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सिविल सेवा परीक्षा: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-अंतिम प्रयास करने वालों को मौका नहीं देने का फैसला किस स्तर पर लिया
Fri, 29 Jan 2021 12:40 AM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Fri, 29 Jan 2021 12:40 AM IST
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Supreme Court on UPSC Civil Service Exam
- फोटो : अमर उजाला
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यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा-2020 मामले में केंद्र सरकार के हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को नाराजगी जताई। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि हलफनामे में यह नहीं बताया गया है कि कोविड- 19 के कारण अपने अंतिम प्रयास में यह परीक्षा नहीं दे पाने वाले अभ्यर्थियों को एक और अवसर प्रदान नहीं करने का फैसला किस स्तर पर लिया गया?
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न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस पर नाराजगी व्यक्त की और कहा कि उनके समक्ष दायर हलफनामे में यह स्पष्ट नहीं है कि यह निर्णय किस स्तर पर लिया गया है। मामले की सुनवाई करने वाली पीठ में न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी भी शामिल हैं।
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पीठ ने कहा कि यह सामान्य हलफनामा एक अवर सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा दायर किया गया है। पीठ ने कहा कि यह एक नीतिगत निर्णय है। हलफनामे में इस बारे में कुछ नहीं बताया गया है कि यह निर्णय किस स्तर पर लिया गया है। शीर्ष अदालत ने मामले की अगली की सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित की है।
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याचिका में एक और मौके का अनुरोध
सुप्रीम कोर्ट उन अभ्यर्थियों को यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा के लिए एक और मौका देने का अनुरोध करने वाली याचिका की सुनवाई कर रही है, जो 2020 में महामारी के कारण अपना अंतिम प्रयास नहीं कर पाए थे। केंद्र सरकार ने 25 जनवरी को, उच्चतम न्यायालय को बताया था कि कोविड-19 के कारण 2020 में अंतिम प्रयास की परीक्षा में भाग नहीं ले पाने वाले छात्रों को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में अतिरिक्त मौका देने की अनुमति संपूर्ण परीक्षा प्रणाली को व्यापक रूप से प्रभावित करेगी।