Assam: सीएम सरमा ने की 14 घंटे बैठक, असम के 'शिवाजी' लचित बोरफुकन की 400 वीं जयंती था एजेंडा
बुधवार को हुई इस बैठक में असम के 'शिवाजी' कह जाने वाले वीर लचित बोरफुकन की 400 वीं जयंती कार्यक्रमों की तैयारी पर मंथन हुआ। इसके अलावा असम में मादक पदार्थों और पशु तस्करी के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान छेड़ने पर भी चर्चा हुई।
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असम के सीएम हिमंत सरमा गुवाहाटी में सरकारी अधिकारियों की 14 घंटे लंबी बैठक लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। इस बैठक में राज्य के सभी जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मौजूद थे।
सीएम सरमा की यह बैठक मीडिया में चर्चित हो रही है। बुधवार को हुई इस बैठक में असम के 'शिवाजी' कह जाने वाले वीर लचित बोरफुकन की 400 वीं जयंती कार्यक्रमों की तैयारी पर मंथन हुआ। इसके अलावा असम में मादक पदार्थों और पशु तस्करी के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान छेड़ने पर भी चर्चा हुई।
#WATCH | Assam CM Himanta Biswa Sarma chaired a 14-hour-long meeting of SPs & District Magistrates, yesterday. Agenda was Lachit Borphukan's 400th birth anniversary, a district-wise fight against drugs & illegal cattle smuggling amongst others. pic.twitter.com/QvWsYwuxWq
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) November 3, 2022
अहोम साम्राज्य के सेनापति थे बोरफुकन
वीर लचित बोरफुकन अहोम साम्राज्य के सेनापति थे। 24 नवंबर को उनकी 400वीं जयंती पर असम सरकार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और राज्य में बड़े स्तर पर समारोह आयोजित करेगी। बोरफुकन ने मुगल सेना को कई बार असम में प्रवेश से सफलतापूर्वक रोका था।
दिल्ली में दो दिनी कार्यक्रम
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बुधवार को कहा था कि नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 23 नवंबर से दो दिवसीय समारोह होगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा कि इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियां और एक प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी और प्रधानमंत्री मोदी 24 नवंबर को बोरफुकन पर एक पुस्तक राष्ट्र को समर्पित करेंगे। शाह लाचित पर एक वृत्तचित्र की स्क्रीनिंग का उद्घाटन करेंगे। अनेक क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टेलीविजन चैनलों पर बाद में फिल्म दिखाई जाएगी।
सराईघाट युद्ध में मुगलों को धूल चटाई थी
लचित बोरफुकन का जन्म 24 नवंबर, 1622 को हुआ था। 1671 में उन्होंने सराईघाट युद्ध (Battle of Saraighat) में अपनी सेना का प्रभावी नेतृत्व किया। इस कारण असम पर कब्जे की मुगल सेना की योजना विफल हो गई थी। असम के शिवाजी उन्हें इसलिए कहा जाता है, क्योंकि जिस तरह महाराष्ट्र में मराठा सम्राट ने मुगलों से लोहा लिया, उसी तरह ललित बोरफुकन में उन्हें धूल चटाई थी।
सराईघाट का युद्ध वर्ष 1671 में गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर लड़ा गया था। यह आजादी के पूर्व देश की सबसे बड़ी नौसैनिक लड़ाई के रूप में जाना जाता है। इसमें मुगल सेना की हार और अहोम सेना की जीत हुई थी।