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बाल विवाह स्वत: नहीं हो सकता है अमान्य : हाईकोर्ट
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 06 Mar 2016 10:14 PM IST
सार
- मद्रास हाईकोर्ट का अहम फैसला
- कानून तोड़ने पर अमान्य मानी जाएगी शादी
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विस्तार
लेनी होगी तलाक की अनुमति
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मद्रास हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि नाबालिग लड़की और लड़के के बीच हुई शादी तब तक अमान्य नहीं हो सकती जब तक कि शादी की निर्धारित उम्र हासिल करने के दो साल के भीतर दोनों में से एक परिवार अदालत से तलाक की अनुमति नहीं प्राप्त कर लेता।
जस्टिस मणिकुमार और सीटी सेलवान की पीठ ने तिरुनेल्वेली की एक निचली अदालत के फैसले को दरकिनार करते हुए यह फैसला दिया। पिछले साल अप्रैल में निचली अदालत ने एक महिला के तलाक संबंधी आवेदन को यह कहते हुए स्वीकार करने से मना कर दिया था कि 1995 में शादी के वक्त वह नाबालिग थी और इस तरह वह शादी स्वत: अमान्य हो गई थी।
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कानून तोड़ने पर अमान्य मानी जाएगी शादी
हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि हिंदू विवाह कानून, 1955 शादी के लिए एक न्यूनतम उम्र की बात करता है और इस कानून को तोड़ने पर कानून की धारा 11 और 12 के तहत शादी अमान्य मानी जाएगी हालांकि इसी कानून की धारा 13 (जिसमें तलाक के आधार के बारे में जिक्र है) में कहा गया है कि बाल विवाद तभी अमान्य माना जाएगा जब कोई भी पक्ष शादी की निर्धारित उम्र हासिल करने के दो साल के भीतर उसे चुनौती दे। इसके साथ ही अदालत ने उम्मीद जताई कि इस बारे में कानून को और स्पष्ट करने लिए संसद संबंधित कानून में संशोधन करेगा।