{"_id":"687e2395b680287d210f16d6","slug":"coindcx-cryptocurrency-firm-hacking-incident-theft-crypto-exchange-india-e-currency-ethirium-forensics-explain-2025-07-21","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"CoinDCX: क्रिप्टोकरेंसी फर्म से 378 करोड़ लुटे, क्या डिजिटल मुद्रा भी सुरक्षित नहीं, भारत में पहले कब हुआ ऐसा?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
CoinDCX: क्रिप्टोकरेंसी फर्म से 378 करोड़ लुटे, क्या डिजिटल मुद्रा भी सुरक्षित नहीं, भारत में पहले कब हुआ ऐसा?
Mon, 21 Jul 2025 04:55 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 21 Jul 2025 04:55 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
Please wait...
क्रिप्टोकरेंसी फर्म में हैकिंग।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
भारत की चुनिंदा क्रिप्टोकरेंसी फर्म्स में से एक कॉइनडीसीएक्स (CoinDCX) को बड़ा झटका लगा है। डिजिटल करेंसी में डील करने वाली इस कंपनी के प्लेटफॉर्म को हैक कर हैकर्स ने करीब 378 करोड़ रुपये के बराबर की राशि गायब कर दी। कंपनी ने खुद जानकारी देते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया इस घटना की वजह एक साझेदार एक्सचेंज पर प्लेटफॉर्म के अकाउंट में घुसपैठ रही। बताया गया है कि कंपनी इस मामले की विस्तृत फॉरेंसिक जांच करा रही है।ऐसे में यह जानना अहम है कि यह कॉइनडीसीएक्स क्या है? आम बैंकों से हैकिंग कर रकम निकालने की घटना से डिजिटल मुद्रा निकाल लेने की घटना कितनी अलग है? क्या आम मुद्रा की तरह ही डिजिटल करेंसी भी हैकर्स से खतरे में है? कॉइनडीसीएक्स ने जो रकम गंवाई है, उससे उपभोक्ताओं को क्या नुकसान होगा? आइये जानते हैं...
पहले जानें- क्या है कॉइनडीसीएक्स?
कॉइनडीसीएक्स से जुड़ी हैकिंग की घटना से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर कॉइनडीसीएक्स क्या है। कॉइनडीसीएक्स की स्थापना 2018 में आईआईटी बॉम्बे से पढ़े दो दोस्तों सुमित गुप्ता और नीरज खंडेलवाल ने की थी। यह क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज है, जो कि डिजिटल मुद्रा के लेनदेन के जरिए उपभोक्ताओं को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के मौके देता है। इसके संस्थापकों के मुताबिक, कॉइनडीसीएक्स की स्थापना एक केंद्रीकृत मुद्रा प्लेटफॉर्म के तौर पर की गई थी, ताकि इसके जरिए लोग आसानी से सुरक्षित ढंग से डिजिटल मुद्रा का लेनदेन कर पाएं। मौजूदा समय में कॉइनडीसीएक्स अपने प्लेटफॉर्म पर 1.6 करोड़ यूजर्स होने का दावा करता है। साथ ही इसका रोजाना का व्यापार करीब 1 करोड़ डॉलर (86 करोड़ रुपये) तक होने का दावा है।
कॉइनडीसीएक्स से जुड़ी हैकिंग की घटना से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर कॉइनडीसीएक्स क्या है। कॉइनडीसीएक्स की स्थापना 2018 में आईआईटी बॉम्बे से पढ़े दो दोस्तों सुमित गुप्ता और नीरज खंडेलवाल ने की थी। यह क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज है, जो कि डिजिटल मुद्रा के लेनदेन के जरिए उपभोक्ताओं को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के मौके देता है। इसके संस्थापकों के मुताबिक, कॉइनडीसीएक्स की स्थापना एक केंद्रीकृत मुद्रा प्लेटफॉर्म के तौर पर की गई थी, ताकि इसके जरिए लोग आसानी से सुरक्षित ढंग से डिजिटल मुद्रा का लेनदेन कर पाएं। मौजूदा समय में कॉइनडीसीएक्स अपने प्लेटफॉर्म पर 1.6 करोड़ यूजर्स होने का दावा करता है। साथ ही इसका रोजाना का व्यापार करीब 1 करोड़ डॉलर (86 करोड़ रुपये) तक होने का दावा है।
कॉइनडीसीएक्स कैसे हुआ हैकिंग का शिकार?
