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आज लोकसभा में पेश किया जाएगा नागरिकता संशोधन बिल, विरोध में जदयू और शिवसेना

Tue, 08 Jan 2019 03:50 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Tue, 08 Jan 2019 03:50 AM IST
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Citizenship Amendment Bill will be presented in Lok Sabha today
लोकसभा

पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आकर बसे गैर मुस्लिमों को यहां की नागरिकता देने के प्रस्ताव वाले नागरिकता संशोधन बिल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस बिल को मंगलवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा। बिल के विरोध में पूर्वोत्तर में प्रभावशाली आठ छात्र संगठनों सहित 40 से अधिक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने मंगलवार को 11 घंटे असम बंद का आह्वान किया है।

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इससे पहले सोमवार को इस बिल का परीक्षण करने वाली संयुक्त संसदीय समिति की ओर से लोकसभा में रिपोर्ट पेश की गई। समिति में शामिल विपक्षी दलों के सदस्यों ने बिल में संशोधन के जो भी प्रस्ताव दिए थे, वे बहुमत के आधार पर खारिज कर दिए गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को असम में संबोधित करते हुए कहा था कि यह बिल शीघ्र ही संसद में पेश किया जाएगा।
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क्या है संशोधन प्रस्ताव : पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता के लिए यहां रहने की अनिवार्यता न्यूनतम 12 वर्ष की बजाय 6 वर्ष प्रस्तावित है।
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क्या विरोध है विपक्ष का : कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सीपीआई (एम) सहित कुछ दलों का कहना है कि नागरिकता धर्म आधारित नहीं होनी चाहिए क्योंकि भारत धर्मनिरपेक्ष देश है। भाजपा की सहयोगी जदयू और शिवसेना भी इस बिल का विरोध कर रही हैं।

नागरिकता विधेयक के विरोध में अगप ने भाजपा सरकार से नाता तोड़ा

असम में नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 के मुद्दे पर भड़के विवाद के बाद असम गण परिषद (अगप) ने राज्य में भाजपा की अगुवाई वाली सर्बानंद सोनोवाल सरकार से नाता तोड़ लिया है। अगप अध्यक्ष और राज्य के कृषि मंत्री अतुल बोरा ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के तुरंत बाद इसका एलान किया। इस बीच, उक्त विधेयक के विरोध में पूरे राज्य में सोमवार को भी विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने कई जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सोनोवाल के पुतले फूंके और विधेयक की प्रतियां भी जलाईं। अखिल असम छात्र संघ (आसू) समेत पूर्वोत्तर के 30 से ज्यादा संगठनों ने मंगलवार को इस मुद्दे पर पूर्वोत्तर बंद की अपील की है। उक्त विधेयक मंगलवार को ही संसद में पेश किया जाएगा।

अगप नेता व पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत ने इससे पहले यहां एक प्रदर्शन के दौरान इस बात की पुष्टि की थी कि पार्टी ने भाजपा से नाता तोड़ने का फैसला कर लिया है। अगप ने वर्ष 2016 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस-विरोधी वोटों का विभाजन रोकने के लिए भाजपा से हाथ मिलाया था। फिलहाल सोनोवाल सरकार में पार्टी के तीन मंत्री थे।

अगप पहले से ही उक्त विधेयक पारित होने की स्थिति में भाजपा सरकार से नाता तोड़ने की धमकी देती रही है। उसकी दलील है कि धर्म के आधार पर नागरिकता देने का फैसला भारतीय संविधान के खिलाफ है। उक्त विधेयक के विरोध में सोमवार को पूरे राज्य में विरोध-प्रदर्शन तेज हो गया। खासकर मंत्री हिमंत विश्व शर्मा की टिप्पणी ने विरोध की आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने कहा था कि विधेयक पारित नहीं हुआ तो पांच साल में राज्य के हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएंगे और हम जिन्ना की नीति के समक्ष आत्मसमर्पण कर देंगे।  इससे राज्य की 17 सीटें जिन्ना की ओर चली जाएंगी।
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