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कार्रवाई: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच के बाद रेलवे की निविदाएं बढ़ाने वाली 11 फर्मों पर जुर्माना

Wed, 06 Apr 2022 05:14 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 06 Apr 2022 05:14 AM IST
सार

सीसीआई ने बताया कि जांच में ये फर्में मिलीभगत और हेराफेरी करके बोली बढ़ाने की दोषी पाई गई थीं। उत्तर पश्चिम रेलवे की शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू की गई थी। इसमें पता चला कि इन कंपनियों/फर्मों ने आपस में मिलीभगत कर हाई परफॉरमेंस पॉलिमाइड बुश (एचपीपीए) और सेल्फ लुब्रिकेटिड पॉलियस्टर रेजिन बुश (एसएलपीआर) की भारतीय रेलवे को आपूर्ति के लिए निविदा ऊंची दर पर डाली थी।

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Competition Commission of India Investigation 11 firms for raising railway tenders fined
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने मिलकर भारतीय रेलवे की निविदाएं महंगी करने के लिए 11 फर्मों और उनसे जुड़े लोगों पर उनके औसत टर्नओवर/आय का पांच प्रतिशत जुर्माना लगाया है। जुर्माने के लिए चार दरें हैं। सभी को कुल 1.16 करोड़ चुकाने होंगे।

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सीसीआई ने बताया कि जांच में ये फर्में मिलीभगत और हेराफेरी करके बोली बढ़ाने की दोषी पाई गई थीं। उत्तर पश्चिम रेलवे की शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू की गई थी। इसमें पता चला कि इन कंपनियों/फर्मों ने आपस में मिलीभगत कर हाई परफॉरमेंस पॉलिमाइड बुश (एचपीपीए) और सेल्फ लुब्रिकेटिड पॉलियस्टर रेजिन बुश (एसएलपीआर) की भारतीय रेलवे को आपूर्ति के लिए निविदा ऊंची दर पर डाली थी। पूरी प्रक्रिया में हेराफेरी कर इन्होंने निविदा पर एकाधिकार कर लिया था। बुश की बाजार में आपूर्ति को भी वे नियंत्रित कर रही थीं।
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जांच के दौरान इन फर्मों के नियमित ई-मेल, व्हाट्स एप संपर्क, एक समान कीमत बताने, एक ही आईपी एड्रेस से कई पार्टियों के निविदा भरने, आपस में निकटता आदि के प्रमाण मिले। खुद को फंसता देख इनमें से चार फर्मों ने अन्य फर्मों के खिलाफ प्रमाण उपलब्ध कराने का आश्वासन देकर कम जुर्माने की मांग की। सीसीआई ने 11 फर्मों के 14 लोगों को प्रतिस्पर्धा कानून 2002 की धारा 48 के तहत प्रतिस्पर्धा विरोधी आचरण का जिम्मेदार ठहराया।

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