सितंबर महीने में बेरोजगारी दर में कुछ सुधार, लेकिन हरियाणा में हर तीसरा आदमी हुआ 'बेकार'
- दिल्ली में 13.8 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 5.6, हिमाचल प्रदेश में 15.8 फीसदी रह गई बेरोजगारी
- हरियाणा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, झाऱखंड, राजस्थान में बेरोजगारी बढ़ी
- कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बेरोजगारों को 5000 रुपये प्रति माह का भत्ता देने की आवाज उठाई
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विस्तार
लॉकडाउन खुलने के बाद कारोबारी गतिविधियां शुरू होने से राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक अभी भी यह 7.8 फीसदी पर बना हुआ है। अप्रैल में राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर 23.5 फीसदी और मई माह में 21.7 फीसदी दर्ज की गई थी। दिल्ली में बेरोजगारी दर में सुधार आया है, लेकिन हरियाणा में स्थिति और अधिक खराब हुई है, जहां का हर तीसरा आदमी इस समय बेरोजगार (33.5 फीसदी) है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, यूपी, राजस्थान, झारखंड और केरल जैसे राज्यों में बेरोजगारी दर में जुलाई की तुलना में अगस्त महीने में बढ़ोतरी हुई है, जबकि इसी दौरान दिल्ली, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश में बेरोजगारी दर में सुधार आया है।
इसी बीच कांग्रस नेता राहुल गांधी ने बेरोजगारी को लेकर अपनी मुहिम तेज कर दी है। उन्होंने गुरुवार को बेरोजगारों की आवाज को तेज करते हुए ‘10 सितंबर को 10 बजे 10 घंटे' की मुहिम शुरू की। 'स्पीक अप फॉर जॉब्स' (#SpeakUpForJobs) को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि सभी बेरोजगार युवाओं को प्रति माह पांच हजार रुपये की आर्थिक मदद करनी चाहिए।
राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी
लॉकडाउन खुलने के बाद से राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी के आंकड़ों में लगातार सुधार हो रहा है। अप्रैल में राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर 23.5 फीसदी और मई माह में 21.7 फीसदी दर्ज की गई थी। जून में लॉकडाउन खुलते ही कामकाज शुरू हुआ और बेरोजगारी का यह आंकड़ा 10.2 फीसदी पर आ गया। जुलाई में राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर 7.4 फीसदी तक आ गई। अगस्त में इसमें एक बार फिर बढ़ोतरी हुई और बेरोजगारी दर 8.3 फीसदी तक पहुंच गई, लेकिन सितंबर माह में इसमें एक बार फिर सुधार आता दिख रहा है।
इन राज्यों में हुआ अच्छा सुधार
सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक बेरोजगारी के मामले में कुछ राज्यों में अच्छा सुधार हुआ है। राजधानी दिल्ली में जुलाई महीने में 20.3 फीसदी लोग बेरोजगार थे, जबकि अगस्त महीने में 13.8 फीसदी लोग ही बेरोजगार रह गए हैं। छत्तीसगढ़ में जुलाई महीने में बेरोजगारी दर 10.3 फीसदी थी, जो अगस्त माह में घटकर 5.6 फीसदी रह गई। इसी प्रकार हिमाचल प्रदेश में जुलाई की बेरोजगारी दर 24.3 फीसदी की तुलना में अगस्त माह में यह 15.8 फीसदी और पुडुचेरी मेें 15.5 फीसदी से 5 फीसदी रह गई है।
यहां बिगड़ रहे हैं हालात
कुछ राज्यों के साथ-साथ पूरे राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर में सुधार आया है, लेकिन इसी दौरान कई राज्यों में बेरोजगारी दर बेकाबू भी होती दिख रही है। बेरोजगारी की सबसे खराब स्थिति हरियाणा में देखी गई है, जहां इस समय हर तीसरा व्यक्ति (33.5 फीसदी) बेरोजगार है, जबकि जुलाई महीने में यहां 24.2 फीसदी लोग बेरोजगार थे। महाराष्ट्र में बेरोजगारी दर 3.9 फीसदी से बढ़कर 6.2 फीसदी हो गई है।
उत्तर प्रदेश में जुलाई माह में बेरोजगारी दर 5.6 फीसदी थी, जो अगस्त माह में बढ़कर 5.8 फीसदी हो गई। झाऱखंड में जुलाई में बेरोजगारी दर 7.6 फीसदी थी जो अगस्त माह में बढ़कर 9.8 फीसदी हो गई है। केरल में इसी दौरान बेरोजगारी दर 7.1 फीसदी से बढ़कर 11 फीसदी हो गई है। राजस्थान में बेरोजगारी दर 15.8 फीसदी से बढ़कर 17.5 फीसदी, सिक्किम में 4.5 फीसदी से बढ़कर12.5 फीसदी और त्रिपुरा में 18.2 फीसदी से बढ़कर 27.9 फीसदी हो गई है। इसी प्रकार उत्तराखंड में बेरोजगारी दर 12.4 से बढ़कर 14.3 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 6.8 फीसदी से बढ़कर 14.9 फीसदी हो गई है।
सुधर रही स्वरोजगार की स्थिति
भाजपा प्रवक्ता कृष्ण गोपाल अग्रवाल का कहना है कि देश में नौकरीपेशा लोगों की संंख्या में कमी हो रही है, जबकि स्वरोजगार करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। यह दर्शाता है कि स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रमों के जरिए स्वरोजगार देने की केंद्र सरकार की मुहिम कारगर हो रही है। कोरोना काल में सबसे ज्यादा परेशानी रेहड़ी-पटरी पर रोजगार करने वाले गरीबों को हुई थी, लेकिन केंद्र सरकार की पीएम स्वनिधि योजना से ऐसे लोगों को 10 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक मदद मिल रही है। इन योजनाओं से रोजगार की स्थिति बेहतर हो रही है। कृष्ण गोपाल अग्रवाल ने कहा कि देश की भारी युवा आबादी को स्वरोजगार से ही काम दिया जा सकता है। केंद्र सरकार इसी दिशा में प्रयास कर रही है। ताजा आंकड़े दिखाते हैं कि केंद्र के प्रयास सफल हो रहे हैं।