पहली बार हाईकोर्ट के मौजूदा जज पर दर्ज होगी एफआईआर, सीजेआई की मंजूरी
- न्यायमूर्ति शुक्ला ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करके कथित तौर पर एक निजी मेडिकल कॉलेज का पक्ष लेते हुए 2017-18 में छात्रों के दाखिले की डेडलाइन को बढ़ा दिया।
- न्यायमूर्ति शुक्ला को इन हाउस कमिटी ने गंभीर अनियमितताओं का दोषी पाया और उनसे जनवरी 2018 में सभी न्यायिक कार्य वापस ले लिए गए।
- सीजेआई रंजन गोगोई ने न्यायायिक कार्यों के आवंटन की अर्जी को खारिज करते हुए प्रधानमंत्री मोदी से संसद में उन्हें हटाने के लिए प्रस्ताव लाने को कहा।
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विस्तार
उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने मंगलवार को एक अप्रत्याशित फैसला दिया। उन्होंने सीबीआई को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एन शुक्ला के खिलाफ एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए कथित तौर पर प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों का पक्ष लेने के आरोप में भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत मामला दर्ज करने की मंजूरी दे दी है।
An in-house panel constituted by Former Chief Justice of India Dipak Misra had found Justice SN Shukla guilty of giving favors to a private medical college by extending deadline for MBBS admission of students. https://t.co/YJL9YFUNRm
— ANI (@ANI) July 31, 2019विज्ञापन
इससे तीस साल पहले शीर्ष अदालत ने 25 जुलाई, 1991 को किसी भी जांच एजेंसी को उच्चतम या उच्च न्यायालय के किसी भी न्यायमूर्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से रोक दिया था और कहा गया था कि एजेंसी को मुख्य न्यायाधीश को मामले से जुड़े सबूत दिखाए बिना किसी सिटिंग जज के खिलाफ एफआईआर करने की मंजूरी नहीं दी जाएगी। 1991 से पहले किसी भी जांच एजेंसी ने उच्च न्यायालय के सिटिंग जज के खिलाफ जांच नहीं की है।
यह पहली बार है जब मुख्य न्यायाधीश ने सिटिंग जज के खिलाफ जांच एजेंसी को एफआईआर दर्ज करने की इजाजत दी है। सीबीआई जल्द ही न्यायमूर्ति शुक्ला के खिलाफ मामला दर्ज करेगी। माना जा रहा है कि भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के तहत उनकी गिरफ्तारी हो सकती है। जांच एजेंसी ने मुख्य न्यायाधीश गोगोई को पत्र लिखकर उनसे मामले की जांच करने की इजाजत मांगी थी।
सीबीआई के निदेशक ने सीजेआई को लिखे पत्र में कहा, 'उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद, लखनऊ पीठ, उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति नारायण शुक्ला और अन्य के खिलाफ सीबीआई ने तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा की सलाह पर तब प्रारंभिक जांच दर्ज की थी जब न्यायमूर्ति शुक्ला के कथित कदाचार के मामले को उनके संज्ञान में लाया गया था।' पिछले महीने सीजेआई रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर न्यायमूर्ति शुक्ला को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने के लिए कहा था।
19 महीने पहले तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा ने भी यही सिफारिश की थी। एक आतंरिक समिति ने न्यायमूर्ति शुक्ला को गंभीर न्यायिक कदाचार का दोषी पाया था। प्रधानमंत्री को पत्र लिखने से पहले सीजेआई गोगोई ने न्यायमूर्ति शुक्ला के उस आग्रह को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने न्यायिक कार्य फिर से आवंटित करने की मांग की थी। आतंरिक समिति के उन्हें दोषी पाने के बाद 22 जनवरी, 2018 को उनसे सभी न्यायिक कार्य वापस ले लिए थे।