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Photography: रंगीन तस्वीरें बनाने की होड़ अब बचाने में तब्दील, नई तरह की सौंदर्य कथा कह रहे मौजूदा बदलाव

Thu, 07 Aug 2025 05:15 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली/वाशिंगटन
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली/वाशिंगटन Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 07 Aug 2025 05:15 AM IST
सार

नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी के पुरालेखों में छिपी वे कांच की पट्टियां, जिन्हें कभी दुनिया की पहली रंगीन तस्वीरों में गिना गया था, अब समय-उपेक्षा के हाथों बदल रही हैं। परंतु ये परिवर्तन भी एक नई तरह की सौंदर्य कथा कह रहे हैं।

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competition to create colourful photographs now turned save them current changes telling new kind beauty story
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

ऑटोक्रोम के क्रांतिकारी आविष्कार ने फोटोग्राफी को बदल दिया। अब जब ये तस्वीरें सड़ने लगी हैं, तो वे एक नई तरह की सुंदरता प्रकट कर रही हैं। दुनिया को रंगों में कैद करने की सौ साल पुरानी एक कोशिश आज समय से होड़ ले रही है, तस्वीरें सहेजने की होड़ में।

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नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी के पुरालेखों में छिपी वे कांच की पट्टियां, जिन्हें कभी दुनिया की पहली रंगीन तस्वीरों में गिना गया था, अब समय-उपेक्षा के हाथों बदल रही हैं। परंतु ये परिवर्तन भी एक नई तरह की सौंदर्य कथा कह रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 80 के दशक की शुरुआत में नेशनल जियोग्राफिक के दिवंगत फोटोग्राफर वोल्कमार वेंट्जेल जब पुराने संग्रहालय के तहखानों में उतरे तो उन्हें ऐसा खजाना मिला जो रोमांचक तो था ही, दिल तोड़ने वाला भी था। कांच की नाजुक पट्टियों का एक डिब्बा, जिनमें पोस्टकार्ड के आकार की रंगीन तस्वीरें थीं पर इनमें से कई तस्वीरें समय के थपेड़ों से धुंधली हो चुकी थीं। सफेद परतें, चमकदार आभामंडल और टूटे हुए रंग के दृश्य अब इतिहास की झलक बन चुके थे। 1935 में कोडकक्रोम फिल्म के आने के बाद ऑटोक्रोम प्लेटें पीछे छूट गईं। संरक्षण में लापरवाही के कारण कई कांच प्लेटें फेंक दी गईं। वोल्कमार वेंट्जेल ने इन्हें फिर से खोजा और बचाया। इन्हें जीवनदान मिला।
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दुनिया भर की रंगीन झलकियां
नेशनल जियोग्राफिक के पहले पूर्णकालिक संपादक ने ऑटोक्रोम की संभावनाओं को पहचाना और फोटोग्राफरों को दुनिया भर से रंगीन कांच की प्लेटें मंगाने के निर्देश दिए। नेशनल जियोग्राफिक ने जीवन के जीवंत क्षणों को भी संग्रहित किया अल्बानिया के बाजार, तिब्बत के नर्तक और भारत के जयपुर के हाथियों की रंगीन झांकियां इस संग्रह की शान बने।

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