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चीन का आरोप- ठीक नहीं भारत का रवैया, मुद्दों को लटका रहे हैं मोदी
टीम डिजिटल, अमर उजाला
Updated Thu, 07 Jul 2016 04:57 PM IST
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चीन की ओर से कहा गया है कि भारत के साथ उसके रिश्ते खराब करने में विदेशी मीडिया और वहां के अधिकारियों का बड़ा योगदान है। ये बातें चीन के सरकारी समाचार ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख में कही गई हैं।
लेख में जिक्र किया गया है कि चीन पर आरोप लगाए जाते हैं कि दक्षिण चीन सागर पर कब्जा करने का मकसद हिंद महासागर पर नजर रखना है, जबकि इसे कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता है।
ग्लोबल टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक विदेशी मीडिया भारत-चीन के बीच सीमा विवाद और रक्षा रिश्तों को जरूरत से ज्यादा तवज्जो देने की कोशिश करता है। इसके चलते दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और दूसरे जरूरी गतिविधियों को दरकिनार किया जाता है।
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लेख में जिक्र किया गया है कि चीन पर आरोप लगाए जाते हैं कि दक्षिण चीन सागर पर कब्जा करने का मकसद हिंद महासागर पर नजर रखना है, जबकि इसे कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता है।
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ग्लोबल टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक विदेशी मीडिया भारत-चीन के बीच सीमा विवाद और रक्षा रिश्तों को जरूरत से ज्यादा तवज्जो देने की कोशिश करता है। इसके चलते दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और दूसरे जरूरी गतिविधियों को दरकिनार किया जाता है।
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चीन के सरकारी समाचार पत्र ने साधा निशाना
बता दें कि न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) में सदस्यता नहीं मिलने पर भारत की ओर से चीन का बिना नाम लिए उसे जिम्मेदार बताया गया था।
दूसरी ओर 'बेल्ट एंड रोड (बी एंड आर) इनीशिएटिव' शीर्षक से लिखे लेख में कहा गया कि भारत ने चीन के बेल्ट एंड रोड पहल को पूरा समर्थन दिया। दरअसल 'वन बेल्ट एंड वन रोड' के जरिए सिल्क रूट का प्रस्ताव है, जिसमें सड़क और कॉरिडोर दोनों बनाए जाने हैं। इस प्रस्ताव के तहत चीन को एशिया और यूरोप से जोड़ने की योजना है।
तीन दिन पहले ही समाचार पत्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। लेख में कहा गया कि चीन को लेकर उनका रवैया सकारात्मक नहीं है। वह योजनाओं में भी देरी करते हैं।
दूसरी ओर 'बेल्ट एंड रोड (बी एंड आर) इनीशिएटिव' शीर्षक से लिखे लेख में कहा गया कि भारत ने चीन के बेल्ट एंड रोड पहल को पूरा समर्थन दिया। दरअसल 'वन बेल्ट एंड वन रोड' के जरिए सिल्क रूट का प्रस्ताव है, जिसमें सड़क और कॉरिडोर दोनों बनाए जाने हैं। इस प्रस्ताव के तहत चीन को एशिया और यूरोप से जोड़ने की योजना है।
तीन दिन पहले ही समाचार पत्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। लेख में कहा गया कि चीन को लेकर उनका रवैया सकारात्मक नहीं है। वह योजनाओं में भी देरी करते हैं।
मोदी सरकार पर भी साधा गया है निशाना
लेख में बताया गया कि भारतीय रणनीतिकार और सरकार मानती है कि सिल्क रूट के पीछे चीन ने भू-रणनीतिक डिजाइन बनाया है। अब इसको लेकर भारत ने विरोध शुरू कर दिया है। इस मामले में चीन का पक्ष है कि 'बेल्ट एंड रोड' दोनों देशों के बीच रिश्ते को मजबूती देगा।
लेख में कहा गया कि भारत ने चीन और पाकिस्तान के बीच शुरू किए गए कॉरिडोर के लिए भी विरोध जताया था। चीन-पाकिस्तान वित्तीय कॉरिडोर (सीपीईसी) को भारत ने सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया था। हालांकि, चीन ने साफ किया है कि ये प्रोजेक्ट 'बेल्ट एंड रोड' का ही एक हिस्सा है।
लेख में ये बताने की कोशिश की गई है कि दोनों देश अहम शक्तियां हैं, ये जरूरी मुद्दे पर बातचीत कर सकती हैं। किसी भी विवाद पर आपसी समझ से दोनों देश पिछले तीन दशक से मामले सुलझाते आ रहे हैं। इसी के जरिए इस क्षेत्र में शांति भी कायम है।
लेख में कहा गया कि भारत ने चीन और पाकिस्तान के बीच शुरू किए गए कॉरिडोर के लिए भी विरोध जताया था। चीन-पाकिस्तान वित्तीय कॉरिडोर (सीपीईसी) को भारत ने सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया था। हालांकि, चीन ने साफ किया है कि ये प्रोजेक्ट 'बेल्ट एंड रोड' का ही एक हिस्सा है।
लेख में ये बताने की कोशिश की गई है कि दोनों देश अहम शक्तियां हैं, ये जरूरी मुद्दे पर बातचीत कर सकती हैं। किसी भी विवाद पर आपसी समझ से दोनों देश पिछले तीन दशक से मामले सुलझाते आ रहे हैं। इसी के जरिए इस क्षेत्र में शांति भी कायम है।