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Supreme Court: सुनवाई के दौरान पूर्व सीजेआई के बेटे पर भड़क उठे CJI चंद्रचूड़, कहा- आप ऐसा कैसे कर सकते हैं

Mon, 06 May 2024 09:47 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Mon, 06 May 2024 09:47 PM IST
सार

सेना में कार्यरत 30 से अधिक कर्नल रैंक की महिला अफसरों ने याचिका दाखिल की थी। उन्होंने लिंग के आधार पर पदोन्नति में भेदभाव का आरोप लगाया था। याचिका में अफसरों ने कहा था कि सेना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर रही है।

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CJI Chandrachud angry at former CJI son during the hearing supreme court
सीजेआई - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारतीय थल सेना में पदोन्नति में महिलाओं के साथ भेदभाव के आरोपों से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे। सुनवाई में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमाणी केंद्र की ओर से पेश हुए थे तो वहीं, याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी पैरवी कर रहे थे। खास बात यह है कि अहमदी पूर्व मुख्य न्यायाधीश एएम अहमदी के बेटे हैं।   

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30 से अधिक महिला अधिकारियों ने दायर की थी याचिका
मामले में सेना में कार्यरत 30 से अधिक कर्नल रैंक की महिला अफसरों ने याचिका दाखिल की थी। उन्होंने लिंग के आधार पर पदोन्नति में भेदभाव का आरोप लगाया था। याचिका में अफसरों ने कहा था कि सेना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर रही है। बता दें, थल सेना में नई पदोन्नति नीति सरकार ने मार्च के आखिरी हफ्ते में ही लागू की थी। आज उसी भेदभाव और अवमानना से जुड़े मामले पर सुनवाई हो रही थी।

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पूर्व सीजेआई के बेटे पर भड़के सीजेआई
सुनवाई के दौरान, अटॉर्नी जनरल ने पीठ को बताया कि अगर सेना में कार्यरत अधिकारियों की आपस में तुलना नहीं की जाएगी तो उनकी असल योग्यताओं सामने कैसे आएगी और बिना योग्यता सामने आए उन्हें पदोन्नति नहीं दी जा सकती। इस पर सीजेआई ने अहमदी से कहा- आपको पदोन्नति के लिए उपलब्ध लोगों के बीच ही चुनाव करना होगा। हम इस पर कुछ नहीं कह सकते। इस पर अहमदी ने कहा कि अगर उनके पास एक विशेष चयन बोर्ड है तो आपके पास बिना पैनल के लोग भी हैं। अहमदी की इसी टिप्पणी पर सीजेआई भड़क गए और उन्होंने कहा कि आप ऐसा कैसे कर सकते हैं। यह कर्नल का कोई टाइम स्केल है क्या? बिना किसी बेंचमार्क के यह कैसे तय हो सकता है। 

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कोर्ट ने सुना दिया आदेश
इसके बाद, कोर्ट ने आदेश सुनाते हुए कहा कि हम सेना की कार्रवाई से संतुष्ट हैं। सैन्य कार्रवाई से अदालत के आदेशों का कोई उल्लंघन नहीं होता। इसमें अवमानना का कोई केस ही नहीं है। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को यह सहूलियत दी कि वह विषय पर कानून के तहत अन्य उपायों पर विचार कर सकते हैं और उनका लाभ उठा सकते हैं।

थल सेना में अधिकारियों की रैंक ऐसी है…

  1. फील्ड मार्शल (अब तक केवल दो ही अधिकारियों को इस रैंक से सम्मानित किया गया है)
  2. जनरल (सेना प्रमख)
  3. लेफ्टिनेंट जनरल
  4. मेजर जनरल
  5. ब्रिगेडियर
  6. कर्नल
  7. लेफ्टिनेंट कर्नल
  8. मेजर
  9. कैप्टन
  10. लेफ्टिनेंट

(सर्वोच्च रैंक से निम्न रैंक के क्रमानुसार)

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