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युद्ध जैसा माहौल बनाकर भारत में विदेशी कंपनियों का रास्ता बंद करना चाहता है चीन

Thu, 25 Jun 2020 04:57 AM IST
योगेश साहू हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली।
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Thu, 25 Jun 2020 04:57 AM IST
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China wants to close the path of foreign companies in India by creating a war-like situation or atmosphere
Galwan Vally Satellite Photo - फोटो : Amar Ujala

वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी तनातनी के कारण न तो भारत और चीन के बीच युद्ध की नौबत आएगी और न ही निकट भविष्य में दोनों देशों के बीच तनाव ही कम होगा। दरअसल, चीन की रणनीति युद्ध जैसा माहौल तैयार कर भारत में विदेशी निवेश और दूसरी कंपनियों के प्रवेश का रास्ता बंद करने की है। इसी के तहत चीन की रणनीति एलएसी पर लंबे समय तक तनाव बनाए रखकर भारत में निवेश का माहौल नहीं होने का दुनिया को संदेश देने की है।

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दरअसल, भारत और चीन के बीच एलएसी पर तनाव की वजह कोरोना के कारण उपजे नए वैश्विक हालात हैं। इस मोर्चे पर न सिर्फ चीन दुनिया के कई महत्वपूर्ण देशों के निशाने पर है, बल्कि उसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर ताकतवर देशों की गोलबंदी भी शुरू हो गई है।
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इस क्रम में चीन में स्थापित अमेरिका सहित दूसरे देशों की कई कंपनियों ने नई जगहों पर जाने की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं। भारत ने इसे अपने लिए एक बेहतर अवसर मानकर इन कंपनियों को आकर्षित करने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर इन कंपनियों से सीधी बातचीत का सिलसिला शुरू किया गया है।

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200 अमेरिकी कंपनियां चीन से पलायन की फिराक में

सरकार के शीर्ष सूत्र के मुताबिक, चीन के लिए मुश्किलें तब शुरू हुईं जब उसके यहां स्थापित 200 अमेरिकी कंपनियों ने दूसरे देश में डेरा डालने का संकेत दिया। अमेरिका के अलावा दूसरे देशों की कंपनियों ने भी इसी राह पर चलने के संकेत दिए। मई में एक समय ऐसा भी आया जब अमेरिका की 200 कंपनियों ने भारत आने के संकेत दिए।

हालात का फायदा उठाने के लिए कई राज्यों ने अपने अपने श्रम कानूनों में अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक संशोधन किए। इसी दौरान केंद्र सरकार के स्तर पर लग्जमबर्ग से दोगुने आकर के लैंडपूल की तलाश शुरू हुई। इस दिशा में गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश में 4,61,589 हेक्टेयर भूमि की पहचान का काम भी शुरू हो गया।

ठीक इसी समय शुरू हुआ तनाव

भारत ने चीन छोड़ने वाली कंपनियों को अपने यहां बुलाने की योजना पर काम अप्रैल महीने में शुरू कर दिया। इस महीने के अंतिम हफ्ते में इस दिशा में सकारात्मक संदेश मिलने शुरू हुए। और यही वह समय था जब चीन ने एलएसी पर तनाव की स्थिति पैदा करनी शुरू कर दी। तनाव को बढ़ाने के लिए चीन की ओर से ऐसे दावे किए गए जो तथ्यात्मक तौर पर गलत थे। इसके अलावा इस दौरान दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने  का कोई कारण नहीं था।

पाकिस्तान-नेपाल को किया अपनी योजना में शामिल

भारत को वॉर जोन के रूप में प्रचारित करने के लिए चीन ने पाकिस्तान और नेपाल को भी साधा। इस तथ्य की पुष्टि इससे भी होती है कि एलएसी पर चीन के साथ जारी तनाव के बीच पाकिस्तान एलओसी पर लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है। नेपाल ने विवादित और तथ्यहीन तरीके से भारतीय भूभाग पर दावा जताने के बाद तनाव का संदेश देने के लिए बांधों के मरम्मत के कार्य पर रोक लगा दी है।

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