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सोशल मीडिया की नई गाइडलाइन पर डीएम ने पत्रकार को भेजा नोटिस, केंद्र ने बताया अतिक्रमण

Wed, 03 Mar 2021 11:22 AM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Wed, 03 Mar 2021 11:22 AM IST
सार

  • सोशल मीडिया और ओटीटी को लेकर नई गाइडलाइंस
  • इसके तहत मणिपुर के डीएम ने जारी किया पहला नोटिस
  • केंद्र ने डीएम की कार्रवाई को अतिक्रमण करार दिया
  • केंद्र के हस्तक्षेप के बाद डीएम ने वापस लिया नोटिस

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Conflict on new social media guidelines : DM in Manipur sent notice to journalist running talk show on social media, Center said you do not have the right
रविशंकर प्रसाद - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर जारी की गई गाइडलाइंस पर अब अधिकारों को लेकर बहस छिड़ गई है। नई गाइडलाइन के तहत मणिपुर में इम्फाल के जिलाधिकारी ने एक पत्रकार को नोटिस भेजा। इस कार्रवाई पर हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने नोटिस को अतिक्रमण करार दिया। केंद्र ने कहा कि आपको कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है। 

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मणिपुर में इम्फाल वेस्ट के जिलाधिकारी नोआराम प्रवीन ने नए नियमों के तहत पहला नोटिस सोशल मीडिया पर टॉक शो चलाने वाले एक पत्रकार को भेजा। यह टॉक शो करेंट अफेयर्स और न्यूज पर आधारित है, जिसका प्रसारण सोशल मीडिया के जरिए किया गया। डीएम को टॉक शो के कुछ पॉइंट्स पर आपत्ति थी। इस कार्रवाई को सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने अतिक्रमण करार दिया। इसके बाद पत्रकार को भेजा गया नोटिस वापस ले लिया गया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि  इस नई गाइडलाइन के तहत आपको यानी जिले के अधिकारियों को कार्रवाई का कोई अधिकार नहीं दिया गया है।
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केंद्र सरकार ने किया हस्तक्षेप
इस संबंध में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव अमित खरे ने मणिपुर के मुख्य सचिव राजेश कुमार को पत्र लिखा है। एक मार्च को भेजे गए पत्र में इम्फाल वेस्ट के डीएम नोआराम प्रवीन सिंह और खन्नासी नीनासी के प्रकाशक का जिक्र किया गया है। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि जिलाधिकारी ने खन्नासी नीनासी के प्रकाशक से उन मानदंडों को साबित करने के लिए कहा था, जो वेब पत्रकारों के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा तय किए गए हैं। डीएम के नोटिस में उल्लेख किया गया है कि अनुपालन न करने की स्थिति में कार्रवाई की जाएगी। 
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पत्रकार से नोटिस वापस लिया गया
खरे ने पत्र में आगे कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2021 के तहत 25 फरवरी को बनाया गया था। इन नियमों के तहत राज्य सरकार के अधिकारियों को किसी प्रकार की कार्रवाई करने का अधिकार नहीं दिया गया है। पत्र में आगे कहा गया कि प्रकाशक को दिए गए नोटिस को तुरंत वापस लेना होगा।  यह पूरी तरह से अतिक्रमण का मामला है। इसके बाद पत्रकार को भेजे गए नोटिस को वापस ले लिया गया।


बता दें कि केंद्र सरकार ने 25 फरवरी को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 की अधिसूचना जारी की थी। इसी के तहत एक मार्च को मणिपुर में एक कार्यक्रम को लेकर नोटिस जारी किया गया है।
 

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