Border Row: नियंत्रण रेखा पर चीन की चालबाजी, अब रक्षा बुनियादी ढांचे के निर्माण में पाकिस्तान की कर रहा मदद
China: जेएनयू में चीनी अध्ययन के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली का मानना है कि पाकिस्तान को हथियारों का हस्तांतरण क्षेत्र में चीन के हितों को सुरक्षित करने की एक योजना का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सदाबहार दोस्त होने और समग्र क्षेत्रीय प्रभुत्व नीति को अपनाकर भारत को संतुलित करने के अपने अक्सर घोषित रुख के अनुरूप बीजिंग ने पाकिस्तान को अपने हथियारों की आपूर्ति बढ़ा दी है।
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चीन भारत के खिलाफ अपनी खुराफातों से बाज नहीं आ रहा है। इन दिनों वह अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान को मानव रहित और लड़ाकू और विमान उपलब्ध करा रहा है। इसके अलावा संचार टावर स्थापित कर रहा है। नियंत्रण रेखा पर भूमिगत केबल बिछाने के साथ ही रक्षा बुनियादी ढांचे के निर्माण में भी उसकी मदद कर रहा है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों के मुताबिक, यह पाकिस्तान के साथ दोस्ती के रूप में चीन की स्थिति को और मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है। इसके साथ वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) की सड़क व जल विद्युत परियोजनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बहाने भी यह मदद कर रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि हाल ही में विकसित 155 मिमी ट्रक-माउंटेड (ट्रक से संचालित) हॉवित्जर तोप एसएच-15 को पिछले साल पाकिस्तान दिवस पर प्रदर्शित किए जाने के बाद एलओसी के पास कुछ स्थानों पर देखा गया है। पाकिस्तान ने 236 एसएच -15 की आपूर्ति के लिए चीनी फर्म नॉर्थ इंडस्ट्रीज ग्रुप कॉर्पोरेशन लिमिटेड (नोरिनको) के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। इन्हें ‘शूट एंड स्कूट’ तोपखाना हथियार के रूप में जाना जाता है। लंदन स्थित जेन्स डिफेंस पत्रिका के अनुसार, पहले जत्थे की आपूर्ति जनवरी 2022 में की गई थी।
हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि अग्रिम चौकियों पर पीएलए के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी नहीं पाई गई, जैसा कि 2014 में पता चला था, लेकिन पकड़े गए कुछ संदेशों से पता चला है कि चीनी सैनिक और इंजीनियर एलओसी पर भूमिगत बंकरों के निर्माण सहित बुनियादी ढांचे की स्थापना कर रहे थे। सूत्रों ने कहा कि सेना ने आधिकारिक तौर पर इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है लेकिन खुफिया एजेंसियों को लगातार जानकारी दी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यहां चीनी सेना की मौजूदगी बीजिंग के 46 अरब डॉलर के सीपीईसी के कारण है, जिसके तहत कराची में ग्वादर बंदरगाह को काराकोरम राजमार्ग के माध्यम से चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ा जाएगा। काराकोरम राजमार्ग चीन के अवैध कब्जे वाला क्षेत्र है। अधिकारियों ने संकेत दिया कि चीनी विशेषज्ञ हर मौसम में खुली रहने वाली सड़क बनाने की तैयारी के लिए पीओके में लीपा घाटी में कुछ सुरंगें खोद रहे हैं, जो काराकोरम राजमार्ग तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में काम करेगी।
बता दें कि एक चीनी दूरसंचार कंपनी ने 2007 में पाकिस्तान की दूरसंचार कंपनी का अधिग्रहण कर लिया था और चाइना मोबाइल पाकिस्तान (सीएमपाक) का गठन किया, जो चाइना मोबाइल कम्युनिकेशंस कॉर्पोरेशन की 100 फीसदी स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। पिछले साल अगस्त में, पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी (पीटीए) ने पीओके के लिए सीएमपाक (जोंग) के मोबाइल लाइसेंस को नवीनीकृत करते हुए क्षेत्र में नेक्स्ट जेनरेशन मोबाइल सर्विसेज (एनजीएमएस) के विस्तार की अनुमति दी थी।
भारत ने अतीत में गिलगित और बाल्टिस्तान क्षेत्रों में चीनियों की मौजूदगी पर कड़ी आपत्ति जताई है और अधिकारियों ने कहा कि सेना सीमा पार से किसी भी चाल को विफल करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। भारत और पाकिस्तान 25 फरवरी, 2021 से युद्धविराम का पालन कर रहे हैं।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में चीनी अध्ययन के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली का मानना है कि पाकिस्तान को हथियारों का हस्तांतरण क्षेत्र में चीन के हितों को सुरक्षित करने की एक योजना का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सदाबहार दोस्त होने और समग्र क्षेत्रीय प्रभुत्व नीति को अपनाकर भारत को संतुलित करने के अपने अक्सर घोषित रुख के अनुरूप बीजिंग ने पाकिस्तान को अपने हथियारों की आपूर्ति बढ़ा दी है।
उन्होंने कहा, चीन ने पाकिस्तान के पीओके में भारत की संप्रभुता संबंधी चिंताओं का उल्लंघन करते हुए 2014 में एक आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) शुरू किया था। उन्होंने कहा, काराकोरम राजमार्ग के विस्तार के अलावा चीन ने अपनी जल-विद्युत परियोजनाओं और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को आतंकवादी हमलों से बचाने के लिए पीओके में अनुमानित 36,000 'सुरक्षा गार्ड' भेजे हैं। कोंडापल्ली ने कहा कि चीन पीओके में कथित 'समृद्ध समाज' वाले गांवों का भी निर्माण कर रहा है।