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CJI सूर्यकांत बोले- जज परफेक्ट नहीं होते, खुद को अपूर्ण न मानना न्यायिक नेतृत्व के लिए ज्यादा खतरनाक

Sat, 14 Feb 2026 03:49 PM IST
नवीन पारमुवाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवीन पारमुवाल Updated Sat, 14 Feb 2026 03:49 PM IST
सार

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा है कि जजों में भी कमियां होती हैं। उन्होंने कहा कि जब जज यह दिखावा करते हैं कि वे परफेक्ट हैं, तो इससे न्यायपालिका के नेतृत्व को नुकसान पहुंचता है।

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cji surya kant says judges are not perfect pretending to be flawless harms judicial leadership
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत - फोटो : ANI

विस्तार

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को न्यायपालिका के पारंपरिक ढांचे और सोच को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ जूडिशियल एजुकेटर्स की 11वीं द्विवार्षिक बैठक के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जज परफेक्ट या सर्वगुण संपन्न नहीं होते और इस बात को स्वीकार करना ही न्यायिक नेतृत्व की असली ताकत है।
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गलती मानना कमजोरी नहीं, पेशेवर सुरक्षा है: CJI

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायिक नेतृत्व को तब नुकसान नहीं पहुंचता जब जज अपनी कमियों को स्वीकार करते हैं, बल्कि नुकसान तब होता है जब जज यह दिखावा करते हैं कि वे कभी गलत नहीं हो सकते। उन्होंने आगे कहा, "इतिहास गवाह है कि सबसे सम्मानित न्यायिक नेता वे नहीं थे जिन्होंने खुद को दोषरहित दिखाया, बल्कि वे थे जो अपनी ज्ञान की सीमाओं को जानते थे और सुधार के लिए तैयार रहते थे।"

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CJI ने विनम्रता को एक व्यक्तिगत गुण के साथ-साथ एक पेशेवर सुरक्षा कवच बताया और जोर दिया कि इसे हर न्यायिक अधिकारी को सिखाया जाना अनिवार्य है।

 

तैयार उत्पाद नहीं हैं जज

कार्यक्रम की थीम जुडिशियल लीडरशिप के लिए शिक्षा पर बात करते हुए CJI ने पुरानी धारणाओं पर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि नियुक्ति के बाद एक जज पूरी तरह से फिनिश्ड प्रोडक्ट (तैयार उत्पाद) बन जाता है, जिसे अब कुछ और सीखने की जरूरत नहीं।

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CJI ने कहा की यह विचार भले ही संस्था की तारीफ करता हो, लेकिन यह सेवा नहीं करता। हमें इस ईमानदार सच्चाई को स्वीकार करना होगा कि जज भी इंसानों की तरह लगातार सीखने, सुधार करने और खुद को बदलने की क्षमता रखते हैं।

 

कॉमनवेल्थ अपेक्स बॉडी' बनाने का आह्वान

न्यायिक व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव का सुझाव देते हुए चीफ जस्टिस ने एक कॉमनवेल्थ अपेक्स बॉडी बनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि यह संस्था सदस्य देशों के बीच न्यायिक शिक्षा, बार (वकीलों) और बेंच (जजों) के बीच तालमेल बिठाने का काम करेगी।

 

बदलते दौर में कानून की नई व्याख्या

CJI सूर्यकांत ने कानून को एक जीवंत इकाई बताया जो समय के साथ विकसित होता है। उन्होंने कहा कि जजों की असली परीक्षा तब होती है जब समाज बदलता है और नई चुनौतियां सामने आती हैं। ऐसे में जजों को केवल पुराने फैसलों का मास्टर ही नहीं होना चाहिए, बल्कि उनमें कानून की ऐसी व्याख्या करने की फुर्ती भी होनी चाहिए जो वर्तमान समय में न्याय सुनिश्चित कर सके।

 

उन्होंने कॉमनवेल्थ जूडिशियल एजुकेशन इंस्टीट्यूट की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान जजों को केवल कानून का अनुवादक नहीं, बल्कि न्याय का एक बुद्धिमान संरक्षक बनाने में मदद कर रहा है।

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