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कफ सिरप कांड: अब पश्चिम बंगाल ने भी लगाया कोल्ड्रिफ पर बैन; एमपी में इससे 20 से ज्यादा बच्चों की हुई है मौत

Fri, 10 Oct 2025 01:18 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 10 Oct 2025 01:18 AM IST
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Coldrif cough syrup banned in Bengal after child deaths linked to it in MP
नकली कफ सिरप (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

मध्यप्रदेश में जहरीली कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। मध्य प्रदेश में गुरुवार को तीन और बच्चों की मौत के बाद मरने वालों की कुल संख्या 20 पर पहुंच गई है। पांच बच्चे अब भी नागपुर में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। जिसके बाद अब एहतियात बरतते हुए पश्चिम बंगाल में भी इस दवा की बिक्री और खरीद पर बैन लगा दिया गया है। पश्चिम बंगाल केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (बीसीडीए) ने राज्यभर के दवा विक्रेताओं को इस सिरप की बिक्री और खरीद तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्देश दिया है।

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बीसीडीए के सचिव पृथ्वी बसु ने बताया कि जिस बैच को मध्यप्रदेश की घटना से जोड़ा जा रहा है, वह पश्चिम बंगाल में नहीं पहुंचा है, लेकिन एहतियातन सभी दवा विक्रेताओं को इस ब्रांड की बिक्री रोकने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि 11 अक्तूबर को दवा विक्रेताओं के साथ बैठक बुलाई गई है, जिसमें इस सलाह को सख्ती से लागू करने पर चर्चा होगी।
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बंगाल राज्य औषधि नियंत्रण बोर्ड ने इन रसायनों की खरीद केवल अनुमोदित विक्रेताओं से करने और प्रमाणित प्रयोगशालाओं में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। तमिलनाडु स्थित कंपनी द्वारा निर्मित इस सिरप से जुड़ी मौतों के बाद कई राज्यों में दहशत फैल गई है। जांच में पाया गया है कि सिरप में प्रोपिलीन ग्लाइकॉल, ग्लिसरीन और सोर्बिटॉल जैसे रसायन हैं, जिनकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
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जहरीला कफ सिरप बनाने वाली दवा कंपनी का मालिक चेन्नई में गिरफ्तार
इस बीच, मध्य प्रदेश पुलिस ने विषाक्त कफ सिरप मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कोल्ड्रिफ बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के मालिक को चेन्नई से गिरफ्तार कर लिया। वहीं, तमिलनाडु सरकार इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में दो वरिष्ठ औषधि निरीक्षकों को निलंबित कर दिया है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि दवा कंपनी के मालिक एस रंगनाथन को बुधवार देर रात गिरफ्तार किया गया। इसके बाद पूछताछ के लिए सुंगुवरछत्रम पुलिस स्टेशन ले जाया गया। मध्य प्रदेश पुलिस 7 अक्तूबर से ही श्रीसन फार्मा के मालिक की तलाश में जुटी थी और इसके लिए चेन्नई पुलिस की मदद से अभियान चलाया गया। पुलिस ने कांचीपुरम स्थित दवा कंपनी के कारखाने से कुछ दस्तावेज भी जब्त किए हैं।

अरुणाचल और तेलंगाना में रोक
इससे पहले अरुणाचल प्रदेश सरकार ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री व उपयोग पर रोक लगा दी। अरुणाचल प्रदेश औषधि नियंत्रण ने श्रीसन फार्मास्युटिकल से निर्मित कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री, वितरण और भंडारण पर प्रतिबंध लगाने संबंधी परामर्श जारी किया है। तेलंगाना के औषधि नियंत्रण प्रशासन ने भी दो कफ सिरप रीलाइफ और रेस्पीफ्रेश टीआर के खिलाफ सार्वजनिक चेतावनी - उपयोग बंद करने का नोटिस जारी किया। इन दोनों सिरप में एक जहरीले पदार्थ की मिलावट पाई गई है।

14 वर्षों से कांचीपुरम की जर्जर इमारत में बेरोकटोक काम कर रही थी कोल्ड्रिफ बनाने वाली कंपनी
मध्य प्रदेश में 20 बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मास्युटिकल है। यह कंपनी 14 वर्षों से तमिलनाडु के कांचीपुरम की एक जर्जर इमारत में बेरोकटोक काम कर रही थी। यहां दवाइयां बेहद गंदगी के बीच बिना किसी उचित सुविधाओं और नियमों के पालन के बनाई जा रही थीं।

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में हुई मौतों के बाद तमिलनाडु के औषधि अधिकारियों की नींद खुली और उन्होंने 2011 से लाइसेंस प्राप्त निर्माण यूनिट का निरीक्षण किया और बाद में परिसर को सील कर दिया। मध्य प्रदेश के औषधि नियंत्रक से पत्र मिलने के एक दिन बाद किए गए इस निरीक्षण में कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर दवा निर्माण, परीक्षण और पैकिंग तक, हर स्तर पर 364 गंभीर और बड़े उल्लंघनों की पुष्टि हुई। मध्य प्रदेश से भी एसआईटी का सात सदस्यीय दल चेन्नई पहुंचकर दवा फैक्टरी की जांच की और खामियों पर रिपोर्ट तैयार की है। कांचीपुरम में वरिष्ठ औषधि निरीक्षक पी नितिन कुमार और तिरुवल्लूर में आर शशिकुमार ने परिसर का निरीक्षण किया और पाया कि कंपनी ने दवाओं के निर्माण के लिए कच्चे माल, प्रोपिलीन ग्लायकॉल का एक गैर-फार्मास्युटिकल ग्रेड खरीदा था। यानी दवा बनाने के लिए उपयुक्त नहीं था। बावजूद इसके कंपनी ने न तो इसकी शुद्धता जांची और न ही इसमें डायथिलीन ग्लायकॉल या एथिलीन ग्लायकॉल की मात्रा का परीक्षण किया।


कंपनी ने दस्तावेज छिपाने का किया प्रयास
औषधि निरीक्षकों ने पाया कि इस घटिया केमिकल से कई दवाएं तैयार की गईं। जांच टीम ने पाया कि कंपनी के पास उस समय प्रोपलीन ग्लायकॉल का कोई स्टॉक नहीं था। कंपनी के पास रसायन खरीद का कोई चालान भी नहीं था। इससे शक और गहरा गया कि कंपनी ने केमिकल को तेजी से खत्म कर दस्तावेज छिपाने की कोशिश की।    

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