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किरण बेदी बोलीं- पुड्डूचेरी में नौकरशाही के संचालन पर भ्रम, सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका
Wed, 29 May 2019 02:17 AM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Wed, 29 May 2019 02:17 AM IST
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kiran bedi
- फोटो : PTI
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पुड्डुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में प्रशासनिक नियंत्रण पर मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के बाद नौकरशाही में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। बेदी ने याचिका दायर कर प्रशासनिक क्रियाकलापों और उनके अधिकारों को लेकर यथास्थिति बनाए रखने की गुहार लगाई है। याचिका में कहा है कि मुख्यमंत्री द्वारा अधिकारियों को डरा-धमकाकर उनके दफ्तर को अशक्त बनाने की कोशिश की जा रही है। शीर्ष अदालत बेदी की याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही बेदी द्वारा मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका विचार करने का निर्णय लिया है, जिसमें केंद्रशासित प्रदेश को राज्य के समान बताया गया था। बेदी ने अपनी ताजा याचिका में कहा है कि मुख्यमंत्री ने एक आदेश जारी कर अधिकारियों की सेवा शर्तों से संबंधित फाइलों को उपराज्यपाल के पास भेजने से मना कर दिया है। बेदी का कहना है कि उनके अधिकारों को छीना जा रहा है और कानून का शासन खतरे में है। अधिकारी असमंजस की स्थिति में है कि वे हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करें या न करें। उन्हें अवमानना की कार्रवाई का डर भी सता रहा है।
मंगलवार को उपराज्यपाल की ओर से पेश वकील ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि गत 14 मई को मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि हाईकोर्ट के आदेश के तहत कामकाज को अंजाम दिया जाए। इसके बाद अधिकारी असमंजस में हैं। पीठ ने उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए बृहस्पतिवार को याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही बेदी द्वारा मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका विचार करने का निर्णय लिया है, जिसमें केंद्रशासित प्रदेश को राज्य के समान बताया गया था। बेदी ने अपनी ताजा याचिका में कहा है कि मुख्यमंत्री ने एक आदेश जारी कर अधिकारियों की सेवा शर्तों से संबंधित फाइलों को उपराज्यपाल के पास भेजने से मना कर दिया है। बेदी का कहना है कि उनके अधिकारों को छीना जा रहा है और कानून का शासन खतरे में है। अधिकारी असमंजस की स्थिति में है कि वे हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करें या न करें। उन्हें अवमानना की कार्रवाई का डर भी सता रहा है।
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मंगलवार को उपराज्यपाल की ओर से पेश वकील ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि गत 14 मई को मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि हाईकोर्ट के आदेश के तहत कामकाज को अंजाम दिया जाए। इसके बाद अधिकारी असमंजस में हैं। पीठ ने उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए बृहस्पतिवार को याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
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