फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Confusion over the proposed government and farmers meeting on January 15

15 जनवरी को प्रस्तावित सरकार और किसानों की बातचीत पर छाए असमंजस के बादल

Thu, 14 Jan 2021 05:36 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 14 Jan 2021 05:36 PM IST
सार

  • किसानों को दिन भर रहा सरकार से बातचीत का न्यौता आने का इंतजार
  • केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के कार्यालय में भी शाम तक नहीं हो सकी स्थिति साफ

विज्ञापन
Confusion over the proposed government and farmers meeting on January 15
किसान नेता बैठक के दौरान चर्चा करते हुए - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

किसान संगठनों और केन्द्र सरकार के बीच में 15 जनवरी को प्रस्तावित अगले दौर की बातचीत पर असमंजस के बादल मंडरा रहे हैं। केन्द्र सरकार देर शाम तक उच्चतम न्यायालय में मंगलवार को दिए गए दिशा-निर्देशों का इंतजार करती रही। इसके समानांतर विज्ञान भवन में प्रस्तावित वार्ता को लेकर विज्ञान भवन केन्द्र सरकार के दिशा-निर्देशों का इंतजार करता रहा।

विज्ञापन


किसान संगठनों को भी केन्द्र सरकार की तरफ से 15 जनवरी की वार्ता को लेकर कोई खबर नहीं आई। असमंजस यहीं तक नहीं रहा। फोटोग्राफर के लिए जारी होने वाले पास को लेकर हर बार की तरह पीआईबी के पास के लिए भी कोई दिशा-निर्देश नहीं आए और हर स्तर पर शाम चार बजे तक अधिकारी एक-दूसरे को लेकर फोन मिलाते रहे।

विज्ञापन

उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देश पर गौर करेगी सरकार

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि संयुक्त सचिव, अतिरिक्त सचिव सभी को अभी दिशा-निर्देशों का ही इंतजार है। केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर लगातार 15 जनवरी को प्रस्तावित वार्ता के संदर्भ में मंत्रणा कर रहे हैं। मंत्रणा में कानूनी पहलू भी हैं। बताते हैं अभी सरकार को उच्चतम न्यायालय की तरफ से दिए गए दिशा-निर्देशों की आधिकारिक प्रति नहीं मिली है।

विज्ञापन
विज्ञापन


समझा जा रहा है कि केन्द्र सरकार इस प्रकरण में अब उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों पर ही चलना चाहती है। उच्चतम न्यायालय ने किसानों की मांग और तीनों कृषि कानूनों को लेकर एक चार सदस्यीय समिति गठित की है। इस समिति को सभी पक्षों से चर्चा करके दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है। संसद के आगामी बजट सत्र को देखते हुए केन्द्र सरकार के लिए उच्चतम न्यायालय का यह दिशा-निर्देश सहूलियत भरा लग सकता है। ऐसे में किसानों के साथ वार्ता प्रक्रिया तब तक के लिए शिथिल रखने का निर्णय लिया जा सकता है।

भूपिंदर सिंह मान ने वापस लिया कमेटी से नाम

भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष और उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित चार सदस्यीय समिति के सदस्य भूपिंदर सिंह मान ने 14 जनवरी को अपना नाम वापस ले लिया। उन्होंने ई-मेल जारी करके कहा कि वह किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं कर सकते।

मान ने अपने पत्र में लिखा कि वह एक किसान और यूनियन के नेता के तौर पर, किसान यूनियन और जनता के बीच में फैली आशंकाओं को देखते हुए किसी भी पद को त्यागने के लिए तैयार हैं। ताकि पंजाब और देश के किसानों के हितों से कोई समझौता न हो सके। उन्होंने पत्र में लिखा कि वह उच्चतम न्यायालय द्वारा बनाई समिति से खुद को अलग कर रहे हैं और पंजाब के किसानों के साथ खड़े हैं।



भूपिंदर सिंह मान के इस पत्र ने मामले को और उलझा दिया है। इससे जहां उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित कमेटी की आगे की प्रक्रिया खटाई में पड़ती दिखाई दे रही है, वहीं केन्द्र सरकार का भी असमंजस काफी बढ़ रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed