लद्दाख में साजिश करने वाला चीन अपने बीआरआई प्रोजेक्ट में भारत को दे रहा था ये लालच
पिछले दिनों जब चीन ने लद्दाख की गलवां घाटी में गलत मंशा से अपनी सेना तैनात की तो उसी वक्त भारत को आर्थिक तौर से फायदा पहुंचाने की बात कह कर बीआरआई का ऑफर दे डाला...
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पिछले दिनों जब चीन ने लद्दाख की गलवां घाटी में गलत मंशा से अपनी सेना तैनात की तो उसी वक्त भारत को आर्थिक तौर से फायदा पहुंचाने की बात कह कर बीआरआई का ऑफर दे डाला।
केंद्र सरकार ने दो टूक शब्दों में इस प्रोजेक्ट से खुद को दूर रखने की बात कह दी। साथ ही यह भी कहा कि ये प्रोजेक्ट भारत की संप्रभुता और सार्वभौमिकता के लिए एक बड़ा खतरा है।
पिछले दिनों ग्लोबल टाइम्स में यह रिपोर्ट छपी थी। इसमें चीन की ओर से कहा गया था कि बीआरआई प्रोजेक्ट में शामिल होने से भारत को आर्थिक मजबूती मिलेगी।
इससे देश में विदेशी निवेश की मात्रा बढ़ जाएगी नए रोजगार का सृजन होगा।
दूसरे राष्ट्रों के साथ व्यापार के अवसर प्राप्त होंगे। चीन ने इस प्रोजेक्ट को लेकर यह तर्क दिया था कि कुछ दशकों में भारत की इकोनॉमी ने काफी तेजी पकड़ी है, लेकिन यहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं ज्यादा विकसित नहीं हैं।
अगर भारत बीआरआई में शामिल होता है, तो उसे आर्थिक मोर्चे पर कई नए विकल्प मिल सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी लिखा था कि कोरोना वायरस जैसी महामारी के चलते बहुत से देश आर्थिक तौर पर पीछे हो गए हैं।
ऐसे देशों के पास अब एक मौका है कि वे दोबारा से अपने आर्थिक विकास को पटरी पर ला सकते हैं। हिंद महासागर के आसपास का इलाका चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।
चूंकि पहले से ही भारत इस क्षेत्र में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भूमिका निभाने में आगे रहा है, चीन ने लालच भरे अंदाज में कहा था कि भारत बीआरआई प्रोजेक्ट के जरिए पहले वाली भूमिका में आ सकता है।
बता दें कि यह चीनी प्रोजेक्ट विभिन्न देशों के साथ व्यापार बढ़ाने का एक वृहद कार्यक्रम है। आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने के मकसद से इसे छह गलियारों के साथ जोड़ने की बात कही गई है।
इसमें एशिया और अफ्रीका के साथ साथ यूरोप को भूमि और समुद्री नेटवर्क के माध्यम से जोड़ने की बात कही गई है। दरअसल बीआरआई का रोड मैप 2013 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा तैयार किया गया था।
वे इस प्रोजेक्ट को दो हजार साल पहले हान राजवंश के दौरान स्थापित सिल्क रोड की अवधारणा से जोड़ते हैं। बीआरआई, चीन के तटीय क्षेत्रों को समुद्री मार्ग के जरिए दक्षिण पूर्व, दक्षिण एशिया, दक्षिण प्रशांत, मध्य पूर्व, पूर्वी अफ्रीका और बाद में पूरे यूरोप से उसे जोड़ने की योजना है।
चीन ने जब पाकिस्तान के साथ मिल कर इकोनॉमिक कॉरिडोर का प्रोजेक्ट शुरू किया था, तब भी भारत ने उसका विरोध किया था। इस कॉरिडोर का रास्ता पाक द्वारा कब्जा किये गए कश्मीर के गिलगिट-बाल्टिस्तान से होकर गुजरता है।