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CISF: समुद्री तटों पर मछुआरे बनेंगे सीआईएसएफ के आंख और कान, तस्करी-संदिग्ध गतिविधियों का देंगे खुफिया अलर्ट

Sun, 22 Feb 2026 11:21 PM IST
शिवम गर्ग डिजिटल ब्यूरो,अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो,अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Sun, 22 Feb 2026 11:21 PM IST
सार

सीआईएसएफ डीजी प्रवीर रंजन ने कहा, इस साइक्लोथॉन के माध्यम से हम एक आत्मविश्वासी, जागरूक और प्रेरित तटीय भारत के उदय को देख रहे हैं। जब युवा लड़कियां, वर्दीधारी महिलाओं को आगे बढ़कर नेतृत्व करते देखती हैं, जब छात्र हमारे कर्मियों के साथ साइकिल चलाते हैं, तो सुरक्षा एक आकांक्षा बन जाती है।

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CISF Coastal Cyclothon 2026 Ends in Kochi, Fishermen to Act as Intelligence Network Along Coastline
सीआईएसएफ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

समुद्री तटों और उसके आसपास रहने वाले 'मछुआरे', सीआईएसएफ के 'आंख और कान' बनेंगे। तस्करी व संदिग्ध गतिविधियों बाबत ये तटीय प्रहरी, सीआईएसएफ को 'खुफिया' अलर्ट भेजेंगे। सीआईएसएफ के साइक्लोथॉन ने तट के प्राकृतिक प्रहरी के रूप में मछुआरों की महत्वपूर्ण भूमिका को पुनः स्थापित किया है। बंदरगाहों और मछली पकड़ने के घाटों पर आयोजित संवादात्मक सत्रों में इस बात पर जोर दिया गया है कि स्थानीय सतर्कता, तस्करी और संदिग्ध समुद्री गतिविधियों को रोकने में कैसे सहायक हो सकती है। मछुआरों, पंचायत नेताओं और युवा मंचों ने आजीविका और राष्ट्र दोनों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध 'तटीय संरक्षकों–तट प्रहरी' के रूप में कार्य करने का संकल्प लिया है।

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सीआईएसएफ 'वंदे मातरम' तटीय साइक्लोथॉन-2026 का समापन रविवार को कोच्चि में हुआ है। तटीय साइक्लोथॉन में सीआईएसएफ जवानों ने पूर्वी और पश्चिमी तटों के 6,553 किलोमीटर के क्षेत्र में 25 दिनों की परिवर्तनकारी यात्रा पूरी की है। इस आयोजन ने तटीय समुदायों, युवाओं, महिलाओं, मछुआरों, सहयोगी सुरक्षा एजेंसियों, उद्योग जगत के हितधारकों और नागरिक समाज को एक सशक्त संदेश -'सुरक्षित तट, समृद्ध भारत' के तहत एकजुट किया है। 130 सीआईएसएफ साइकिल चालकों के दल में 50 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं। भारत की 7500 किलोमीटर लंबी तटरेखा, देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए केंद्रीय महत्व को दर्शाती है।
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250 से अधिक बंदरगाहों के जरिए भारत के लगभग 95 प्रतिशत व्यापार का संचालन होता है। ऐसे में तटीय सुरक्षा बहुत जरुरी है। गुजरात के लखपत किले से लेकर पश्चिम बंगाल के बक्खाली तक, मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया, गोवा के प्रतिष्ठित तटों, कर्नाटक के न्यू मैंगलोर बंदरगाह, ओडिशा के ऐतिहासिक तटीय क्षेत्रों, आंध्र प्रदेश के मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों और तमिलनाडु के दक्षिणी समुद्री क्षेत्रों से होते हुए, साइक्लोथॉन ने मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की तस्करी और घुसपैठ जैसे खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाई है। साथ ही सामुदायिक सतर्कता को रक्षा की पहली पंक्ति के रूप में सुदृढ़ किया है।


साइक्लोथॉन की सबसे बड़ी विशेषता, जमीनी स्तर पर इसकी गहन भागीदारी थी। सावधानीपूर्वक चुने गए 52 तटीय गांवों में, सीआईएसएफ के साइकिल चालकों ने रात बिताई, निवासियों के बीच रहे, उनके साथ भोजन किया। उन्होंने स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया। मछुआरों, बुजुर्गों, युवा समूहों और महिला स्वयं सहायता संगठनों के साथ खुली बातचीत की। ये संवाद केवल प्रतीकात्मक नहीं थे, बल्कि आजीविका संबंधी चुनौतियों, पर्यावरणीय चिंताओं, समुद्री जोखिमों और विकासात्मक आकांक्षाओं पर रणनीतिक और गंभीर चर्चाएं थीं।



इन 52 गांवों में पूरे वर्ष, ओएनजीसी और बंदरगाह प्राधिकरणों सहित प्रमुख हितधारकों के सहयोग से, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों के माध्यम से, संरचित कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके तहत फिटनेस, स्वास्थ्य शिविर, भर्ती जागरूकता और करियर मार्गदर्शन सत्र शामिल रहेगा।


इसके अलावा, स्वच्छ भारत अभियान, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण अभियान, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता और सुविधा प्रदान करने में सहायता व स्कूल बुनियादी ढांचे में मदद देना एवं शैक्षिक किटों का वितरण करना, इस पर भी फोकस होगा। समुद्र तट के निकट रणनीतिक रूप से स्थित सीआईएसएफ की 47 तटीय इकाइयां इस दीर्घकालिक सहभागिता अभियान का नेतृत्व करेंगी। इससे साइक्लोथॉन के बाद भी निरंतरता सुनिश्चित होगी। जागरूकता को स्थायी साझेदारी में परिवर्तित किया जा सकेगा। 


कोच्चि में भव्य समापन समारोह में तटीय समुदायों, युवा समूहों, महिला संगठनों, सहयोगी सुरक्षा एजेंसियों, उद्योग जगत के हितधारकों और नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधि एक साझा मंच पर एकत्रित हुए। सीआईएसएफ डीजी प्रवीर रंजन ने कहा, इस साइक्लोथॉन के माध्यम से हम एक आत्मविश्वासी, जागरूक और प्रेरित तटीय भारत के उदय को देख रहे हैं। जब युवा लड़कियां, वर्दीधारी महिलाओं को आगे बढ़कर नेतृत्व करते देखती हैं, जब छात्र हमारे कर्मियों के साथ साइकिल चलाते हैं, तो सुरक्षा एक आकांक्षा बन जाती है। यह पहल जागरूकता को कार्रवाई में बदलने और नागरिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा में भागीदार बनाने के बारे में है।

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