'पानी-जमीन' दोनों पर चल सकता है चीन का यह खास युद्धपोत, समुद्र में लगा देगा ‘आग’
चीन ने अपना पहला ऐसा जंगी जलपोत बनाया है, जो जल और थल दोनों जगहों पर जंग लड़ सकता है। इस विशालकाय जलपोत के आने के बाद चीन द्वीपों और तटीय संघर्षों से आसानी से निपट सकेगा। इन जहाज को चीन के शंघाई स्थित शिपयार्ड में बनाया गया है। टाइप 075 क्लास वाला उभयचर जंगी जलपोत के आने बाद चीनी नौसेना की क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि चीन अपने जलपोतों की संख्या को बढ़ा रहा है।
हेलीकॉप्टर लैंडिंग की क्षमता
यूनाइटेड स्टेट्स के पूर्व नेवी कैप्टन और हवाई प्रशांत विश्वविद्यालय के प्रशिक्षक कार्ल शूस्टर के मुताबिक यह चीन की बढ़ती समुद्री क्षमता और उसकी सेनाओं की जल और थल पर युद्ध लड़ने की ताकत को दिखाता है। इस जहाज पर हेलीकॉप्टर उतारने की भी क्षमता है और इसमें खास हेलीकॉप्टर लैंडिंग डॉक्स बनाए गए हैं, ताकि द्वीपों और तटीय इलाकों पर तुरंत पहुंचा जा सके। हालांकि चीन ने अपने नए जहाज की क्षमता और आकार के बारे में ज्यादा कुछ जानकारियां साझा नहीं की हैं, लेकिन टाइप 075 वाले जलपातों में एक दर्जन से ज्यादा लड़ाकू और टोही विमान के अलावा 100 से ज्यादा सैनिक दस्ते, उनके वाहन और सैन्य साजो सामान को ढोने की क्षमता होती है।
चीन के पास नहीं एफ-35बी एयरक्राफ्ट जैसी सुविधा
अमेरिका और जापान की नौसेनाओं के पास पहले से ही जल और थल पर चलने वाले जंगी जहाज हैं। अमेरिकी उभयचर जहाज USS Wasp ने हाल ही में 18 महीने बाद इस क्षेत्र को छोड़ा है, जिसकी जगह नया और थोड़ा बड़ा जंगी जहाज USS America लेगा। वहीं जापान के पास दो इजुमो क्लास हेलीकॉप्टर डेस्ट्रॉयर है, जो उभयचर जंगी जहाज की तरह काम करता है। अमेरिका जलपतों में एफ-35बी एयरक्राफ्ट लड़ाकू विमानों को ढोने की क्षमता है, जिनकी खासियत है कि यह शॉर्ट टेक-ऑफ के साथ वर्टिकल लैंडिंग कर सकता है। जापान भी अपने युद्धपोतों को एफ-35बी एयरक्राफ्ट लड़ाकू विमानों से लैस करने वाला है। वहीं चीन के पास ऐसा कोई एयरक्राफ्ट नहीं है, जो एफ-35बी की तरह लैंडिंग क्षमता से लैस हो।
चीन दुनिया के शीर्ष युद्धपोत बनाने वाले देशों में शामिल
आधिकारिक मीडिया की खबर के मुताबिक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) नौसेना के पास एक विमानवाहक पोत (लियोनिंग) है, जिसे सक्रिय सेवा में 2012 में शामिल किया गया था। दूसरे स्वदेश निर्मित विमान वाहक पोत का अभी परीक्षण चल रहा है और तीसरे युद्धपोत से तेजगति से निर्माण चल रहा है। चीन की योजना है आने वाले सालों में पांच से छह विमानवाहक पोत हासिल करने की है। चीनी नौसेना ने मई में दो और निर्देशित मिसाइल विध्वंसकों को सक्रिय सेवा में शामिल किया था, जिससे इस तरह के जहाजों की संख्या 20 पहुंच गई। अमेरिका रक्षा विभाग ने भी अपनी एक रिपोर्ट में माना है कि चीन दुनिया के शीर्ष युद्धपोत बनाने वाले राष्ट्रों में शामिल है।
चाहता है दक्षिण चीन सागर, हिंद महासागर पर ‘कब्जा’
वहीं चीन जिस तरह से अपनी नौसेना क्षमता में इजाफा कर रहा है, उससे लगता है कि चीन दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता है। दोनों जगहों पर चीन लगातार अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है। यहां तक कि जापान के ससेबो शहर और वियतनाम के पास जलक्षेत्र में होने वाली किसी भी सैन्य गतिविधि को वह अपनी संप्रभुता से जोड़ लेता है। यहां तक कि 35 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले दक्षिण चीन सागर में चीन ने एक आर्टिफिशियल द्वीप भी बना लिया है, जहां बंदरगाह से लेकर हवाईपट्टी की भी सुविधा है। साथ ही, चीन ने वहां कई छोटे-छोटे सैनिक अड्डे भी बनाए हैं।
श्रीलंका में दिखी हैं चीनी पनडुब्बियां
वहीं भारत की चौखट के नाम से मशहूर हिंद महासागर को लेकर भारत और चीन में लंबे वक्त से विवाद चल रहा है। चीन ने श्रीलंका के जरिए इस क्षेत्र में अपनी पहुंच बढ़ा रहा है। कोलंबो के बंदरगाह पर पहले भी कई बार चीनी पनडुब्बियां नजर आ चुकी हैं। वहीं चीन की मालदीव में अस्थिरता की कोशिश को भी इसी से जोड़ कर देखा गया था। श्रीलंका में हंबनटोटा पोर्ट, मालदीव में मराओ पोर्ट, बांग्लादेश में चटगांव पोर्ट, पाकिस्तान में ग्वादर पोर्ट का कंट्रोल हाथ में लेने को चीन की साजिश से जोड़ कर देखा जा रहा है। वहीं इसी महीने सितंबर में भारतीय टोहीयान ने हिंद महासागर में चीनी पोतों की गतिविधियों को पकड़ा था।
भारत को चीनी लड़ाकू पोत शियान और मिसाइल फ्रिगेट की तस्वीर हाथ लगी थीं। गौरतलब है कि चीनी नौसेना ने पहली बार हिंद महासागर में पूर्वी अफ्रीकी देश जिबौती में अपना एक सैन्य अड्डा बनाया है। ‘स्टिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति पर काम करते हुए चीन बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका सहित अन्य देशों में सैन्य ठिकाने और संपत्तियां विकसित कर भारत को घेरना चाहता है।
बना चुका है पहला उभयचर विमान
इससे पहले चीन दुनिया का सबसे बड़ा उभयचर विमान बना चुका है, जिसमें लगातार 12 घंटे या चार हजार किमी उड़ान भरने की क्षमता है। 37 मीटर लंबा, लगभग बोइंग 737 के बराबर आकार का यह विमान जमीन के साथ पानी में भी उतर सकता है। यह विमान 53.5 टन वजन अपने साथ ले जा सकता है, इसके अलावा इसमें 12 टन पानी स्टोर करने की क्षमता है, ताकि जंगलों की आग बुझाने में यह कारगर साबित हो सकता है। साथ ही इसमें एक साथ 50 लोगों को बिठाने की भी क्षमता है।