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चीन के साथ जारी तनातनी के बीच RSS भी हुआ सुरक्षा तैयारियों से संतुष्ट

Wed, 16 Aug 2017 11:26 PM IST
संजय मिश्र, नई दिल्ली
संजय मिश्र, नई दिल्ली Updated Wed, 16 Aug 2017 11:26 PM IST
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Conflicts between india and china but RSS is satisfied with security preparations
Indo-China

डोकलाम में चीन के साथ चल रही भारत की तनातनी के बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी देश की सुरक्षा तैयारियों पर संतुष्टि जताई है। सूत्र बताते हैं कि चीन की चुनौती के सामने भारत की सुरक्षा व्यवस्था के आंकलन के मद्देनजर बीते 4 अगस्त को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजजू के निवास पर एक अहम बैठक हुई थी।

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जिसमें भाजपा महासचिव राम माधव और संगठन महासचिव राम लाल की मौजूदगी के अलावा नौसेने के वाईस एडमिरल के साथ रक्षा मंत्रालय के कई अहम अधिकारी उपस्थित थे। बताया जा रहा है कि संघ की नुमाइंदगी के तौर पर भाजपा में कार्य रहे इन दोनों नेताओं ने चीन की चुनौती के सामने भारत की सुरक्षा तैयारियों की जानकारी ली है।
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इन नेताओं के जरिए संघ ने देश की सुरक्षा तैयारियों को लेकर अपने आशंकाओं को दूर करते हुए संतुष्टि जताई है। सूत्रों की मानें तो देश की सुरक्षा तैयारियों को लेकर संघ अब पूरी तरह से आश्वस्त है।
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इस बैठक का असर माना जा रहा है कि रक्षा मंत्रालय ने अंडमान के इलाके में 7000 करोड के खर्च की विशेष योजना बनाई है। ताकि सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सके। 

संघ को डोकलाम से ज्यादा अंडमान के सुरक्षा की चिंता 

Conflicts between india and china but RSS is satisfied with security preparations
Doklam Dispute
रिजजू के निवास पर 4 अगस्त को हुए बैठक की जानकारी देते हुए पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि संघ को अंडमान के सुरक्षा की ज्यादा चिंता है। उसे भरोसा है कि डोकलाम में भारतीय सेना मजबूत स्थिति में है। तो सीमा के अन्य क्षेत्रों से भी चीन हमारे खिलाफ सीधा पंगा मोल लेने से परहेज करेगा।

लेकिन समुंद्र में चीन के बढते दखल से संघ भी थोडा आशंकित था। मगर सुरक्षा तैयारियों को समझने के बाद यहां भी उसे नौसेना की तैयारियों पर पूरा भरोसा है। दरअसल संघ को देश खासतौर से अंडमान की सुरक्षा को लेकर इसलिए संतुष्ट होना पडा है कि पिछले कुछ समय से भारत को पाकिस्तान और चीन दोनों ही सीमाओं पर तनातनी के माहौल से गुजरना पड रहा है।

सिक्किम, अरुणाचल, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के जोर-जबरदस्ती की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में सुरक्षा की तैयारी केवल थल और वायु तक ही सीमित रखने की जरूरत नहीं बल्कि समुद्र में भी पाकिस्तान और चीन भारत के खिलाफ साजिश रच रहे हैं।

इनकी साजिश कोई गूल न खिलाए इसलिए संघ ने समुद्री सुरक्षा पर संतुष्टि कर लेना ही मुनासिब समझा है। हालांकि पीएम मोदी और सरकार के तमाम मंत्री यह बात लगातार कह रहे हैं कि पाकिस्तान और चीन की इन हरकतों से किसी भी भारतीय को घबराने की जरूरत नहीं है।

बावजूद उसके सन 1962 में चीन से लगे घाव को देखते हुए संघ ने सरकार समुद्री सुरक्षा को भी चाक चौबद बनाने की नसीहत दी है।

अंडमान क्यों है अहम 

Conflicts between india and china but RSS is satisfied with security preparations
Indo-china

अंडमान निकोबार द्विप समूह को लेकर संघ की चिंता इसलिए है कि इस द्विप का अंतिम टापू इंडोनेशिया से महज 36 नॉटिकल माइल्स की दूरी पर है। मल्लका जलडमरू मध्य ही हमें अलग करता है।

मलक्का स्ट्रेट इंडोनेशिया और मलेशिया के बीच का हिस्सा है. यह हिंद महासागर और प्रशांत को जोड़ता है.​ इसलिए यहां समुद्री सीमा की सुरक्षा बेहद कठीन कार्य माना जाता है। अंडमान के करीब 500 से ज्यादा द्विपों में से 35 पर ही आबादी बसती है।

शेष पर जंगल और टापू हैं। लेकिन भारत की समुद्री सुरक्षा यहां इसलिए मजबूत है कि भारतीय नौसेना के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक अडडा यहीं पर है। बावजूद उसके भारत ने मलक्का के पास अपने चेक प्वाइंट्स की सुरक्षा और निगरानी दोनों ही पुख्ता कर ली है।

रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अंडमान के इलाके में चीन कई वजहों से भारत के खिलाफ सीधा मोर्चा नहीं ले सकता है। इसकी वजह के रूप में उसकी उर्जा जरूरतों सबसे अहम है।

चीन सबसे अधिक ईंधन का आयात पश्चिमी एशिया और अफ्रीका से करता है। और इसकी आपूर्ति मलाक्का की खाड़ी से ही होती है। चीन का 80 प्रतिशत ईंधन हिन्द महासागर या मलक्का की खाड़ी के रास्ते पहुंचता है।

यदि मलक्का की खाड़ी में चीन ने भारत से पंगा लिया तो उसे इधन संकट का सामना करना पड सकता है। अपनी नौसेना की क्षमता के बल पर भारत बडे आसानी से मलक्का की खाड़ी या हिन्द महासागर में चीन को होने वाली ईंधन आपूर्ति रोक सकता है। 

मजबूत हो रही भारतीय नौसेना  

Conflicts between india and china but RSS is satisfied with security preparations
indian navy ship

चीन के नापाक हरकतों को नेस्तानबूद करने के मकसद से  भारत की नौसेना दुनिया के सबसे चुस्त और सबसे घातक युद्ध उपकरणों में से एक कहे जाने वाले आईएनएस कालवारी के वितरण की तैयारी कर रही है।

भारतीय नौसेना के पास फिलहाल 13 पारंपरिक डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन हैं। भारत ने फ्रांस से तीन और पनडुब्बी खरीदने का फैसला पहले ही ले लिया है। और फ्रांस 6 सबमरीन 2018 तक भारत के साथ मिलकर तैयार करेगा।

इसके अलावा भारत की छह सबमरीन मझगांव डॉक पर खड़ी हैं और छह न्यू जनरेशन स्टील्थ सबमरीन के टेंडर अगले साल तक जारी कर दिए जाएंगे। कोंकण के समुद्री इलाके में बने मझगांव डॉकयार्ड में भारत ने पहला स्वदेशी पनडुब्बी सबमरीन तैयार किया है जोकि कई दौर के परीक्षण में सफल भी हो चुकी है।

यह पनडुब्बी एंटी सबमरीन, बारूदी सुरंग बिछाने, खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी के साथ कई मिशन को एकसाथ अंजाम दे सकती है। भारत अपनी इस पनडुब्बी सबमरीन को अंडमान और निकोबार के पास मलक्का स्ट्रेट में तैनात करेगा। ताकि इस क्षेत्र में चीन के किसी भी दखल को चुनौती दी जा सके। 

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