19 जुलाई को एक लोकप्रिय एथिकल हैकर जैकएक्सबीटी (ZachXBT) ने अपने टेलीग्राम चैनल पर दावा किया कि कॉइनडीसीएक्स हैकिंग का शिकार हुआ है। इसके कुछ ही देर बाद प्लेटफॉर्म के संस्थापक सुमित गुप्ता ने कहा कि हैकर्स ने कॉइनडीसीएक्स से 4.40 करोड़ डॉलर (करीब 378 करोड़ रुपये) गायब कर दिए हैं। गुप्ता ने बताया कि कॉइनडीसीएक्स में हैकिंग एक आंतरिक अकाउंट के जरिए हुई। इस अकाउंट को एक साथी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज को लिक्विडिटी मुहैया कराने के लिए रखा गया था। हैकर्स ने जटिल सर्वर की हैकिंग के जरिए इस अकाउंट से डिजिटल मुद्रा निकाल ली।
Crypto: CoinDCX ने 378 करोड़ की साइबर चोरी के बाद उठाया कदम, चोरों का पता लगाने पर 25 फीसदी इनाम का एलान
19 जुलाई को एक लोकप्रिय एथिकल हैकर जैकएक्सबीटी (ZachXBT) ने अपने टेलीग्राम चैनल पर दावा किया कि कॉइनडीसीएक्स हैकिंग का शिकार हुआ है। इसके कुछ ही देर बाद प्लेटफॉर्म के संस्थापक सुमित गुप्ता ने कहा कि हैकर्स ने कॉइनडीसीएक्स से 4.40 करोड़ डॉलर (करीब 378 करोड़ रुपये) गायब कर दिए हैं। गुप्ता ने बताया कि कॉइनडीसीएक्स में हैकिंग एक आंतरिक अकाउंट के जरिए हुई। इस अकाउंट को एक साथी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज को लिक्विडिटी मुहैया कराने के लिए रखा गया था। हैकर्स ने जटिल सर्वर की हैकिंग के जरिए इस अकाउंट से डिजिटल मुद्रा निकाल ली।
Crypto: CoinDCX ने 378 करोड़ की साइबर चोरी के बाद उठाया कदम, चोरों का पता लगाने पर 25 फीसदी इनाम का एलान
कॉइनडीसीएक्स ने इस पूरी घटना पर एक रिपोर्ट भी जारी की है। इसमें कहा गया है कि शुरुआती जांच में साझेदार एक्सचेंज में मौजूद कॉइनडीसीएक्स के अकाउंट में अवैध घुसपैठ की बात सामने आई है। 378 करोड़ रुपये के बराबर की डिजिटल मुद्रा को अलग-अलग डिजिटल रूट से दो वॉलेट्स में पहुंचाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल मुद्रा को सोलाना-इथीरियम (दो अलग-अलग क्रिप्टोकरेंसी) में बदला गया और एक इथीरियम वॉलेट में पहुंचा दिया गया। जिस अकाउंट में कॉइनडीसीएक्स की डिजिटल मुद्रा पहुंचाई गई है, उसमें करीब 4443 इथीरियम मौजूद हैं जिनकी कीमत 135 करोड़ रुपये है। इसके अलावा एक और सोलाना वॉलेट में 2.76 करोड़ डॉलर (238 करोड़ रुपये) की डिजिटल मुद्रा मौजूद है।
कॉइनडीसीएक्स के अकाउंट पर हैकिंग का खुलासा जैकएक्सबीटी नाम के एथिकल हैकर ने 19 जुलाई को ही कर दिया था। हालांकि, कॉइनडीसीएक्स ने खुद इस मुद्दे की जानकारी 17 घंटे बाद दी। इस पर कंपनी के सीईओ ने कहा है कि वे पहले प्लेटफॉर्म पर मौजूद संपत्तियों को सरक्षित करना चाहते थे। कॉइनडीसीएक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की विस्तृत फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। इसके लिए दो वैश्विक स्तर पर चर्चित सुरक्षा एजेंसियों की सेवाएं ली जा रही हैं। इसके अलावा भारत की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (Cert-In) को भी सतर्क कर दिया गया है।
कॉइनडीसीएक्स के हैक से उपभोक्ताओं को कितना नुकसान?
कॉइनडीसीएक्स ने इसे लेकर भी बयान जारी किया है। प्लेटफॉर्म ने कहा है कि उपभोक्ताओं के फंड्स दूसरे सुरक्षित वॉलेट्स में रखे गए थे। यानी यूजर्स को इस हैकिंग से कोई नुकसान नहीं हुआ है। पूरा का पूरा नुकसान कंपनी खुद अपने रिजर्व से उठाएगी। कॉइनडीसीएक्स ने कहा कि एक्सचेंज पर जमा और निकासी पहले की तरह ही जारी है और पांच लाख रुपये से ज्यादा की निकासी यूजर्स के अकाउंट में पांच घंटे के अंदर दिखाने लगेगी, जबकि पांच लाख रुपये तक की निकासी अकाउंट में 72 घंटे के अंदर हो जाएगी। सुमित गुप्ता के मुताबिक, कंपनी अपने साइबर सुरक्षा साझेदारों के साथ प्लेटफॉर्म की कमियों को दूर करेगी और चोरी हुए फंड्स के लेनदेन पर नजर रखेगी।
कॉइनडीसीएक्स ने इसे लेकर भी बयान जारी किया है। प्लेटफॉर्म ने कहा है कि उपभोक्ताओं के फंड्स दूसरे सुरक्षित वॉलेट्स में रखे गए थे। यानी यूजर्स को इस हैकिंग से कोई नुकसान नहीं हुआ है। पूरा का पूरा नुकसान कंपनी खुद अपने रिजर्व से उठाएगी। कॉइनडीसीएक्स ने कहा कि एक्सचेंज पर जमा और निकासी पहले की तरह ही जारी है और पांच लाख रुपये से ज्यादा की निकासी यूजर्स के अकाउंट में पांच घंटे के अंदर दिखाने लगेगी, जबकि पांच लाख रुपये तक की निकासी अकाउंट में 72 घंटे के अंदर हो जाएगी। सुमित गुप्ता के मुताबिक, कंपनी अपने साइबर सुरक्षा साझेदारों के साथ प्लेटफॉर्म की कमियों को दूर करेगी और चोरी हुए फंड्स के लेनदेन पर नजर रखेगी।
आम बैंकों में रखी राशि के मुकाबले कितनी सुरक्षित है क्रिप्टोकरेंसी?
क्रिप्टोकरेंसी को बैंकों में रखी राशि के मुकाबले हैकिंग से सुरक्षित माना जाता है। इसकी वजह यह है कि क्रिप्टोकरेंसी निकालने और इसे किसी एक अकाउंट में पहुंचाए जाने की घटना को डिजिटल स्तर पर ट्रेस किया जा सकता है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में एक बड़ी मुश्किल यह है कि कई देशों ने अब तक क्रिप्टोकरेंसी को सरकारी स्तर पर मान्यता नहीं दी है। यानी अगर क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी कोई धोखाधड़ी होती है, तो उस देश की सरकारें अपराध के मामलों की जांच या अपराधियों को पकड़ने के लिए बाध्य नहीं होतीं।
भारत में भी क्रिप्टोकरेंसी को सीधे तौर पर मान्यता नहीं मिली है। ऐसे में डिजिटल मुद्रा के लिए कोई नियामक नहीं है, जो कि इसके लेनदेन को नियमित करे या इससे जुड़े अपराधों पर कार्रवाई का अधिकार रखे। हालांकि, भारत के वित्त मंत्रालय ने क्रिप्टोकरेंसी को धनशोधन रोधी अधिनियम का हिस्सा बनाया है। यानी साधारण रुपये की तरह ही डिजिटल मुद्रा के लेनदेन में धनशोधन का मामला जांच एजेंसी के दायरे में होगा। यानी अगर क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल धनशोधन की गतिविधियों के लिए होगा तो इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के साथ कार्रवाई भी हो सकती है। सरकार क्रिप्टोकरेंसी को पहले ही नई टैक्स रिजीम के अंतर्गत 'कर योग्य' मान चुकी है।
क्रिप्टोकरेंसी को बैंकों में रखी राशि के मुकाबले हैकिंग से सुरक्षित माना जाता है। इसकी वजह यह है कि क्रिप्टोकरेंसी निकालने और इसे किसी एक अकाउंट में पहुंचाए जाने की घटना को डिजिटल स्तर पर ट्रेस किया जा सकता है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में एक बड़ी मुश्किल यह है कि कई देशों ने अब तक क्रिप्टोकरेंसी को सरकारी स्तर पर मान्यता नहीं दी है। यानी अगर क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी कोई धोखाधड़ी होती है, तो उस देश की सरकारें अपराध के मामलों की जांच या अपराधियों को पकड़ने के लिए बाध्य नहीं होतीं।
भारत में भी क्रिप्टोकरेंसी को सीधे तौर पर मान्यता नहीं मिली है। ऐसे में डिजिटल मुद्रा के लिए कोई नियामक नहीं है, जो कि इसके लेनदेन को नियमित करे या इससे जुड़े अपराधों पर कार्रवाई का अधिकार रखे। हालांकि, भारत के वित्त मंत्रालय ने क्रिप्टोकरेंसी को धनशोधन रोधी अधिनियम का हिस्सा बनाया है। यानी साधारण रुपये की तरह ही डिजिटल मुद्रा के लेनदेन में धनशोधन का मामला जांच एजेंसी के दायरे में होगा। यानी अगर क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल धनशोधन की गतिविधियों के लिए होगा तो इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के साथ कार्रवाई भी हो सकती है। सरकार क्रिप्टोकरेंसी को पहले ही नई टैक्स रिजीम के अंतर्गत 'कर योग्य' मान चुकी है।
क्या भारत में यह पहला मामला है?
भारत में जुलाई 2024 में कुछ इसी तरह की घटना क्रिप्टोकरेंसी फर्म वजीरएक्स (WazirX) के साथ हुई थी। यह भारत के डिजिटल करेंसी एक्सचेंज पर सबसे बड़ा साइबर हमला था। इसमें हैकर्स ने 23 करोड़ डॉलर (करीब 1900 करोड़ रुपये) के बराबर क्रिप्टोकरेंसी यूजर्स के अकाउंट से चोरी कर लिए थे। यह प्लेटफॉर्म की कुल संपत्ति की करीब आधी राशि थी। तब इस पूरे हैकिंग नेटवर्क का जुड़ाव उत्तर कोरिया के एक समूह- लजैरस ग्रुप से होने की बात सामने आई थी।
