मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत दो दिसंबर को होंगे सेवानिवृत्त
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पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा करने वाले मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत दो दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। यानी 11 दिसंबर को जब इन चुनावों के परिणाम आएंगे तो उनकी घोषणा करने के लिए रावत इस पद पर नहीं होंगे। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहली बार होगा कि चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत एक मुख्य चुनाव आयुक्त करेंगे लेकिन उसका समापन कोई अन्य मुख्य चुनाव आयुक्त करेंगे। रावत इस चुनाव प्रक्रिया को 10 दिन पहले भी समाप्त कर सकते थे लेकिन नहीं कर रहे हैं। और उन्होंने अपने इस फैसले का कोई स्पष्टीकरण भी नहीं दिया।
वहीं, उन पर चुनाव की घोषणा के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुविधा के अनुसार बदलने का भी आरोप लगा। पहले यह घोषणा दोपहर साढ़े बारह बजे होने वाली थी लेकिन चुनाव आयोग ने आखिरी क्षणों में इसका समय बदलकर शाम तीन बजे कर दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इसका समय इसलिए बदला गया कि ताकि प्रधानमंत्री दोपहर एक बजे होने वाली रैली में कुछ लोक लुभावनी घोषणाएं कर सकें। हालांकि रावत ने इन आरोपों पर सफाई दी।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में चक्रवात तूफान आने वाला था और वहां के मुख्य सचिव ने उससे निपटने के लिए कुछ घंटों की मोहलत मांगी थी। वहीं तेलंगाना में मतदाता सूची को लेकर एक मामले में अदालत का फैसला आने वाला था। इसलिए घोषणा का समय ढाई घंटे आगे खिसका दिया गया। यह बात अलग है कि चुनाव आयोग की घोषणा पर इन दोनों मामलों का कोई असर नहीं पड़ा।
पहले भी लग चुके हैं ऐसे आरोप
रावत पर प्रधानमंत्री की सुविधा के अनुसार चुनाव आयोग का कार्यक्रम बदलने का आरोप पहली बार नहीं लगा है। इससे पहले कर्नाटक, गुजरात और हिमाचल प्रदेश के एक साथ होने वाले चुनाव की घोषणा करने के दौरान भी उन पर इस तरह के आरोप लगे थे। उस दौरान रावत ने कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा एक साथ की थी और गुजरात के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कुछ दिनों बाद। उस समय भी कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि गुजरात में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा रावत ने इसीलिए देरी से की है क्योंकि वहां प्रधानमंत्री मोदी की रैली होने वाली थी।