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चीन के बेल्ट फोरम से दूरी बनाकर रखेगा भारत, 150 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

Thu, 25 Apr 2019 08:28 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 25 Apr 2019 08:28 AM IST
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China is using three-day Belt and Road Forum to exert its political muscle, india will stay away
भारत-चीन
चीन में तीन दिनों तक चलने वाले बेल्ट एंड रोड फोरम की शुरुआत गुरुवार से हो गई है। इसके जरिए वह अपनी राजनीतिक ताकत को बढ़ावा दे रहा है और अतंरराष्ट्रीय बाजार के तौर पर खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के पीछे दुनियाभर में ढांचागत परियोजनाओं का निर्माण करने का लक्ष्य है।
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भारत अकेला ऐसा महत्वपूर्ण देश है जो इस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले रहा है। इस कार्यक्रम में 150 देशों के अधिकारी और नेता शामिल होंगे। भारत ने निर्णय लिया है कि वह इस आर्थिक अवसर का लाभ नहीं उठाएगा क्योंकि बीआरआई ने भारत की अखंडता को ठेस पहुंचाई है। इसकी वजह है बीआरआई के एक हिस्से का पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरना।
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भारत ने बीआरआई कार्यक्रम के अन्य पहलुओं पर भी आपत्ति जताई है। उसका कहना है कि इसका अस्पष्ट उद्देश्य विकासशील देशों की परियोजनाओं के लिए उधार देकर उन्हें कर्ज के बोझ में दबाना है। भारत के रुख की पुष्टि मलेशिया, श्रीलंका, म्यांमार और सिएरा लियोन जैसे देशों ने की है। उन्होंने या तो चीनी कंपनियों के साथ अपने कांट्रैक्ट को रद्द कर दिया है या फिर नए सिरे से बातचीत कर रहे हैं।
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रिकनेक्टिंग एशिया प्रोजेक्ट एट द सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज इन वाशिंगटन के निदेशक जोनाथन हिलीमैन ने कहा, 'बहुत सारे फोरम बेल्ट एंड रोड ब्रांड को बहाल करने की कोशिश कर रहे है जो पिछले दो सालों में धूमिल हो गया है।' अमेरिका ने कई बार बीआरआई पर आपत्ति जताई है और कार्यक्रम में एक निम्न स्तर के प्रतिनिधिमंडल को भेजने का निर्णय लिया है। 


मगर चीन इस कार्यक्रम का इस्तेमाल अमेरिका को अपनी शक्ति दिखाने के लिए और देशों को आकर्षित करने की अपनी क्षमता के तौर पर करेगा। इंस्टीट्यूट ऑफ चीन-अमेरिका स्टडीज इन वाशिंगटन के सीनियर फेलो सौरभ गुप्ता ने कहा, 'यह ताकत का राजनीतिक प्रदर्शन है। इसके जरिए चीन खुद को वैश्विक विकास प्रणाली के तौर पर स्थापित करना चाहता है।'

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