बिजली संकट: केंद्र की सुस्त रफ्तार के बाद खुद के इंतजामों में जुटे राज्य, सड़क मार्ग से कोयला मंगवाने की तैयारी
आंकड़ों के लिहाज से देखें तो घरेलू कोयले पर निर्भर करीब 59 फीसदी बिजली संयंत्रों के पास कोयले का भंडार काफी कम है और खदानों के समीप और दूर स्थित बिजली संयंत्रों के पास सामान्य स्टॉक का केवल 31 फीसदी कोयला बचा है। इसकी वजह से कई राज्य बिजली कटौती का सामना कर रहे हैं। दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, राजस्थान, झारखंड और हरियाणा जैसे राज्यों में बिजली कटौती करनी पड़ रही है...
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बढ़ती गर्मी के बीच कई राज्य कोयले की किल्लत से जूझ रहे हैं। देश बीते छह साल में सबसे विषम बिजली संकट का सामना कर रहा है। इस बीच केंद्र और राज्य सरकारें स्थिति को संभालने में भी जुटी हुईं नजर आ रही हैं। एक तरफ जहां केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कोयला संकट पर मोर्चा संभाल लिया है, तो वहीं दूसरी तरफ राज्य भी अपने स्तर पर कोयले की कमी को दूर करने के प्रयास में जुट गए हैं। सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने कोयला मंत्री, उर्जा मत्री और रेल मंत्री के साथ बैठक की। दरअसल अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्री के बयान आए थे कि राज्यों को समय से कोयला नहीं मिल पा रहा है जिसकी वजह से बिजली संकट खड़ा हो रहा है। इसे देखते हुए गृहमंत्री ने ये बैठक बुलाई थी। इस बैठक में कोयला परिवहन को लेकर चर्चा हुई। कोयले की सप्लाई को कैसे बाधित होने से रोका जाए, बैठख में इस पर मंथन किया गया। ताकि सभी राज्यों में कोयले की आपूर्ति सुचारू तौर पर हो सके और बिजली संकट को रोका जा सके।
आंकड़ों के लिहाज से देखें तो घरेलू कोयले पर निर्भर करीब 59 फीसदी बिजली संयंत्रों के पास कोयले का भंडार काफी कम है और खदानों के समीप और दूर स्थित बिजली संयंत्रों के पास सामान्य स्टॉक का केवल 31 फीसदी कोयला बचा है। इसकी वजह से कई राज्य बिजली कटौती का सामना कर रहे हैं। दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, राजस्थान, झारखंड और हरियाणा जैसे राज्यों में बिजली कटौती करनी पड़ रही है। राजस्थान में बिजली की सबसे ज्यादा 33 फीसदी, हरियाणा में 14 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 4.5 फीसदी और मध्यप्रदेश में 11 फीसदी किल्लत देखी जा रही है। 30 अप्रैल तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में बिजली की कुल अधिकतम मांग 1,86,950 मेगावाट थी जबकि 12.78 करोड़ यूनिट बिजली की कमी थी। 29 अप्रैल को करीब 14 राज्यों में पारा 44 डिग्री के पार पहुंचने की वजह से बिजली की मांग रिकॉर्ड 2,07,111 मेगावाट तक पहुंच गई थी।
राजस्थान, गुजरात ने बिजली कटौती का बनाया टाइम टेबल
इधर, कई राज्य बिजली संकट दूर करने के उपायों में जुट गए हैं। बिजली की सबसे ज्यादा किल्लत का सामना कर रहे राजस्थान ने पूरे राज्य में दैनिक कटौती की समय सारिणी घोषित कर दी है। इसके तहत संभागीय मुख्यालय में एक घंटे, जिला मुख्यालय में दो घंटे और शहरों में तीन घंटे की बिजली कटौती की जाएगी। वहीं उद्योगों के लिए निर्देश है कि शाम सात बजे से 10 बजे तक 50 फीसदी क्षमता से संचालन किया जाए। ग्रामीण इलाकों में पहले से अघोषित कटौती चल रही है।
गुजरात सरकार ने उद्योगों से हफ्ते में अलग-अलग दिन साप्ताहिक अवकाश करने के लिए कहा है, ताकि बिजली खपत में अचानक कमी या बढ़ोतरी से बचा जा सके। गुजरात में दैनिक बिजली की मांग साल भर पहले के मुकाबले 35 से 40 फीसदी बढ़ गई है लेकिन अधिकतर मांग कृषि और घरेलू क्षेत्रों से आ रही है।
दिल्ली में भी मच रहा हाहाकार
ओडिशा में बिजली की अधिकतम मांग 4,567 मेगावाट है, जबकि उसे 200 से 250 मेगावाट कम बिजली मिल रही है। राज्य की एक बिजली इकाई सालाना रखरखाव कार्य के लिए बंद है, लेकिन एनटीपीसी पर बोझ बढ़ने से उसे भी कटौती करनी पड़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप राज्य में शनिवार से शाम सात बजे से लोड का नियमन किया गया है।
दिल्ली में बिजली की 6000 मेगावाट की पीक डिमांड है। लगभग 21 दिनों से ज्यादा का बैकअप हमेशा ही सभी पावर प्लांट्स में रहा करता था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यह बैकअप सिर्फ 1-2 दिन का रह गया है। राज्य सरकार ने स्वीकार किया है कि दिल्ली में स्थिति गंभीर है। कोयले की कमी के कारण बिजली संकट मंडरा रहा है। दिल्ली सरकार का कहना है कि कोयले की भयंकर कमी का सबसे बड़ा कारण रेलवे के रैक का कम होना है।
यूपी में सिर्फ एक चौथाई कोयले का स्टॉक
उत्तर प्रदेश में बिजली संकट जारी है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही शहरी क्षेत्रों में भी अघोषित बिजली कटौती हो रही है। प्रदेश में बिजली की मांग 21,698 मेगवाट तक पहुंच गई है। जबकि उपलब्धता घटकर लगभग 19000 मेगावट के आसपास है। दरअसल, राज्य में सिर्फ एक चौथाई कोयले का स्टॉक रह गया है। यह जरूरी स्तर से भी नीचे है। सूत्रों के मुताबिक, यूपी में गर्मी के चलते बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है। पिछले 38 साल में पहली बार अप्रैल महीने में यूपी में बिजली की इतनी मांग सामने आई है। गहराते बिजली संकट के बीच यूपी के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने जनता से बिजली बचाने की अपील की है। उन्होंने कहा, गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ी है। वहीं कई बिजली उपक्रम तकनीकी कारणों से हफ्तों से बंद हैं। यूपी राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बताया कि प्रदेश के बिजली घरों के लिए रोजाना 87900 मीट्रिक टन कोयले की जरूरत है, जबकि आपूर्ति 61 हजार मैट्रिक टन की ही हो पा रही है। मतलब साफ है कि जितने कोयले की जरूरत है उससे लगभग 30 फीसदी कम कोयला उपलब्ध है।
महाराष्ट्र के पास चार दिन की जरूरत का ही कोयला
महाराष्ट्र में प्रतिदिन 28,000 मेगावाट बिजली की मांग है, जो जून तक 30,000 मेगावाट पर पहुंच सकती है। राज्य सरकार ने पिछले 10 दिन में किसी तरह बिजली कटौती से बचने का प्रयास किया। पिछले साल की तुलना में बिजली की मांग 2,500 मेगावाट अधिक है। लेकिन राज्य के बिजली संयंत्रों का कोयले का भंडार भी कम हो रहा है। महाराष्ट्र राज्य बिजली उत्पादन इकाइयों को रोजाना 1,41,000 टन से अधिक कोयले की जरूरत है। लेकिन उत्पादन संयंत्रों के पास 5,95,000 टन का ही स्टॉक है, जिससे चार दिन की जरूरत ही पूरी हो सकती है। राज्य सरकार का तर्क है कि महाजेनको जल्द ही करीब 14 लाख टन अतिरिक्त कोयले का आयात करेगी, जिनमें से चार लाख टन मई के मध्य से आने लगेगा। महावितरण रोजाना 24,200 मेगावाट बिजली का वितरण करती है, जिनमें से महाजेनको 7,700 मेगावाट की आपूर्ति कर रही है। वहीं तमिलनाडु गर्मियों में बिजली की मांग में बढ़ोतरी से निपटने के लिए 4.8 लाख टन कोयला आयात करने के बारे में विचार कर रहा है। यह कोयला 20 मई से पहले आयात किया जाएगा।
सड़क के रास्ते कोयला मंगवाएगी एमपी सरकार
मध्यप्रदेश में कोयला संकट से निपटने के लिए शिवराज सरकार ने बड़ा फैसला किया है। रेलवे रैक नहीं मिलने की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने अब सड़क मार्ग से कोयला खरीदने की तैयारी कर ली है। इसके लिए सरकार ने 30 लाख मीट्रिक टन कोयला खरीदी का ऑर्डर जारी कर दिया है। इसके अलावा चार लाख मीट्रिक टन कोयला सड़क मार्ग से लाने का नया ऑर्डर भी जल्द जारी करने की तैयारी है। इनसे थर्मल पावर प्लांट में होने वाले कोयले की कमी को पूरा किया जाएगा। सरकार नागपुर के आसपास की कोल माइन से कोयला खरीदने की तैयारी कर रही है। सरकार की कोशिश है कि प्रदेश के थर्मल पावर प्लांटों में जरूरत के लिहाज से कोयले का स्टॉक किया जाए, ताकि आगामी रबी सीजन में भी कोयले की कमी परेशानी खड़ी न करे।
गर्मियों में बढ़ जाती है बिजली की डिमांड
मार्च में बिजली की डिमांड 8.9 फीसदी बढ़ गई है। हर साल गर्मियों में बिजली की खपत बढ़ जाती है। एक दिन में बिजली की पीक डिमांड अप्रैल में 207.11 गीगावॉट रही। 2021 में यही 182 गीगावॉट और 2020 में 133 गीगावॉट थी। भारत में पिछले चार साल में सबसे अधिक बिजली की डिमांड है। बिजली संकट के लिए मुफ्त में बिजली देने की होड़ और विद्युत कंपनियों का राज्यों पर एक लाख करोड़ से अधिक की रकम बकाया है। हालांकि इसके बावजूद राज्यों की बिजली नहीं रोकी गई है।
छह साल बाद सबसे अधिक संकट
बिजली का संकट पिछले छह साल में सबसे अधिक है। पावर सिस्टम ऑपरेशन कार्पोरेशन की रिपोर्ट के अनुसार पिछले छह वर्षों में पहली बार इस तरह का बिजली संकट पैदा हुआ है। अप्रैल-2022 के पहले 27 दिन में मांग की तुलना में 1.88 बिलियन यूनिट बिजली का संकट बना रहा। पिछले साल अक्तूबर में भी बिजली संकट गहरा गया था। लेकिन इस बार हालात और अधिक खराब हैं। अगर सिर्फ ओडिशा की बात करें, तो कोयले के अभाव में एनटीपीसी का एक संयंत्र बंद है, इससे 800 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होता है।