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Justice BR Gavai: जस्टिस बीआर गवई होंगे अगले मुख्य न्यायाधीश, 13 मई को रिटायर हो रहे CJI खन्ना ने की सिफारिश
Wed, 16 Apr 2025 03:44 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 16 Apr 2025 03:44 PM IST
सार
जस्टिस गवई का कार्यकाल हालांकि छह महीने का ही होगा क्योंकि वे नवंबर 2025 में रिटायर हो रहे हैं। जस्टिस गवई को 24 मई 2019 में सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया था।
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Justice B R Gavai
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के लिए न्यायमूर्ति भूषण आर गवई के नाम की सिफारिश की गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह सिफारिश विधि मंत्रालय को भेज दी है। प्रस्ताव वर्तमान मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की ओर से भेजा गया है। वे 13 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। परंपरा के अनुसार, वर्तमान सीजेआई अपने उत्तराधिकारी के रूप में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश की सिफारिश करते हैं।
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देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश होंगे जस्टिस गवई
जस्टिस गवई वरिष्ठता के क्रम में सबसे आगे हैं, जिसके चलते उनके नाम की सिफारिश की गई है। गौरतलब है कि इससे पहले कानून मंत्रालय ने सीजेआई जस्टिस खन्ना से उनके उत्तराधिकारी का नाम देने की आधिकारिक अपील की थी। जस्टिस गवई के नाम पर अगर मुहर लगती है तो वे देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश होंगे। वे 14 मई को सीजेआई पद की शपथ ले सकते हैं। जस्टिस गवई का कार्यकाल हालांकि छह महीने का ही होगा क्योंकि वे नवंबर 2025 में रिटायर हो रहे हैं। जस्टिस गवई को 24 मई 2019 में सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया था।
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पिता रहे हैं बिहार और केरल के पूर्व राज्यपाल
जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। जस्टिस गवई के पिता दिवंगत आरएस गवई भी एक मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता और बिहार और केरल के पूर्व राज्यपाल रहे। जस्टिस गवई ने अपने वकालत करियर की शुरुआत साल 2003 में बॉम्बे उच्च न्यायालय में बतौर एडिश्नल जज की थी। इसके बाद साल 2005 में वे स्थायी जज नियुक्त हुए। जस्टिस गवई ने 15 वर्षों तक मुंबई, नागपुर, औरंगाबाद और पणजी की पीठ में अपनी सेवाएं दीं।जस्टिस गवई के नाम पर अगर मुहर लगती है तो वे देश के दूसरे अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले मुख्य न्यायाधीश होंगे। उनसे पहले जस्टिस केजी बालाकृष्णन साल 2010 में यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। जस्टिस बीआर गवई साल 2016 में नोटबंदी को लेकर दिए गए फैसले का हिस्सा रहे। जिसमें कहा गया था कि सरकार को करेंसी को अवैध घोषित करने का अधिकार है। इसके अलावा जस्टिस गवई बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ दिए आदेश का भी हिस्सा रहे और इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर फैसला देने वाली पीठ का भी हिस्सा रहे।
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