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प्रदर्शनकारियों को किसने बनाया मोहरा?: CCTV-वीडियो खोलेंगे राज, 'सफेदपोश' टोली के वॉट्सएप मैसेज पर नजर
Mon, 20 Jul 2026 09:42 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 20 Jul 2026 09:42 PM IST
सार
20 जून से चल रहे आंदोलन को धार देने के लिए कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सोमवार को संसद मार्च की कोशिश की। दिल्ली की सड़कों पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे। कई जगह सुरक्षाबलों के साथ धक्का-मुक्की और टकराव भी हुआ। आंसू गैस के गोले दागे गए।
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सीजेपी का विरोध प्रदर्शन।
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से खदेड़ दिया है। कई दर्जन लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आ रही है, हालांकि दिल्ली पुलिस ने अभी इस बाबत कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है। प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में पचास से ज्यादा पुलिस कर्मी व केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान घायल हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ सीजेपी ने भी दावा किया है कि अनेक कार्यकर्ताओं को पुलिस के बल प्रयोग के दौरान गंभीर चोटें लगी हैं। प्रदर्शनकारियों को किसने बनाया 'मोहरा', सीसीटीवी-मोबाइल वीडियो और वॉट्सएप मैसेज खोलेगा 'सफेदपोश' टोली का राज, दिल्ली पुलिस अब इसकी तह तक जाने में जुट गई है।
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प्रदर्शनकारियों को किसने उकसाया?
दिल्ली पुलिस के एक शीर्ष अफसर बताते हैं, इसमें कोई शक नहीं कि प्रदर्शनकारियों को एक साजिश के तहत उकसाया गया है। ऐसे लोगों की पहचान का काम शुरू कर दिया गया है। नई दिल्ली क्षेत्र में लगे सीसीटीवी और मेट्रो स्टेशनों व ट्रेन में लगे कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। दिल्ली पुलिस को यह जानकारी मिली है कि प्रदर्शनकारियों को एक जगह से दूसरी जगह पर जाने के लिए उकसाया जा रहा था। उन्हें मैसेज भेजे जा रहे थे। केवल सीसीटीवी ही नहीं, ऐसे मोबाइल वीडियो जो पुलिस एवं दूसरी एजेंसियों ने बनाए हैं, उन्हें भी चेक किया जा रहा है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो भी दिल्ली पुलिस देखेगी।
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पुलिस को पत्थरों से भरा एक ट्रक खड़ा मिला
प्रदर्शनकारियों के पास कुछ 'सफेदपोश' लोगों के मोबाइल फोन से वॉट्सऐप मैसेज आना, ये भी पुलिस जांच का विषय रहेगा। इस बाबत कॉल डिटेल भी जांची जाएगी। सूत्रों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ जिस तरीके से आगे बढ़ रही थी, वह बिना किसी के उकसावे या साजिश के संभव नहीं था। पुलिस को यह अंदाजा भी नहीं था कि वाकई प्रदर्शनकारी, संसद भवन तक पहुंच जाएंगे। जिस तरह से पत्थराव हुआ, वह भी पुलिस के लिए अप्रत्याशित था। संसद भवन या लुटियन दिल्ली में आसानी से ईंट पत्थर उपलब्ध नहीं होते। जंतर-मंतर के पास भी पुलिस को पत्थरों से भरा एक ट्रक खड़ा मिला था।
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मेट्रो में हुड़दंग और चारों तरफ से प्रदर्शनकारियों का निकलना, दिल्ली पुलिस इसे सामान्य घटना नहीं मान रही। फिलहाल पुलिस के रडार पर कई सफेदपोश हैं, जो जंतर-मंतर पर जाते रहे हैं। इसके अलावा वही लोग, संसद मार्च और प्रदर्शन में भी शामिल रहे हैं। दिल्ली पुलिस, ऐसे लोगों की कॉल डिटेल के जरिए यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि प्रदर्शनकारियों को कहां से निर्देश प्राप्त हो रहे थे।
मेट्रो के जरिए छोटे छोटे समूह बनाकर प्रदर्शनकारी पहुंचे
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, कई राजनीतिक दलों के नेताओं पर पुलिस की नजर है। ऐसे माना जा रहा है कि कई नेताओं ने अपने कुछ खास कार्यकर्ताओं के जरिए प्रदर्शनकारियों तक संदेश भिजवाए और उनके मार्च को अपने तरीके से मैनेज किया। यह प्रदर्शन एक असंगठित पैटर्न पर होते हुए भी पुलिस को किस तरह से बड़ी सिरदर्दी दे गया, इस बात की जांच हो रही है। मेट्रो के जरिए छोटे छोटे समूह बनाकर प्रदर्शनकारी, जंतर मंतर तक पहुंचे। उसके बाद जब वे संसद भवन के बाहर तक पहुंच गए तो उसके बाद भी शांति से प्रदर्शन समाप्त नहीं हुआ। बाद में भी कई जगह पुलिस ने बल प्रयोग किया। संसद भवन तक जाने के बाद भी प्रदर्शनकारियों का उग्र होना, पुलिस इसे एक बड़ी सुनियोजित योजना का हिस्सा मान रही है।