फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   China has eyes on relationship between India and America, there could be a big game going on in Asia

India-US: भारत और अमेरिका के रिश्ते पर चीन ने गड़ाई निगाह, एशिया में हो सकता है बड़ा खेल

Mon, 14 Apr 2025 08:21 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Mon, 14 Apr 2025 08:21 PM IST
सार

अमेरिका के टैरिफ वॉर का असर पूरी दुनिया पर हुआ है। भारत के कूटनीति के जानकार और रणनीतिकार चीन के हर कदम पर अपनी निगाह टिकाए हैं। भारत और चीन के रिश्ते सुधरे हैं, लेकिन चीन के पंडित भी भारत अमेरिका के संबंध पर गिद्ध दृष्टि लगाकर बैठे हैं।

विज्ञापन
China has eyes on relationship between India and America, there could be a big game going on in Asia
ट्रंप के साथ पीएम मोदी - फोटो : एक्स/NARENDRA MODI

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूरी दुनिया को हिला रखा है। चीन को लेकर उनके दिमाग में अलग रणनीति चल रही है। भारत के लिए चीन महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है, लेकिन अमेरिका से संबंध उसकी विकास यात्रा में पंख लगा सकते हैं। भारत की मंशा पर चीन के पर्यवेक्षकों ने बारीकी से निगाह गड़ा रखी है। देखना है कि अमेरिका की मंशा के साथ भारत कितना समझौता कर पाता है?
विज्ञापन


इन दिनों वाणिज्य भवन में काफी हलचल है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल काफी बड़ी मशक्कत कर रहे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर राष्ट्रपति ट्रंप के रणनीतिकारों को यह समझाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं कि भारत अमेरिका का विश्वसनीय, सामरिक, रणनीतिक साझीदार देश है और उसे मेक इन इंडिया के जरिए सस्ता उत्पाद दे सकता है। अमेरिका और भारत में इसको लेकर प्रयास भी तेज हुए हैं। जैसे को तैसा(रेसीप्रोकल टैरिफ) के मामले में भारत ने बहुत अधिक सावधानी और संयम का परिचय दिया है। एस जयशंकर की टीम दिसंबर 2024 से ही इस अभियान में लगी है। जनवरी 2025 में जब वह अमेरिका में थे, उनका मुख्य लक्ष्य यही था। पूर्व विदेश सचिव शशांक ट्रंप-2.0 के इस समय को भारत के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि पूर्व विदेश सचिव ठीक कह रहे हैं। लेकिन कभी कभी आपके सामने आ रहे अवसर के साथ कुछ जोखिम भी होते हैं। उस जोखिम को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विज्ञापन


 वैश्विक संतुलन में आ रही है नई चुनौती 
अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते में धीरे-धीरे संतुलन बढ़ रहा है। विदेश मंत्रालय के सूत्र इसमें भारत और रूस के बीच प्रगाढ़ संबंधों की भूमिका से इनकार नहीं करते। रूस चाहता है कि उसके हित में यूक्रेन युद्ध समाप्ति पर सहमति बने। चीन के पर्यवेक्षकों को इसका संदेह हो सकता है कि भारत को नई भूमिका में लाने में रूस का सहयोग हो सकता है। दूसरी तरफ अमेरिका भारत के साथ संबंध की बुनियाद पर चीन के साथ अपनी मंशा के अनुरूप संतुलन बनाना चाहता है। अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र पर गहरी पकड़ रखने वाले बंगाल मूल के अर्थ शास्त्री का भी ईशारा इसी तरप है। वह कहते हैं कि उद्योगों के लिए जरूरी गुणवत्ता पूर्ण मानव संसाधन के मामले में भारत की स्थिति जरूर कमजोर है, लेकिन हमारे पास बड़ा अवसर आ रहा है। चीन भारत की हर गतिविधि पर चौकन्नी निगाह रख रहा है। उसे लग रहा है कि भारत एशिया में बड़े खेल की तैयारी कर रहा है। भारत के पक्ष में तीन चीजें काफी अनुकूल है। यूरोप, रूस और अमेरिका तीनों से भारत का कोई प्रतिकूल रिश्ता नहीं है। रूस के साथ संबंध अपनी जगह बनाए हैं, लेकिन इसके साथ-साथ हमें चीन के साथ रिश्ते के संतुलन पर विशेष ध्यान बनाए रखना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


