फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Column by Yashwat Vyas Bullet of ethics Glass full of evidence

नैतिकता की गोली सबूतों से भरा गिलास

Tue, 26 Dec 2017 02:54 PM IST
यशवंत व्यास, नई दिल्ली
यशवंत व्यास, नई दिल्ली Updated Tue, 26 Dec 2017 02:54 PM IST
विज्ञापन
Column by Yashwat Vyas Bullet of ethics Glass full of evidence
लालू यादव
जनता को दो टन प्रति मिनट के हिसाब से गुस्सा आ रहा है। जनता कल तक तीन टन प्रति सेकंड के हिसाब से खुश थी। इतनी खुश थी कि प्रसन्नता के मारे मरते-मरते बची। जनता की मुश्किल यह है कि वह देखते ही देखते गति के पैमाने से, वजन के पैमाने में चली जाती है। आप पूछ सकते हैं कि यदि टन के हिसाब से कुछ होना है, तो वह प्रति सेकंड कैसे हो सकता है? इस तरह तो रेल तीन किलोमीटर प्रति किलो के हिसाब से चलने लगेगी। 
विज्ञापन


लेकिन जैसा कि सभी जानते हैं, जनता को आजकल नैतिकता भी सेंटीग्रेड और फारन्हाइट के हिसाब से चढ़ती है। एक बुखार है, जिसे बगल में प्याज दबाकर उठाया जा सकता है या माथे पर पट्टी डालकर गिराया जा सकता है। जब वह भी नहीं होता तो ऐसे शूरवीरों को अवतरण लेना पड़ता है, जो राजनीति के खलल में ईमान कूट कर तबियत से पिला सकें। 
विज्ञापन


ऐसे ही एक शूरवीर से मुलाकात हुई। वे सामाजिक न्याय की कविता से हर घोटाले के बाद हाथ धोते आए थे। कल उन्होंने वीडियोकॉल पर दर्शन दिए थे। 

'देखो भैया, ए. राजा जी छूट गए। अब देखो, राजा तो छूटने के लिए बने होते हैं। अगर जो वे न छूटते तो जनता क्रोधित हो जाती। शुक्र है कि देश एक आग में जलने से बच गया। कानून ने जनता की सुन ली।' 
विज्ञापन
विज्ञापन


'पर, सीबीआई ने ठीक से सबूत पेश नहीं किए होंगे। वर्ना नीलामी रद्द क्यों होती? सुप्रीम कोर्ट जांच पर ही क्यों जाती?' 

'भैया बात है कानून की। जनता जानती है कि राजा ने जो किया होगा, वह अच्छा ही किया होगा। जनता के लोग, जनता से चलते हैं, सबूत से नहीं।' सबूत तो एक किस्म की कारकूनी है। अपनी आत्मा की आवाज से हम तय करते हैं कि घोटाला भी है, तो जनता के भले के लिए है। 

'तो अपनी आत्मा पर हाथ रखकर बताइए, क्या कुछ गड़बड़ नहीं हुई होगी?' 

शूरवीर ने आत्मा टटोली। यह बड़े संतोष का विषय है कि वे जेबें दूसरों की इस्तेमाल करते हैं और आत्मा भी अपने पास नहीं रखते। वह पड़ोसी की जेब में पड़ी मिली। वे सोच ही रहे थे कि पड़ोसी की जेब में हाथ डालकर अपनी आत्मा का कोई अंश छू लें कि एक और खबर आ गई- अशोक चव्हाण को मुंबई के आदर्श घोटाले में मुकदमे से मुक्ति मिल गई है। वे चहके, नाचे और पड़ोसी को चूम लिया। फिर पड़ोसी की जेब में हाथ डालते-डालते, अपनी आत्मा की बजाय उसका पर्स मार दिया। 

पर्स खोलकर बोले, 'न्याय होता है और क्या खूब होता है।' 

पड़ोसी जब तक कुछ सोच पाता, उन्होंने नोट अपने ऊपर ही न्योछावर करके एक चिटफंडिये पर उड़ा दिए। चिटफंडिया, भैंस पर बैठा था और भैंस नैतिकता के लिए जनता को पगुराते हुए चुनौती दे रही थी। 

पगुराना नैतिक विचार का एक अंग है और शूरवीर जो भी भूसा भैंस को पेश करते थे, उसे पगुराने की नैतिकता से जोड़कर अपने सिद्धांत को पक्का कर लेते थे। 

इस विचार के बाद, वे लालू यादव की प्रातःकालीन वार्ता पर आए, ‘ हमारे लालू जी को न्याय व्यवस्‍था पर पूरा भरोसा है। राजा छूटे, चव्हाण मुक्त हो गए, वे भी टहलते हुए निकल ही आएंगे।' उन्होंने समर्थकों को संदेश दिया, 'जनता को दस टन प्रति मिनट की प्रसन्नता पर सैट रखो।' 

रात गुजर गई। सुबह आई। शूरवीर सुबह-सुबह जातिवाद के कड़क कुर्ते पर धर्मनिरपेक्षता का स्वेटर चढ़ाए जनता के जूड़े से उड़ाया हुआ फूल सूंघते मिले। 

'अगर लालू जी को जेल हो गई तो?', हमने पूछा। 

'तो जनता जवाब देगी।'

'लालू जी बरी हो गए तो?'

'तो कानून का पेट भर कर सम्मान करेंगे।'

'जब काम कानून को करना है, तो वह बरी करे या जेल भेजे, बेचारी जनता क्या करेगी?' 

'जनता वो खैनी है, जिसे हम तलब लगने पर खाते है, जरूरत पर थूकते हैं और मौका आने पर थोड़ा बहुत गटक भी जाते हैं।' शूरवीर ने स्पष्‍ट किया। 


'यह तो बड़ा 'तेजस्वी' प्रयोग है। यानी जनता आपकी हथेली के फटके के लेवल की हुई। चूना मला, हथेली फटकी, मुंह में दबाया!' 

 'धत्! 'शूरवीर ने नैतिकता थूक दी। 

लालू जी के जेल जाने की खबर आ गई थी। वह पड़ोसी जिसकी जेब में उनकी आत्मा रखी थी, कहीं गायब हो गया था। 

शूरवीर अब चैनलों पर दहाड़ रहे हैं, 'जनता क्विंटलों के हिसाब से क्रोध में है, टनों के हिसाब से क्रांति के मूड में है, डिग्री के हिसाब से पारा थर्मामीटर तोड़कर बाहर आ गया है।' 

भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता के कंबल में कांप रही जनता पूछ रही है, 'भैया, नैतिकता की गोली और सबूतों से भरा एक गिलास पानी मिलेगा?' 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed