलय की खबरों पर चव्हाण ने कहा कि यह भी परिवार का मामला है और यह उनके ऊपर निर्भर है कि कौन किसके साथ मिलकर नेतृत्व करता है।
ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र में विपक्ष ने सुरंग परियोजना में लगाया 3000 करोड़ के घोटाले का आरोप; किसानों के मुद्दे पर किया वॉकआउट
उन्होंने कहा कि यह आसान नहीं है, क्योंकि कई चुने हुए विधायक और सांसद चाहते हैं कि विकास के लिए सत्ता पक्ष के साथ गठबंधन रहे, ताकि क्षेत्र की सेवा हो सके। जबकि अन्य लोग कहते हैं कि उन्होंने कड़ा संघर्ष किया है और वे कुछ के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। चव्हाण ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि एनसीपी के साथ क्या होगा, वे मिलेंगे या नहीं, कौन किसके साथ जुड़ेगा, कौन नेता बनेगा या क्या वे सीधे एनडीए में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि सभी विकल्प खुले हैं और यह उनके निर्णय पर निर्भर है। अगर वे एनडीए का हिस्सा बनते हैं तो महाराष्ट्र में उनके साथ गठबंधन जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।
2023 में हुआ राकांपा का विभाजन
एनसीपी की स्थापना शरद पवार ने 1999 में की थी, लेकिन जुलाई 2023 में अजित पवार और कुछ अन्य नेताओं ने महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होकर पार्टी को विभाजित कर दिया था। अजित पवार को उपमुख्यमंत्री पद भी मिला था। पार्टी का नाम और प्रतीक 'घड़ी' अजित पवार के गुट को मिला, जबकि पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट को एनसीपी (शरदचंद्र पवार) नाम दिया गया। एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने पिछले महीने कहा था कि जो नेता भाजपा के साथ हाथ मिलाकर अवसरवादी राजनीति करते हैं, उन्हें प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
हालांकि, चव्हाण ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर राकांपा का विलय होता है और वह एनडीए के साथ जाती है, तो कांग्रेस के लिए महाराष्ट्र में उनके साथ गठबंधन बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। पीटीआई से बातचीत में चव्हाण ने शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के एक साथ आने की बात को 'परिवार का मामला' बताया। उन्होंने कहा कि अगर हम किसी गठबंधन में जाते हैं तो सीटों का बंटवारा उद्धव ठाकरे और शरद पवार के साथ होगा और वे किसके साथ उप-गठबंधन करेंगे यह उनका फैसला होगा।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: 'भविष्य में भी ऐसी नीति स्वीकार नहीं करेंगे', हिंदी भाषा से जुड़ा आदेश वापस होने पर राउत की दो टूक
विज्ञापन
चव्हाण ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति कांग्रेस के मूल्यों के खिलाफ होगा तो हम आपत्ति जताएंगे, अन्यथा यह पारिवारिक परिवार का मामला है। राज ठाकरे के बारे में पूछे जाने पर चव्हाण ने कहा कि वह महाराष्ट्र की राजनीति में एक वरिष्ठ नेता हैं और बड़ी भीड़ खींचते हैं, लेकिन यह भीड़ वोटों में बदलती नहीं दिखती, इसलिए उनका वर्तमान विधानसभा में कोई प्रभाव नहीं है। उन्होंने कहा कि शिवसेना के वोट जुड़ने से कुछ फायदा हो सकता है, लेकिन कांग्रेस केवल उद्धव ठाकरे और शरद पवार से ही बातचीत करेगी।
20 साल में पहली बार मंच साझा करेंगे उद्धव और राज
करीब 20 वर्षों में पहली बार चचेरे भाई उद्धव और राज ठाकरे पांच जुलाई को शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा आयोजित संयुक्त विजय रैली में एक मंच साझा करेंगे। शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने मंगलवार को 'मराठी विजय दिवस' कार्यक्रम के लिए संयुक्त आमंत्रण जारी किया।
उद्धव से मतभेद के बाद राज ने छोड़ी थी पार्टी
शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे ने जनवरी 2006 में पार्टी छोड़ दी थी, जिसके पीछे उद्धव के साथ मतभेद बताए जाते हैं। कुछ महीने पहले राज ठाकरे ने कहा था कि 'मराठी मानुष' के हित में एक होना मुश्किल नहीं है। वहीं, उद्धव ने भी अपने चचेरे भाई के साथ हाथ मिलाने की इच्छा जताई थी। एनसीपी गुटों के विलय की खबरों पर चव्हाण ने कहा कि यह भी परिवार का मामला है और यह उनके ऊपर निर्भर है कि कौन किसके साथ मिलकर नेतृत्व करता है।
ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र में विपक्ष ने सुरंग परियोजना में लगाया 3000 करोड़ के घोटाले का आरोप; किसानों के मुद्दे पर किया वॉकआउट
उन्होंने कहा कि यह आसान नहीं है, क्योंकि कई चुने हुए विधायक और सांसद चाहते हैं कि विकास के लिए सत्ता पक्ष के साथ गठबंधन रहे, ताकि क्षेत्र की सेवा हो सके। जबकि अन्य लोग कहते हैं कि उन्होंने कड़ा संघर्ष किया है और वे कुछ के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। चव्हाण ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि एनसीपी के साथ क्या होगा, वे मिलेंगे या नहीं, कौन किसके साथ जुड़ेगा, कौन नेता बनेगा या क्या वे सीधे एनडीए में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि सभी विकल्प खुले हैं और यह उनके निर्णय पर निर्भर है। अगर वे एनडीए का हिस्सा बनते हैं तो महाराष्ट्र में उनके साथ गठबंधन जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।
2023 में हुआ राकांपा का विभाजन
एनसीपी की स्थापना शरद पवार ने 1999 में की थी, लेकिन जुलाई 2023 में अजित पवार और कुछ अन्य नेताओं ने महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होकर पार्टी को विभाजित कर दिया था। अजित पवार को उपमुख्यमंत्री पद भी मिला था। पार्टी का नाम और प्रतीक 'घड़ी' अजित पवार के गुट को मिला, जबकि पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट को एनसीपी (शरदचंद्र पवार) नाम दिया गया। एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने पिछले महीने कहा था कि जो नेता भाजपा के साथ हाथ मिलाकर अवसरवादी राजनीति करते हैं, उन्हें प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन