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कोयला संकट: ग्रिड बचाने पर केंद्र का फोकस, ऊर्जा मंत्रालय ने उच्च स्तरीय बैठक में बनाई रणनीति
Sat, 09 Oct 2021 10:41 PM IST
Amit Mandal
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Amit Mandal
Updated Sat, 09 Oct 2021 10:41 PM IST
सार
ऊर्जा मंत्रालय ने सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी को सलाह दी है कि 2021-22 में कोयले की खपत 700 मीट्रिक टन पंहुचने की संभावना है, लिहाजा कोयले का पर्याप्त भंडारण करें।
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कोयला
- फोटो : pixabay
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विस्तार
कोयला संकट के मद्देनजर कोयला एवं ऊर्जा मंत्रालय ने संभावित बिजली संकट से देश को बचाने की कवायद तेज कर दी है। बिजली संयंत्रों में सिर्फ तीन दिन का कोयला बचने से ग्रिड फेल होने संकट बढ़ गया है। सरकार का फोकस इस संकट को टालना है। ऊर्जा मंत्रालय से शनिवार को उच्चस्तरीय बैठक में पॉवर ग्रिड को बचाने की रणनीति बनाने के साथ कोयला मंत्रालय को भी कड़े कदम उठाने के सुझाव दिए हैं।
मंत्रालय ने साफ कहा कि कोल इंडिया का बकाया नहीं चुकाने वाली कंपनियों को कोयला देने में प्राथमिकता में सबसे नीचे रखा जाए। वहीं समय पर भुगतान करने वाले राज्यों और कोल कंपनियों को प्राथमिकता दी जाए। उधर, कोल इंडिया ने भी प्रभावित राज्यों की आपूर्ति बढ़ाने पर एक्शन प्लान तैयार किया है। ऊर्जा मंत्रालय ने सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी को सलाह दी है कि 2021-22 में कोयले की खपत 700 मीट्रिक टन पंहुचने की संभावना है, लिहाजा कोयले का पर्याप्त भंडारण करें। जो प्लांट कोयले का स्टाक नहीं रख रहे हैं उन पर जुर्माना भी लगाया जाए।
ट्रेनों के चक्के थमने का भी संकट
देश में कोयला आधारित 99 बिजली संयंत्रों में बिजली उत्पादन के लिए करीब तीन दिन का ही कोयला शेष बचा है। ऐसे में रेलवे को बिजली सप्लाई रुकने से रेल सेवाओं के प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ गया है। दरअसल देश में लॉकडाउन के दौरान औद्योगिक मांग में तेजी से कमी आने पर कोल इंडिया ने अपना उत्पादन घटा दिया था। हालांकि कोल इंडिया लगातार उन राज्यों पर दबाव बना रही जिन पर करोड़ों बकाया है।
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संकट की ये भी वजह
लॉकडाउन खुलने और अर्थव्यवस्था में सुधार होते ही देश में सभी क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ा है। जिससे बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है।
सितंबर में अधिक बारिश होने से खदानों में पानी भरने से भी कोयले का उत्पादन कम हुआ है। मानसून से पहले कोयले का पर्याप्त स्टाक भी नहीं किया गया।
वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश से आने वाले कोयले की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय वृद्धि ने भी मुश्किलें बढ़ाई हैं। भारत में अमेरिका और इंडोनेशिया से कोयला आता है।
कोयला मंत्री बोले, तीन-चार दिनों में सुधर जाएंगे हालात
वहीं केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कोयले के दाम बढ़ने से इसकी कमी हुई है और कम बिजली पैदा हो रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले तीन-चार दिनों में स्थिति ठीक हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस साल भारी बारिश होने से भी स्थिति बिगड़ी है और कोयले की कमी हुई है। जोशी ने कहा कि अगर आप पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े देखें तो सितंबर और अक्तूबर में कोयला उत्पादन और इससे भेजने का काम सबसे अधिक हुआ है। अगले तीन-चार दिनों में स्थिति सुधर जाएगी।
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मंत्रालय ने साफ कहा कि कोल इंडिया का बकाया नहीं चुकाने वाली कंपनियों को कोयला देने में प्राथमिकता में सबसे नीचे रखा जाए। वहीं समय पर भुगतान करने वाले राज्यों और कोल कंपनियों को प्राथमिकता दी जाए। उधर, कोल इंडिया ने भी प्रभावित राज्यों की आपूर्ति बढ़ाने पर एक्शन प्लान तैयार किया है। ऊर्जा मंत्रालय ने सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी को सलाह दी है कि 2021-22 में कोयले की खपत 700 मीट्रिक टन पंहुचने की संभावना है, लिहाजा कोयले का पर्याप्त भंडारण करें। जो प्लांट कोयले का स्टाक नहीं रख रहे हैं उन पर जुर्माना भी लगाया जाए।
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ट्रेनों के चक्के थमने का भी संकट
देश में कोयला आधारित 99 बिजली संयंत्रों में बिजली उत्पादन के लिए करीब तीन दिन का ही कोयला शेष बचा है। ऐसे में रेलवे को बिजली सप्लाई रुकने से रेल सेवाओं के प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ गया है। दरअसल देश में लॉकडाउन के दौरान औद्योगिक मांग में तेजी से कमी आने पर कोल इंडिया ने अपना उत्पादन घटा दिया था। हालांकि कोल इंडिया लगातार उन राज्यों पर दबाव बना रही जिन पर करोड़ों बकाया है।
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संकट की ये भी वजह
लॉकडाउन खुलने और अर्थव्यवस्था में सुधार होते ही देश में सभी क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ा है। जिससे बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है।
सितंबर में अधिक बारिश होने से खदानों में पानी भरने से भी कोयले का उत्पादन कम हुआ है। मानसून से पहले कोयले का पर्याप्त स्टाक भी नहीं किया गया।
वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश से आने वाले कोयले की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय वृद्धि ने भी मुश्किलें बढ़ाई हैं। भारत में अमेरिका और इंडोनेशिया से कोयला आता है।
कोयला मंत्री बोले, तीन-चार दिनों में सुधर जाएंगे हालात
वहीं केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कोयले के दाम बढ़ने से इसकी कमी हुई है और कम बिजली पैदा हो रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले तीन-चार दिनों में स्थिति ठीक हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस साल भारी बारिश होने से भी स्थिति बिगड़ी है और कोयले की कमी हुई है। जोशी ने कहा कि अगर आप पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े देखें तो सितंबर और अक्तूबर में कोयला उत्पादन और इससे भेजने का काम सबसे अधिक हुआ है। अगले तीन-चार दिनों में स्थिति सुधर जाएगी।