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India-China: चीन विश्वास को मजबूत करने और संबंधों को पटरी पर लाने के लिए तैयार, चीनी राजदूत जू फेइहोंग का बयान
Wed, 18 Dec 2024 05:47 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 18 Dec 2024 05:47 PM IST
सार
बीजिंग में एनएसए अजीत झोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच होने वाली 23वीं विशेष प्रतिनिधि बैठक से पहले भारत में चीनी राजदूत जू फेइहोंग ने कहा है कि चीन भारत के साथ मिलकर काम करने और दोनों देशों के नेताओं के बीच हुई सहमतियों को लागू करने के लिए तैयार है।
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जू फेइहोंग, भारत में चीनी राजदूत
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत में चीन के राजदूत, जू फेइहोंग ने बुधवार को कहा कि चीन भारत के साथ मिलकर काम करने और दोनों देशों के नेताओं के बीच हुई सहमतियों को लागू करने के लिए तैयार है। ये बातें भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में होने वाली 23वीं विशेष प्रतिनिधि बैठक से पहले कही गईं।
ईमानदारी से मतभेदों को सुलझाने के लिए तैयार- फेइहोंग
एक सोशल मीडिया पोस्ट में राजदूत जू फेइहोंग ने लिखा, 'चीन भारत के साथ मिलकर काम करने, दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी अहम सहमतियों को लागू करने, एक-दूसरे के प्रमुख हितों और चिंताओं का सम्मान करने, बातचीत और संचार के जरिए आपसी विश्वास बढ़ाने, और ईमानदारी से मतभेदों को सुलझाने के लिए तैयार है। हमारा लक्ष्य है कि द्विपक्षीय संबंधों को जल्द से जल्द स्थिर और स्वस्थ विकास के रास्ते पर लाया जाए।'
दिसंबर 2019 के बाद चीन-भारत में उच्च-स्तरीय बैठक
बीजिंग में होने वाली विशेष प्रतिनिधि वार्ता का मुख्य फोकस भारत-चीन सीमा मुद्दा होगा। यह दिसंबर 2019 के बाद पहली बार होगी जब ऐसी उच्च-स्तरीय बैठक हो रही है। भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि इन वार्ताओं में सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने और सीमा विवाद का उचित, न्यायसंगत और आपसी सहमति वाला समाधान खोजने पर चर्चा की जाएगी।
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अक्तूबर 2024 में विवादित बिंदु से हटीं दोनों देशों की सेनाएं
वहीं इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद को बताया कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सैनिकों की वापसी (डिसएंगेजमेंट) प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसमें देपसांग और डेमचोक के क्षेत्र भी शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना भारत-चीन संबंधों के विकास के लिए जरूरी है। अक्तूबर 2024 में भारत और चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गश्त से संबंधित व्यवस्था को लेकर एक समझौता किया था। 2020 में एलएसी पर चीन की सैन्य कार्रवाई के कारण पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के बीच तनाव शुरू हुआ था, जिसने उनके संबंधों को बुरी तरह प्रभावित किया।
रूस में हुई थी पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात
रूस के कजान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात में कहा था कि दोनों देशों के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना प्राथमिकता होनी चाहिए और आपसी विश्वास द्विपक्षीय संबंधों की नींव बना रहना चाहिए।
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ईमानदारी से मतभेदों को सुलझाने के लिए तैयार- फेइहोंग
एक सोशल मीडिया पोस्ट में राजदूत जू फेइहोंग ने लिखा, 'चीन भारत के साथ मिलकर काम करने, दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी अहम सहमतियों को लागू करने, एक-दूसरे के प्रमुख हितों और चिंताओं का सम्मान करने, बातचीत और संचार के जरिए आपसी विश्वास बढ़ाने, और ईमानदारी से मतभेदों को सुलझाने के लिए तैयार है। हमारा लक्ष्य है कि द्विपक्षीय संबंधों को जल्द से जल्द स्थिर और स्वस्थ विकास के रास्ते पर लाया जाए।'
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दिसंबर 2019 के बाद चीन-भारत में उच्च-स्तरीय बैठक
बीजिंग में होने वाली विशेष प्रतिनिधि वार्ता का मुख्य फोकस भारत-चीन सीमा मुद्दा होगा। यह दिसंबर 2019 के बाद पहली बार होगी जब ऐसी उच्च-स्तरीय बैठक हो रही है। भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि इन वार्ताओं में सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने और सीमा विवाद का उचित, न्यायसंगत और आपसी सहमति वाला समाधान खोजने पर चर्चा की जाएगी।
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अक्तूबर 2024 में विवादित बिंदु से हटीं दोनों देशों की सेनाएं
वहीं इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद को बताया कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सैनिकों की वापसी (डिसएंगेजमेंट) प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसमें देपसांग और डेमचोक के क्षेत्र भी शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना भारत-चीन संबंधों के विकास के लिए जरूरी है। अक्तूबर 2024 में भारत और चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गश्त से संबंधित व्यवस्था को लेकर एक समझौता किया था। 2020 में एलएसी पर चीन की सैन्य कार्रवाई के कारण पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के बीच तनाव शुरू हुआ था, जिसने उनके संबंधों को बुरी तरह प्रभावित किया।
रूस में हुई थी पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात
रूस के कजान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात में कहा था कि दोनों देशों के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना प्राथमिकता होनी चाहिए और आपसी विश्वास द्विपक्षीय संबंधों की नींव बना रहना चाहिए।
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