चीन को किसी न किसी स्तर पर कोरोना से जुड़ी जानकारी साझा करनी होगी: अकबरुद्दीन
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पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी से संघर्ष कर रही है। अंतरराष्ट्रीय संगठन भी कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए समन्वय स्थापित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। कोरोना वायरस का प्रभाव दुनिया के मुल्कों के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। इसे लेकर चीन की तरफ लगातार उंगलियां उठ रही हैं। इसे लेकर भारत सतर्क प्रतिक्रिया दे रहा है।
ऐसी खबरें हैं कि मार्च के महीने के लिए 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता करने वाले चीन ने कोविड-19 पर किसी भी चर्चा को रोक दिया था। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत सैयद अकबरुद्दीन से जब इंडिया टुडे न्यूज चैनल ने इस बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद अपनी प्रक्रियाओं और कार्यसूची का स्वामी है। हम इस समय वहां पर नहीं हैं। इसलिए, मुझे इस पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए कि उन्हें क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए। मैं समझता हूं कि एक अनौपचारिक परामर्श चल रहा है और जल्द ही या बाद में हमें इसके परिणाम का पता चल जाएगा।
लेकिन, महामारी के मूल और इसके पूर्ण प्रभाव को समझने के लिए चीन द्वारा जानकारी साझा करने की आवश्यकता पर पूछे एक विशिष्ट सवाल पर राजदूत अकबरुद्दीन ने कहा कि एक वैश्वीकृत दुनिया में यह सार्वजनिक भलाई के लिए आवश्यक है।
राजदूत ने कहा कि हम एक वैश्विक समाज में हैं। वैश्वीकरण को सुचारू रूप से आगे बढ़ने के लिए हमें वैश्विक व्यवहार का पालन करने की आवश्यकता है। एक ऐसा वैश्विक सार्वजनिक व्यवहार जो वैश्वीकरण के लिए आवश्यक है कि वैश्विक प्रभाव पड़ने वाले किसी भी मुद्दे की जानकारी और समझ को साझा किया जाए।
हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करने का नहीं है, बल्कि इस समय सबको साथ आकर इस मौजूदा खतरे से लड़ने के लिए कदम उठाना चाहिए।
राजदूत ने कहा कि किसी स्तर पर, अगर हमें कोरोना वायरस की इस पूरी घटना की पूरी समझ हासिल करनी है तो हमें उस मुद्दे को पारदर्शी, वैज्ञानिक रूप से, खुले तौर पर संबोधित करना होगा। इसलिए चीन को भी इससे जुड़ी जानकारी दुनिया को देनी होगी। उन्होंने कहा कि हालांकि, इसके लिए एक निश्चित समय और स्थान होगा जब हम मौजूदा संकट को दूर करेंगे।
राजदूत अकबरुद्दीन ने कहा कि यह अब तक सबसे खराब संकट है। भारत ने अपनी आजादी के बाद अब तक ऐसा संकट नहीं देखा है। साथ ही यह 100 साल का सबसे बुरा वैश्विक संकट है। उन्होंने कह कि हम सबसे बड़े वैश्विक संकट को झेल रहे है, जो भारत के लिए आजादी के बाद सबसे बड़े संकट के रूप में आया है।
राजदूत ने कहा कि यह एक बहुआयामी संकट है जिसके मूल में यह एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट है क्योंकि इससे मरने वालों की संख्या में दिनों-दिन बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक आपदा को लेकर पूर्वानुमान तेजी से बढ़ने लगे है। यह एक आर्थिक संकट में भी बदल गया है जिसको वैश्विक अर्थव्यवस्था ने सौ वर्षों में नहीं देखा था।
लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संकट का मुकाबला करने के लिए समन्वित वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता होगी। लेकिन इस संकट से निपटने के लिए सबसे आगे प्रत्येक राष्ट्रीय सरकार है और उसे अपने देश को इससे बाहर निकालने के लिए अपनी नेतृत्व क्षमता को बढ़ाना होगा।
भारतीय राजदूत ने कहा कि इस लड़ाई में राष्ट्रीय सरकारें हैं जो सबसे आगे हैं। उनके पास साधन है। सार्वजनिक, अंतर-राज्य, बहुपक्षीय और विभिन्न अन्य संगठन जैसे अन्य संस्थान हर तरीके से सहायता करने की कोशिश कर रहे हैं जो वे कर सकते हैं।