{"_id":"579e728e4f1c1bdc762b9165","slug":"chinese-military-plane-came-before-infiltration-in-uttarakhand","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड में घुसपैठ से पहले आए थे चीनी सेना के टोही विमान","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
उत्तराखंड में घुसपैठ से पहले आए थे चीनी सेना के टोही विमान
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Mon, 01 Aug 2016 03:20 AM IST
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उत्तराखंड के बाराहोती इलाके में घुसपैठ से पहले चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने सिंथेटिक एपेर्चर रडार (एसएआर) से लैस उच्च श्रेणी के विमानों के जरिए टोही अभियान चलाया था। एसएआर विस्तृत क्षेत्र का हाई रेजोल्यूशन तस्वीर उपलब्ध कराता है। सूत्रों के अनुसार, उड़ान के बारे में सूचना विदेशी खुफिया एजेंसियों के साथ सूचनाएं साझा करने के दौरान मिली थी।
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आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, चीनी पीएलए ने ‘टुपोलेव टीयू 153एम’ विमान के जरिए उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बीच आने वाले इलाके की इस साल दो से तीन बार टोह ली थी।
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बाराहोती घुसपैठ के बाद विभिन्न सूत्रों से प्राप्त खुफिया सूत्रों को जोड़ कर देखने के बाद अधिकारियों ने जाना कि पिछले तीन महीने में कम से कम तीन बार यह विमान टोह लेने आया था। यह विमान तत्कालीन यूएसएसआर की तकनीक पर आधारित है जिसे चीन की कंपनी ने डिजाइन किया है।
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टुपोलेव टीयू 153एम विमान 40 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर उड़ सकता है और यह रडार से बचने के लिए 60 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। इतनी ऊंचाई से भी यह हाई रेजोल्यूशन तस्वीरें लेने के अलावा साइबर और संचार की अन्य जानकारियां जुटा सकता है।
एसएआर की बदौलत यह खराब मौसम और रात के समय में भी हाई रेजोल्यूशन तस्वीरें उपलब्ध करा सकता है। प्रणालियों को रडार संकेतों के लंबी दूरी के फैलाव और हाई रेजोल्यूशन तस्वीरें उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स की जटिल सूचना संसाधन क्षमता का लाभ मिलता है।
उत्तराखंड में चमोली जिले के बाराहोती क्षेत्र के सेना रहित इलाके में इस महीने के शुरू में कम से कम 20 से 25 सैनिकों ने प्रवेश किया था। इसके अलावा चीनी हेलीकॉप्टर भी भारतीय हवाई क्षेत्र में पांच मिनट से अधिक समय तक उड़ते रहे थे।