भारत के सामने नई चुनौती क्या है?
भारत के पास अवसर है, लेकिन प्रतिस्पर्धी और गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन कम है। विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि हमारे सामाजिक ढांचे में धार्मिक आधार पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। अमेरिका भी इसके लिए चिढ़ा देता है। पूर्व एयर वाइस मार्शल एन.बी. सिंह कहते हैं कि विदेशी निवेशक अन्य स्थायित्व साथ-साथ देश में राजनीतिक, सामाजिक मुद्दे पर भी आंतरिक स्थायित्व देखते हैं। रंजीत कुमार का कहना है कि यह दोनों स्थायित्व जरूरी हैं। विदेशी निवेशक या हमारे यहां उद्योग लगाने वाला इसे काफी महत्व देता है। वह कहते हैं कि चीन से बहुत सी कंपनियों ने अपने कारोबार को समेटा, लेकिन यह देखने वाली बात है कि उनमें से न्यूनतम भारत आई। माइंड ट्री जैसी आईटी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी राजेश चौधरी कहते हैं कि अभी भारत में मोबाइल फोन, लैपटॉप, गजट आदि में असेम्बलिंग ही ज्यादा हो रही है। जबकि यहां के प्लांट में उच्च तकनीकी के उत्पादों का निर्माण बढ़ना चाहिए। चौधरी कहते हैं कि यह तभी संभव है, जब भारत खुद को इसके अनुकूल बनाएगा। शांतनु बनर्जी कहते हैं कि हमारे वाणिज्य मंत्री ने खुले मंच से आंत्रप्रेन्योर को कहा है कि वह स्विगी, जोमैटो, ऊबर जैसी सेवाओं को ही लक्ष्य न मान लें। इससे आगे बढ़ें। शांतनु कहते हैं कि हम बहुत छोटे में संतुष्ट हो जाते हैं। इसलिए तकनीक से दूर हैं।

चीन अपने हितों की अनदेखी करके नहीं चाहता भारत और अमेरिका का मधुर संबंध
भारत के कूटनीति के जानकार और रणनीतिकार चीन के हर कदम पर अपनी निगाह टिकाए हैं। भारत और चीन के रिश्ते सुधरे हैं, लेकिन चीन के पंडित भी भारत अमेरिका के संबंध पर गिद्ध दृष्टि लगाकर बैठे हैं। चीन में लद्दाख की सेना के वास्तविक नियंत्रण रेखा को पार करके 2020 में भारतीय परिक्षेत्र में आने की हिमाकत के एक कारण के रूप में पैदा हुई कुछ गलत फहमी को भी माना जाता है। पूर्व एयर वाइस मार्शल कहते हैं कि अमेरिका से भारत का कारोबार, रक्षा, तकनीकी आदान-प्रदान में बहुत अच्छा संबंध इस समय सबसे अधिक चीन को अखरेगा। अमेरिका बाइडेन के दौर से बाहर निकलकर भारत के साथ रिश्तों की नई केमिस्ट्री बनाना चाहता है। एनबी सिंह कहते हैं कि यह संवेदनशील मसला भी है। मुझे लग रहा है कि भारत यहां फूंक-फूंककर कदम रख रहा है।


90 दिन बाद क्या होगा?
राष्ट्रपति ट्रंप ने रेसीप्रोकल टैक्स पर भारत जैसे देशों को 90 दिन की मोहलत दी है। चीन के साथ उसका टैरिफ वॉर चल रहा है। अभिषेक तिवारी नोएडा, सेक्टर 63 की कंपनी में आईटी इंजीनियर हैं। उनकी कंपनी को अधिकांश काम अमेरिका की कंपनियों से मिलता है। बताते हैं कि इस समय अमेरिकी कंपनियां कोई काम नहीं दे रही हैं। राजेश चौधरी भी कहते हैं कि नोएडा, गुड़गांव, की तमाम कंपनियों में अमेरिका से आने कामकाज का टोटा पड़ रहा है। संजय बग्गा अमेरिका में हैं। आईटी इंजीनियर हैं। बग्गा बताते हैं कि जब से राष्ट्रपति ट्रंप आए हैं, बमुश्किल चैन की नींद आ रही है। भारतीय अप्रवासियों की चिंता काफी बढ़ गई है। लेकिन भारत सरकार के संभलकर चलने के कारण सबके पास एक उम्मीद है कि धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed