Wang Yi India Visit: 'शांति-सौहार्द बनाए रखने पर सहमति'; चीनी समकक्ष के साथ बैठक में बोले विदेश मंत्री जयशंकर
भारत पहुंचे चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपने समकक्ष डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात की। डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई प्रमुख प्राथमिकता है। संबंधों में एक कठिन दौर देखने के बाद दोनों राष्ट्र अब आगे बढ़ना चाहते हैं। इसके लिए मजबूत प्रयास की जरूरत है।
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#WATCH | Delhi: In his meeting with Chinese Foreign Minister Wang Yi, EAM Dr S Jaishankar says, "The fight against terrorism in all its forms and manifestations is another major priority. I look forward to our exchange of views. Overall, it is our expectation that our discussions… pic.twitter.com/gJOeelcIw5
— ANI (@ANI) August 18, 2025विज्ञापन
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई प्राथमिकता: जयशंकर
चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ लड़ाई प्रमुख प्राथमिकता है। मैं हमारे विचारों के आदान-प्रदान की प्रतीक्षा कर रहा हूं। कुल मिलाकर उम्मीद है कि हमारी चर्चा भारत और चीन के बीच एक स्थिर, सहयोगात्मक और दूरदर्शी संबंध बनाने में योगदान देगी। जो हमारे हितों की पूर्ति करेगा और हमारी चिंताओं का समाधान करेगा। आप चीन में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन से ठीक पहले भारत आएं हैं। हमने इसकी अध्यक्षता के दौरान चीनी पक्ष के साथ मिलकर काम किया है। हम आपके लिए अच्छे परिणामों और निर्णयों के साथ एक सफल शिखर सम्मेलन की कामना करते हैं।
'भारत में आपका स्वागत'
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों के बीच 24वें दौर की वार्ता के लिए आपका और आपके प्रतिनिधिमंडल का मैं भारत में स्वागत करता हूं। अक्तूबर 2024 में कजान में हमारे नेताओं की मुलाकात के बाद से यह किसी चीनी मंत्री की पहली यात्रा भी है। यह अवसर हमें अपने द्विपक्षीय संबंधों को पूरा करने और समीक्षा करने का अवसर प्रदान करता है। यह वैश्विक स्थिति और आपसी हित के कुछ मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का भी उपयुक्त समय है।
दोनों देश आगे बढ़ना चाहते हैं: विदेश मंत्री
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हमारे संबंधों में एक कठिन दौर देखने के बाद दोनों राष्ट्र अब आगे बढ़ना चाहते हैं। इसके लिए दोनों पक्षों की ओर से एक स्पष्ट और रचनात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उस प्रयास में हमें तीन पारस्परिक बातों आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित का ध्यान रखना चाहिए। मतभेद विवाद नहीं बनने चाहिए और न ही प्रतिस्पर्धा, संघर्ष बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि आप कल हमारे विशेष प्रतिनिधि एनएसए अजीत डोभाल के साथ सीमा मुद्दों पर चर्चा करेंगे। यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे संबंधों में किसी भी सकारात्मक गति का आधार सीमा क्षेत्रों में संयुक्त रूप से शांति बनाए रखने की क्षमता है। यह भी आवश्यक है कि डी-एस्केलेशन प्रक्रिया आगे बढ़े।
'दोनों देशों की मुलाकात पर दुनिया की नजर'
उन्होंने कहा कि जब दुनिया के दो सबसे बड़े देश मिलते हैं, तो स्वाभाविक है कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर चर्चा होगी। हम एक निष्पक्ष, संतुलित और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था चाहते हैं। जिसमें एक बहुध्रुवीय एशिया भी शामिल हो। बहुपक्षवाद में सुधार भी आज की आवश्यकता है। वर्तमान परिवेश में वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना और उसे बढ़ाना स्पष्ट रूप से आवश्यक है। सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई एक और प्रमुख प्राथमिकता है। मैं हमारे विचारों के आदान-प्रदान की आशा करता हूं।
शांति और सौहार्द जरूरी: वांग यी
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि हमने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाए रखा। हमने शिजांग स्वायत्त क्षेत्र में स्थित भारतीय तीर्थ क्षेत्र कैलाश मानसरोवर (माउंट गंग रेनपोछे) और लेक मपाम युन त्सो की यात्रा फिर से शुरू की है। हमने सहयोग का विस्तार करने, चीन-भारत संबंधों के सुधार और विकास की गति को मजबूत करने पर जोर दिया है। ताकि हम एक-दूसरे की सफलता में योगदान दे सकें और एशिया और दुनिया को निश्चितता प्रदान कर सकें।
चीन ने कहा- भारत के साथ मिलकर काम करेंगे
इससे पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी का भारत पहुंचने पर दिल्ली एयरपोर्ट पर स्वागत किया गया। विदेश मंत्री वांग यी की यात्रा पर चीन ने कहा कि उनकी भारत यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बनी सहमति और पिछले दौर की सीमा वार्ता के दौरान लिए गए फैसलों पर मिलकर काम करना है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि वांग की यात्रा के माध्यम से चीन भारत के साथ मिलकर काम करने की उम्मीद करता है ताकि नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण आम सहमति को साकार किया जा सके। उच्च स्तरीय आदान-प्रदान को कायम रखा जा सके। राजनीतिक विश्वास को बढ़ाया जा सके। व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके। मतभेदों को उचित तरीके से निपटाया जा सके और चीन-भारत संबंधों के सतत, सुदृढ़ और स्थिर विकास को बढ़ावा दिया जा सके।
उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता दोनों देशों के बीच सीमा वार्ता के लिए एक उच्च स्तरीय चैनल है। बीजिंग में 23वें दौर की वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने परिसीमन, वार्ता, सीमा प्रबंधन तंत्र, सीमा पार आदान-प्रदान और सहयोग पर कई आम सहमतियां हासिल कीं। इस साल की शुरुआत से ही दोनों पक्षों ने राजनयिक माध्यमों से संवाद बनाए रखा है तथा उन परिणामों के कार्यान्वयन को सक्रियता से आगे बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि आगामी वार्ता के लिए चीन मौजूदा सहमति के आधार पर और सकारात्मक एवं रचनात्मक रुख के साथ भारत के साथ गहन संवाद जारी रखने और सीमावर्ती क्षेत्रों में निरंतर शांति बनाए रखने के लिए तैयार है। चीन भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक है, सबसे पहले जो सहमति बनी है उसका पालन किया जाएगा और उसके आधार पर सीमा क्षेत्र में स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए संवाद जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत में वांग यी विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय संबंधों और आपसी हितों के मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श करेंगे।
वांग यी के भारत दौरे का समय बेहद अहम
वांग यी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। भारत ने ट्रंप प्रशासन के इस फैसले की आलोचना की और भारी-भरकम टैरिफ को अन्यायपूर्ण बताया। अमेरिका के टैरिफ के एलान के तुरंत बाद भारतीय एनएसए अजीत डोभाल ने रूस का दौरा किया। इसके बाद डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी को सीमा विवाद पर बातचीत के लिए भारत आने का निमंत्रण दिया, जिसे वांग यी ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए चीन दौरे पर जाएंगे। चीन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।