बच्चों में भी भर दिया था जहर, खुद को कहते थे 'आजाद हिंद के सिपाही'
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हिंसा के बाद जवाहर बाग से 23 बच्चों और किशोरों को फीरोजाबाद बाल सुधारगृह लगा गया है। इनके मां-बाप या तो जेल चले गए है या फिर हिंसा में घायल है। परिवारीजन जन गायब हैं, कहां हैं ये इन्हें भी नहीं पता।
हो सकता है को उनमें कुछ जिंदा भी न हो, लेकिन इन बच्चों और किशोरों के चेहरों पर कोई शिकन नहीं है। इनके दिल और दिमाग पर रामवृक्ष की बातों का जहर छाया हुआ है। बात करने पर यही कहते हैं कि हम आजाद हिंद फौज के सिपाही हम क्यों डरें।
हरदोई जिले के गांव दौलतपुर निवासी एक बालक से पूछा गया तो उसके पास बैठा दूसरा किशोर बोला नेता जी (रामवृक्ष यादव) हमें सिखाते थे कि हम डरें क्यों, आजाद हिंद फौज के सिपाही हैं। वैसे तो बच्चों को प्रशिक्षण से दूर रखा जाता था, लेकिन माता-पिता घर आकर हमें सीख देते थे।
शाहजहांपुर जिले के एक बालक (10) के पिता का पता नहीं चल रहा है। एक बताया है कि उसके पिता लड़ाई में आगे थे। हमें पता ही नहीं वह जिंदा हैं कि मर गए। यहां पर नौ बच्चों 14 किशोरों को लाया गया है। ये शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, रीवा मध्यप्रदेश, सीतापुर, औरैया, हरदोई, चंदौली और बहराइच के रहने वाले हैं।
सबसे आगे युवा, फिर बुजुर्ग और महिलाओं का घेरा
बच्चों का कहना है कि पुलिस प्रशासन के दीवार तोड़ने की जानकारी रामवृक्ष को हो गई थी। इसके बाद प्रशासन से निपटने की किलेबंदी नेताजी (रामवृक्ष यादव) ने की थी। सबसे आगे युवाओं की टोली, उसके पीछे बुजुर्ग और फिर महिलाएं थी। सभी के हाथों में लाठी एवं डंडे कटारें थीं। लेकिन हमें (पंडाल) की ओर खड़ा कर दिया था। हम चारों ओर से घिरे तो हम कचहरी की ओर की तरफ भाग निकले।
सभी को भेजा जाएगा घर
बाल सुधारगृह के अधीक्षक सुनील कुमार ने कहा मथुरा के जवाहर बाग से यहां भेजे गए सभी 23 किशोरों को उनके परिवारीजनों या रिश्तेदारों को सौंपने की तैयारी की जा रही है।
समिति अध्यक्ष ने बच्चों से की भेंट
राष्ट्रीय चेतना सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष गुप्ता ने राजकीय बाल सुधारगृह में जाकर किशोरों से मुलाकात की।