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वुहान का वायरॉलोजी संस्थान विवादों में, जानें अमेरिका ने प्रयोगशाला पर क्या लगाए आरोप?

Mon, 20 Apr 2020 04:44 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Mon, 20 Apr 2020 04:44 PM IST
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chinas wuhan institute of virology the lab at the core of a virus controversy
कोरोना वायरस - फोटो : Amar Ujala

कोरोना वायरस की उत्पत्ति माने जाने वाला वुहान शहर एक बार फिर विवादों में है। वुहान शहर के पहाड़ी इलाकों में बसी चीन की उच्च स्तरीय बायोसेफ्टी प्रयोगशाला को लेकर अमेरिका ने विवादित बयान दिया है। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि इसी प्रयोगशाला से कोरोना वायरस निकला है।

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चीन के वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस किसी जानवर से इंसानों में आया है। वुहान के एक बाजार जहां जानवरों की बिक्री होती है वहां से ये वायरस इंसानों में फैला है लेकिन प्रयोगशाला के होने से विवादित परिकल्पना सामने खड़ी हो गई है जो बताती है कि जीवाणु इसी प्रयोगशाला से फैला है।
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अमेरिका इन आरोपों को मुख्यधारा में ले आया है। अमेरिका के सचिव माइक पोम्पियो ने कहा कि अमेरिकी अधिकारी इस बात की तह तक जा रहे हैं कि आखिर ये वायरस पूरी दुनिया में कैसे फैला? कुछ सवालों से समझते हैं कि वुहान की वायरोलॉजी क्या है और क्या काम करती है...

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वुहान में स्थित क्या है वायरोलॉजी लैब?

chinas wuhan institute of virology the lab at the core of a virus controversy
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स

ये संस्थान अलग अलग तरह के वायरस को इकट्ठा करने का चीनी केंद्र है। यहां वायरस के समूहों को इकट्ठा किया जाता है और उन पर शोध होता है। ये एशिया का सबसे बड़ा वायरस बैंक है जहां 1,500 से ज्यादा वायरस को सुरक्षित रखा गया है। 

ये एशिया की पहली सबसे ज्यादा सुरक्षित प्रयोगशाला है जिसमें पी4 जैसे खतरनाक वायरस को सुरक्षित रखा जाता है। ये वायरस इंसान से इंसान में तेजी से फैलता है और इबोला जैसी बीमारियों का कारण बनता है।

इस वायरॉलोजी को 2015 में पूरा किया गया था और 2018 में प्रयोग के लिए खोला गया था। इस प्रयोगशाला को बनाने में करीब 42 मिलियन डॉलर खर्च किए गए थे। वुहान के वायरॉलोजी संस्थान में पी3 प्रयोगशाला को भी रखा गया जो 2012 से संचालित है। 

प्रयोगशाला के बाहर एक पोस्टर लगा है जिसमें लिखा है कि घबराइए नहीं, आधिकारिक एलानों को सुनें, विज्ञान पर भरोसा रखें और अफवाहें ना फैलाएं।

क्या यहीं से कोरोना वायरस की उत्पत्ति हुई?

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Corona in World - फोटो : ANI

अमेरिका के सचिव माइक पोम्पियो ने चीन पर आरोप लगाते हुए कहा कि हम जानते हैं कि चीन कभी दुनिया के वैज्ञानिकों को प्रयोगशाला में जाने की अनुमति नहीं देगा, ना ये जानने की कि आखिर वहां क्या हो रहा है? एक रेडियो इंटरव्यू में पोम्पियो ने ये बातें कहीं। 

वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा कि इतनी सुरक्षित प्रयोगशाला में सार्स जैसे कोरोना वायरस पर शोध कर रहे शोधकर्ताओं से संबंधित अपर्याप्त सुरक्षा मानकों को लेकर चिंता है। वहीं फॉक्स न्यूज़ के मुताबिक प्रयोगशाला में वायरस की चपेट में आए किसी इंसान पर शोध किया जा रहा होगा जिससे ये वायरस वहां से वुहान शहर में फैला। 

हालांकि वायरॉलोजी ने इन सभी तरह के अफवाहों को खारिज करते हुए एक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि 30 दिसंबर को सबसे पहले किसी अनजान वायरस के सैंपल लैब में आए थे। दो जनवरी को वायरस की जीन के बारे में पता चला और 11 जनवरी को रोगाणु पर विश्व स्वास्थ्य संगठन को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी।    

वहीं चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ाओ लिजियन ने प्रयोगशाला से वायरस के निकलने जैसे सभी आरोपों को खारिज किया। ज़ाओ ने कहा कि ऐसे बयान लोगों को गुमराह करने के लिए काफी है। गौरतलब है कि ज़ाओ पहले ही इस वायरस को चीन तक लाने का आरोप अमेरिका की सेना पर लगा चुके हैं। 

वायरस को लेकर क्या कहते हैं वैज्ञानिक?

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Scientist
वैज्ञानिकों का मानना है कि वायरस चमगादड़ से फैला है और बाद में किसी माध्यम के जरिए इंसानों में आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि चीन के वैज्ञानिकों के एक समूह ने एक शोधपत्र जारी किया जिसमें इस बात का खुलासा हुआ कि पहले कोविड-19 के मरीज वुहान के वेट मार्केट से कोई संपर्क नहीं था। साथ ही पहले 41 संक्रमित मामलों में से 13 मामले ऐसे ही हैं जिनका वेट मार्केट से कोई सीधा संपर्क नहीं था। 

पी4 प्रयोगशाला की डिप्टी डायरेक्टर और चमगादड़ कोरोना वायरस की बड़ी जानकार शी जेंगली उस टीम का हिस्सा रह चुकी है जिसने इस बात का खुलासा किया था कि सार्स-सीओवी 2 एक चमगादड़ से निकला वायरस है।

साइंटिफिक अमेरिकन के साथ एक इंटरव्यू में शी ने कहा कि सार्स-सीओवी 2 उनकी प्रयोगशाला में जमा और शोध किए गए चमगादड़ों के किसी सैंपल से मेल नहीं खाता है। लंदन के किंग्स कॉलेज में बायोसेक्योरिटी रिसर्चर फिलिप्पा कहती हैं कि अभी तक इसका कोई सबूत नहीं है कि वायरस लैब से फैला है और ना ही इस बात का कि चीन का वेट मार्केट वायरस का मुख्य उद्गम स्थल है।

उन्होंने आगे कहा कि उनके हिसाब से इस महामारी की इजाद अभी भी एक बड़ा सवाल है लेकिन सामने ऐसे कई तथ्य हैं जो ये प्रयोगशाला से वायरस के निकलने की ओर इंगित करते हैं। इसे साबित करने के लिए पर्याप्त जांच की जरुरत है।  

लंदन के हाइजिन और ट्रॉपिकल मेडिसिन के प्रोफेसर डेविड हेमेन ने भी यही कहा कि अभी तक वायरस की उत्पत्ति का कोई वास्तविक सबूत नहीं है लेकिन यह तय है कि ये वायरस चमगादड़ से संबंधित है। 
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