दूसरी तरफ दुनिया में क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन में हैकिंग की घटनाएं पहले भी दर्ज हुई हैं। 2022 इसके लिए सबसे बुरा साल था। ब्लॉकचेन डाटा प्लेटफॉर्म चेनालिसिस के मुताबिक, 2022 में उपभोक्ताओं के अकाउंट्स से करीब 3.8 अरब डॉलर (करीब 30 हजार करोड़ रुपये) की राशि उड़ा दी गई थी। साल 2023 में हैकिंग के जरिए यह चोरी 1.7 अरब डॉलर (करीब 14 हजार करोड़ रुपये) रही थी।
भारत में जुलाई 2024 में कुछ इसी तरह की घटना क्रिप्टोकरेंसी फर्म वजीरएक्स (WazirX) के साथ हुई थी। यह भारत के डिजिटल करेंसी एक्सचेंज पर सबसे बड़ा साइबर हमला था। इसमें हैकर्स ने 23 करोड़ डॉलर (करीब 1900 करोड़ रुपये) के बराबर क्रिप्टोकरेंसी यूजर्स के अकाउंट से चोरी कर लिए थे। यह प्लेटफॉर्म की कुल संपत्ति की करीब आधी राशि थी। तब इस पूरे हैकिंग नेटवर्क का जुड़ाव उत्तर कोरिया के एक समूह- लजैरस ग्रुप से होने की बात सामने आई थी।
दूसरी तरफ दुनिया में क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन में हैकिंग की घटनाएं पहले भी दर्ज हुई हैं। 2022 इसके लिए सबसे बुरा साल था। ब्लॉकचेन डाटा प्लेटफॉर्म चेनालिसिस के मुताबिक, 2022 में उपभोक्ताओं के अकाउंट्स से करीब 3.8 अरब डॉलर (करीब 30 हजार करोड़ रुपये) की राशि उड़ा दी गई थी। साल 2023 में हैकिंग के जरिए यह चोरी 1.7 अरब डॉलर (करीब 14 हजार करोड़ रुपये) रही थी।
पहले किन-किन कंपनियों को हुआ है क्रिप्टो एक्सचेंज की हैकिंग से नुकसान?
दुनिया में सबसे बड़ा क्रिप्टोकरेंसी हैकिंग का वाकया मार्च 2022 में हुआ था, जब हैकर्स ने रोनिन नेटवर्क को निशाना बनाया था। इस हैकिंग में 62.5 करोड़ डॉलर (करीब पांच हजार करोड़ रुपये) के बराबर की राशि के इथीरियम और यूएसडीसी स्टेबलकॉइन गायब कर दिए गए थे।
अगस्त 2021 में इसी तरह हैकरों ने पॉली नेटवर्क के सिस्टम को निशाना बनाया और 60 करोड़ डॉलर (करीब 4700 करोड़ रुपये) की राशि के बराबर की डिजिटल मुद्रा गायब कर दी। हालांकि, बैकर्स ने इसमें से काफी रकम वापस भी कर दी थी।
इसी तरह अक्तूबर 2022 में बाइनेंस क्रिप्टो एक्सचेंज की सुरक्षा में बड़ा धावा बोला गया था। हैकर्स ने इस प्लेटफॉर्म से 57 करोड़ डॉलर्स (करीब 4500 करोड़ रुपये) निकाल लिए थे।
दुनिया में सबसे बड़ा क्रिप्टोकरेंसी हैकिंग का वाकया मार्च 2022 में हुआ था, जब हैकर्स ने रोनिन नेटवर्क को निशाना बनाया था। इस हैकिंग में 62.5 करोड़ डॉलर (करीब पांच हजार करोड़ रुपये) के बराबर की राशि के इथीरियम और यूएसडीसी स्टेबलकॉइन गायब कर दिए गए थे।
अगस्त 2021 में इसी तरह हैकरों ने पॉली नेटवर्क के सिस्टम को निशाना बनाया और 60 करोड़ डॉलर (करीब 4700 करोड़ रुपये) की राशि के बराबर की डिजिटल मुद्रा गायब कर दी। हालांकि, बैकर्स ने इसमें से काफी रकम वापस भी कर दी थी।
इसी तरह अक्तूबर 2022 में बाइनेंस क्रिप्टो एक्सचेंज की सुरक्षा में बड़ा धावा बोला गया था। हैकर्स ने इस प्लेटफॉर्म से 57 करोड़ डॉलर्स (करीब 4500 करोड़ रुपये) निकाल लिए थे।