पहल: बच्चों के बचपन की सुरक्षा के लिए साथ आए सामाजिक संगठन, बाल सुरक्षा मंच का किया गठन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 13 Dec 2021 07:23 PM IST

सार

इस फोरम की शुरुआत बच्चों से संबंधित साझा संकल्प, सपनों और विचारों को पूरा करने के लिए किया गया है। इसका उद्देश्य बाल शोषण और बाल दासता को खत्म करना होगा।
फोरम के उद्धाटन के अवसर पर संबोधित करते कैलाश सत्यार्थी
फोरम के उद्धाटन के अवसर पर संबोधित करते कैलाश सत्यार्थी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में जुटे देशभर के सिविल सोसायटी संगठनों ने कोरोना काल में बच्चों की बढ़ती तस्करी और यौन शोषण पर चिंता जाहिर की और बच्चों के बचपन को सुरक्षित बनाने के लिए एक अनूठी पहल करते हुए इंडिया फॉर चाइल्ड प्रोटेक्शन फोरम (आईसीपीएफ) का गठन किया है। यह फोरम भारत में बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने और बाल अधिकारों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए काम करेगा। इसका का उद्घाटन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने किया। पूर्व आईपीएस अधिकारी आमोद कंठ को राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया है।
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कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन ने बच्चों की तस्करी और यौन शोषण पर रोक के लिए दिल्ली के कांस्टिट्यूशन क्लब में चार दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया। इसमें बच्चों के मुद्दों पर प्रभावी हस्तक्षेप करने वाले प्रयास, शक्ति वाहिनी, बचपन बचाओ आंदोलन और प्रज्जवला जैसे देशभर के 70 से ज्यादा सामाजिक संगठनों ने हिस्सा लिया। परिसंवाद में विचार-मंथन के बाद फैसला लिया गया कि कोरोना वायरस महामारी के बाद हालात जिस तेजी से बदले हैं, सारे संस्थानों को अपने मतभेदों को भुलाकर बच्चों का जीवन संवारने के साझा सपनों की लड़ाई लड़नी होगी।


बड़े संकल्प की शुरुआत है यह फोरम: सत्यार्थी
इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फोरम (भारत बाल सुरक्षा मंच) एक राष्ट्रीय गठबंधन है जिसमें बच्चों के मुद्दों पर काम करने वाले समान विचारधारा वाले सामाजिक संगठन शामिल हैं। कैलाश सत्यार्थी ने इसे लेकर रहा कि यह मंच एक बड़े संकल्प की शुरुआत है। इसका गठन साझा संकल्प, सपनों और विचारों को पूरा करने के उद्देश्य से किया गया है। यह विभिन्न सामाजिक संगठनों का एक ऐसा गठबंधन है जो बाल शोषण और बाल दासता को खत्म करने का काम करेगा। यह फोरम बच्चों के प्रति सामाजिक सोच और नीतियों को बदलेगा और सामाजिक चेतना का भी विस्तार करेगा। 

पारिवारिक सुरक्षा से वंचित हैं तीन करोड़ बच्चे
फोरम के कार्यों और उद्देश्यों को लेकर आमोद कंठ ने कहा कि इसके तहत उन बच्चों को सुरक्षा प्रदान करने का काम होगा जो पारिवारिक सुरक्षा से वंचित हैं। ऐसे बच्चों की संख्या देश में तीन करोड़ से अधिक है। सामाजिक और आर्थिक विषमताओं के कारण जो बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं हम उनको स्कूलों में दाखिला दिलाने का प्रयास करेंगे। बच्चों के अधिकारों की पूर्ति, उनकी जरूरतों को पूरा करना ही उनके प्रति न्याय है। इस न्याय को लेकर हम सभी बच्चों तक पहुंचेंगे। यह बच्चों को एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए एक बड़े एक्शन प्लान की शुरुआत है। 

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