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सीजेआई चंद्रचूड़ की सीख; कठिन है कानूनी पेशा, जूनियर को ज्यादा वेतन दें वकील

Sun, 27 Oct 2024 07:26 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 27 Oct 2024 07:26 AM IST
सार

सीजेआई चंद्रचूड़ की सीख; सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने वकीलों को एक सीख देते हुए कहा कि वकीलों को अपने चैंबर में सीखने आने वाले युवाओं को उचित वेतन और पारिश्रमिक देना सीखना चाहिए।

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CJI Chandrachud's teaching; Legal profession is difficult, lawyers should pay higher salary to juniors
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ - फोटो : ANI

विस्तार

सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने वकीलों को एक सीख देते हुए कहा कि वकीलों को अपने चैंबर में सीखने आने वाले युवाओं को उचित वेतन और पारिश्रमिक देना सीखना चाहिए। कानूनी पेशा कठिन पेशा है, जहां शुरुआती वर्षों में रखी गई नींव युवा वकीलों को उनके पूरे कॅरिअर में अच्छी स्थिति में रखती है।
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एक साक्षात्कार में सीजेआई ने कहा, पेशे में हमेशा उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। शुरुआत में कानूनी पेशे में अपने पहले महीने के अंत में आप जो राशि कमाते हैं, वह बहुत अधिक नहीं हो सकती है। इसलिए पहली बार आने वालों को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है कि वे दृढ़ रहें, कड़ी मेहनत करें और जो वे करते हैं, उसमें ईमानदारी बरतें।
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सीजेआई ने कहा, इसी तरह हमारे ढांचे में भी बदलाव होना चाहिए। वकीलों को यह सीखना चाहिए कि उनके चैंबर में आने वाले युवा वकीलों को उचित वेतन, वेतन और पारिश्रमिक कैसे दिया जाए। युवा लोग उनके पास सीखने के लिए आते हैं। उनके पास साझा करने के लिए भी बहुत कुछ है। इसलिए यह आत्मसात करने व मार्गदर्शन देने की दो-तरफा प्रक्रिया है, जिसे हमें युवा वकीलों को प्रदान करना है। एजेंसी
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आकाशवाणी से माता-पिता के साथ हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत सीखी
सीजेआई ने दिल्ली में अपने कॉलेज के दिनों के दौरान ऑल इंडिया रेडियो में प्रस्तोता के रूप में काम वाले दिनों को भी याद किया। सीजेआई ने कहा कि उनकी शास्त्रीय संगीतकार मां अक्सर उन्हें तीसरी या चौथी कक्षा में पढ़ते समय मुंबई में एआईआर स्टूडियो में ले जाती थीं। बाद में, 1975 में दिल्ली जाने के बाद, उन्होंने आकाशवाणी के लिए ऑडिशन दिया और हिंदी व अंग्रेजी में कार्यक्रमों की मेजबानी करना शुरू कर दिया।  सीजेआई यह भी याद किया कि कैसे वह अपने माता-पिता के साथ हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत में आकाशवाणी बुलेटिन सुनते हुए बड़े हुए और देवकी नंदन पांडे, पामेला सिंह और लोतिका रत्नम की प्रतिष्ठित आवाजों से मंत्रमुग्ध हो गए।


जीएसटी सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण
सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि भारत में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की शुरुआत सहकारी संघवाद का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मराठी अखबार के वार्षिक व्याख्यान में संघवाद और इसकी संभावनाओं को समझना विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में अदालतों ने संघवाद पर एक मजबूत ढांचा विकसित किया है, ताकि राज्यों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। सीजेआई ने कहा कि भारतीयों के लिए संघवाद एक एकात्मक अवधारणा नहीं है, बल्कि इसके कई पहलू हैं। 
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