फिल्मी हस्तियों की अपील पर मूवी के टिकट से 'जीएसटी' माफ हो जाता है पर 'केंद्रीय सुरक्षा बलों' की कैंटीन को नहीं मिलती छूट!
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के रणबीर सिंह बताते हैं कि सियाचिन भत्ते की तर्ज पर केंद्रीय सुरक्षा बलों के उन जवानों को 30 हजार रुपये से 42500 रुपये भत्ता दिया जाए, जो अत्यधिक जोखिम वाले स्थानों पर ड्यूटी करते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 100 दिन की छुट्टी देने की घोषणा तो कर दी, मगर अभी वह निर्णय लागू नहीं किया जा सका है...
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देश के लिए अपनी जान देने वाले केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को वेतन भत्ते और दूसरी मूलभूत सुविधाओं के लिए लड़ना पड़ रहा है। बीस हजार फुट की ऊंचाई पर केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान दुश्मन से लोहा लेते हैं। जैसलमेर सरहद पर 55 डिग्री तापमान में प्याज व पापड़ के सहारे ड्यूटी पूरी करते हैं। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने बताया, जब सिने जगत का कोई नामी चेहरा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर अपनी फिल्म के टिकट से 'जीएसटी' माफ करने की मांग करता है तो वह तुरंत मान ली जाती है। दूसरी तरफ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लाखों जवान वर्षों से यह मांग कर रहे हैं कि उनकी सीपीसी कैंटीन के उत्पादों पर अगर पूरा न सही तो कम से कम पचास फीसदी जीएसटी की छूट प्रदान कर दें। बतौर रणबीर सिंह, आज तक एक पैसे की छूट नहीं मिली। भारी जीएसटी की वजह से सीपीसी कैंटीन बाजार भाव पर आ गई हैं।
एसोसिएशन के मुताबिक, इस बाबत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की गई थी। उन्होंने भरोसा दिया था कि केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों के वेतन भत्तों एवं दूसरी सुविधाओं को लेकर जल्द ही सकारात्मक पहल की जाएगी। अभी तक कुछ नहीं हो सका। केंद्रीय रक्षा मंत्री और गृह राज्य मंत्री सहित पीएमओ को भी अपनी मांगों से अवगत कराया गया है। अब तीस जून को केंद्रीय सुरक्षा बलों की मांगों की खातिर सोशल मीडिया पर एक बड़ा अभियान शुरू किया जाएगा। रणबीर सिंह बताते हैं कि सियाचिन भत्ते की तर्ज पर केंद्रीय सुरक्षा बलों के उन जवानों को 30 हजार रुपये से 42500 रुपये भत्ता दिया जाए, जो अत्यधिक जोखिम वाले स्थानों पर ड्यूटी करते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 100 दिन की छुट्टी देने की घोषणा तो कर दी, मगर अभी वह निर्णय लागू नहीं किया जा सका है। कई जगहों पर छुट्टी न मिलने के कारण विवाद हो जाता है। जवान को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ता है। सीआईएसएफ जवानों को तो सालाना तीस दिन का अवकाश मिलता है।
बीएसएफ, आईटीबीपी, सशस्त्र सीमा बल और असम राइफल्स दिनरात हमारी सीमाओं की रक्षा करते रहते हैं। रक्षा करते हुए अनेक जवान वीरगति को प्राप्त होते हैं। सवा तीन लाख जवानों वाली केन्द्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स विश्व की सबसे अधिक संख्या वाली सशस्त्र पैरामिलिट्री फ़ोर्स है। यह हमारी सीमाओं के पीछे रहती है तथा देश में आतंकवादियों और नक्सलियों से मुकाबला करती है। पुलवामा में सीआरपीएफ के चालीस जवानों ने शहादत दी थी। आए दिन इस बल के जवान देश की खातिर अपनी जान न्योछावर करते हैं।
रिटायरमेंट के बाद जीवन की संध्या में एक सम्मानित एवं गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए पेंशन होना बेहद जरूरी है। गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले सशस्त्र बलों के प्रति विसंगति व भेदभाव केंद्र सरकार की स्वयं की नीति के विरुद्ध है। केंद्र सरकार के 22 दिसम्बर, 2003 व 6 अगस्त, 2004 के आदेशों से यह बात स्पष्ट होती है। कई बार आवेदन देने के बावजूद सरकार ने कुछ भी नहीं किया है। सर्वोच्च न्यायालय में याचिका लगाई गई है कि गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले सशस्त्र बलों में जारी वेतन विसंगतियां व भेदभाव को समाप्त किया जाए। इन बलों में वही पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए, जो रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सशस्त्र बलों के लिए मान्य की गई है।
भारतीय सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के जवान देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करते हैं, मगर शहीद का दर्जा केवल आर्मी पर्सन को मिलता है। सीएपीएफ जवानों को शहीद नहीं माना जाता। एसोसिएशन की प्रमुख मांगों में रिटायर्ड जवानों को एक्स सीएपीएफ का दर्जा देना, सीपीसी कैंटीन पर जीएसटी से छूट दें व जवानों को सीएसडी कैंटीन की सुविधा प्रदान करें, वन रैंक वन पैंशन दिया जाए, पैरा मिलिट्री सर्विस रूल बनाए जाएं, असम राइफल की तर्ज पर ईसीएचएस मेडिकल सुविधा बाकी के केंद्रीय सुरक्षा बलों को दी जाए, शहीदों के आश्रितों को एक करोड़ रुपये दिए जाएं व बीएसएफ रूल 19 के तहत जबरी घर भेजे गए तकरीबन सात सौ जवानों की पैंशन बहाल की जाए। सुरक्षा बलों के कैडर अधिकारियों को बलों का डीजी नियुक्त किया जाए। पुरानी पैंशन व्यवस्था अविलंब शुरू करें। जवान, अपने जीवन के चालीस साल देश सेवा में लगाते हैं। जब ये रिटायर होते हैं तो इन्हें पेंशन सुविधा तक नहीं मिलती। सरकार को कई बार लिखा गया है कि सीएपीएफ को सेना की तर्ज़ पर वन रैंक वन पेंशन दी जाए। सेना एवं अर्धसैनिक बलों के शहीद परिवारों को दी जाने वाली राशि व दूसरी सुविधाओं को लेकर केंद्र एवं राज्य स्तर पर एक जैसी नीति बनाई जाए। राष्ट्रीय शहीद सुरक्षा कोष की स्थापना हो। केंद्र सरकार, इस बाबत राज्य सरकारों को दिशा निर्देश जारी करे।