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डोकलाम विवाद: तो इस वजह से ढाई महीने बाद भारत के आगे झुका चीन?

Mon, 28 Aug 2017 07:48 PM IST
 ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
 ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 28 Aug 2017 07:48 PM IST
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China agree to expeditious disengagement of Doklam border dispute before BRICS

भारत और चीन के बीच करीब ढाई महीने से तनाव का कारण बना दोकलम विवाद आखिरकार हल हो गया है। जबरदस्त कूटनीतिक तनातनी के बाद दोनों देश सिक्किम सेक्टर के विवादित दोकलम क्षेत्र से अपनी-अपनी सेनाओं को एक साथ हटाने पर सहमत हो गए हैं। यह सहमति ऐसे समय में हुई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने अगले हफ्ते चीन जाने वाले हैं।

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इसे चीन पर भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल भारत जहां लगातार विवादित क्षेत्र से सेना हटाने के बाद कूटनीतिक बातचीत के जरिए विवाद का हल निकालने पर जोर दे रहा था, वहीं चीन की ओर से भारत को लगातार युद्घ की धमकियां मिल रही थी। 
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विदेश मंत्रालय ने सोमवार को इस विवाद का हल निकलने की जानकारी देते हुए कहा कि भारत बीते कुछ हफ्तों में कूटनीतिक बातचीत में चीन को अपनी चिंताओं और हितों को समझाने में कामयाब रहा है। सहमति के बाद दोनों देश दोकलम से अपनी-अपनी सेनाएं तेजी से पीछे हटा रहे हैं।

चीन ने विवाद का हल निकलने की आधिकारिक पुष्टि तो की, लेकिन भारत के दावों के उलट कहा कि चीन नहीं बल्कि भारत विवादित क्षेत्र से अपनी सेना हटा रहा है। चीन ने विवादित क्षेत्र में पेट्रोलिंग जारी रखने की भी घोषणा की। हालांकि भारतीय पक्ष का दावा है कि इस मामले में बेहद कड़ा रवैया अपनाने के कारण अब चीन अपनी छवि बचाने के लिए इस तरह का दावा कर रहा है। हकीकत यही है कि दोनों साथ-साथ पीछे हट रहे हैं। दोकलम में भारत के 350 सैनिक तैनात थे, जहां 16 जून को चीन द्वारा सड़क बनाने की कोशिश के कारण तनाव शुरू हुआ था।

ब्रिक्स बनी विवाद के हल की वजह

China agree to expeditious disengagement of Doklam border dispute before BRICS
चीन में 3-5 सितंबर तक होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन विवाद के हल की असली वजह बना। चीन नहीं चाहता था इतने बड़े और इतने महत्वपूर्ण सम्मेलन में दोकलम विवाद के कारण तनावपूर्ण माहौल बने। भले ही रूस ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी थी, लेकिन ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों से भारत के रिश्ते बेहद मधुर हैं। दक्षिण चीन सागर विवाद के कारण चीन की अंतरराष्ट्रीय छवि वैसे भी बहुत खराब हो चुकी है। ऐसे में चीन अपनी मेजबानी में हो रहे सम्मेलन में अपनी छवि को और नहीं बिगाड़ना चाहता था।

भविष्य में पलटवार कर सकता है चीन
चीन भले ही दोकलम विवाद पर भारतीय प्रस्ताव पर सहमति जताने पर मजबूर हुआ है, लेकिन इसने उसकी ओर से पलटवार की संभावना भी बढ़ा दी है। भारतीय पक्ष का मानना है कि ब्रिक्स सम्मेलन के बाद चीन सीमा विवाद को तूल दे सकता है।

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सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत पहले ही ऐसी आंशका जता रहे हैं। वैसे भी भारत पीओके में चीन की लगातार बढ़ रही भूमिका से चिंतित और सतर्क है। आतंकवाद के मामले में चीन ने हमेशा पाकिस्तान के लिए ढाल का काम किया है। इस मोर्चे पर भी चीन आक्रामक रुख अपना सकता है। 

कई बार बेनकाब हुआ चीन
- भारत पर दबाव बनाने के लिए चीन ने लगातार युद्घ की धमकी दी, लेकिन पर्दे के पीछे बातचीत की हामी भरता रहा।
- चीन ने लगातार कूटनीतिक बातचीत से इनकार किया। जबकि विवाद का हल निकलने से इसकी पुष्टि हुई कि दोनों देश लगातार संपर्क में थे।
- जर्मनी में जी-20 की बैठक में आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम मोदी के बीच अलग से बातचीत नहीं होने का दावा किया। इसके बावजूद दोनों देशों के शासानाध्यक्षों की मुलाकात हुई।  

काम आई अटल मौन की रणनीति
चीन की कोशिश लगातार भारत को जुबानी जंग में उलझाने, युद्घ और कश्मीर में हस्तक्षेप की धमकी के जरिए दबाव बनाने की थी, लेकिन उकसावे में आने के बदले भारत ने मौन साध कर अपने स्टैंड पर कायम रहने की रणनीति बनाई। कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में हर दृष्टि से भारत का पक्ष मजबूत था।
- भूटान से सुरक्षा समझौता के कारण भारत को उसकी रक्षा के लिए उसके भूभाग पर जाने का हक
- पूर्व के समझौतों केअनुरूप चीन विवादित क्षेत्र में बिना तीनों देशों की सहमति से किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं कर सकता।
- इस मामले में अमेरिका, जापना, आस्ट्रेलिया, भूटान सहित कई देश भारत के साथ थे। चीन को जर्मनी सहित यूरोपीय देशों से भी समर्थन की उम्मीद नहीं थी।
 
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