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Chhattisgarh: सीएम बघेल का बड़ा दांव, क्या 20 क्विंटल धान खरीद के बूते दोबारा सत्ता में लौट सकेगी कांग्रेस?

Tue, 28 Mar 2023 06:09 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Tue, 28 Mar 2023 06:09 PM IST
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सार
Chhattisgarh: कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राजीव गांधी न्याय योजना से किसान मजबूत हुए हैं। भूमिहीन किसानों के लिए राजीव गांधी भूमिहीन खेतिहर मजदूर योजना भी भूपेश सरकार ने लांच की। इसमें उन किसानों को हर साल सात हजार रुपये दिए जाते हैं...
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Chhattisgarh: will Congress be able to return to power again by purchasing 20 quintals of paddy?
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल। - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

देश में धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में राजनीति धान और चावल ईदगिर्द ही घूमती हुई नजर आती है। भाजपा के 15 वर्षों के राज में पूरी सियास चावल पर ही केंद्रीत रही। एक रुपये किलो चावल देकर रमन सिंह पूरे प्रदेश में चाउर वाले `बाबा` बन गए। बाबा की छवि को तोड़ने के लिए `कका` यानी सीएम भूपेश बघेल ने प्रदेश की सियायत को चावल से धान पर ला दिया है। धान से धनवान हुए किसान का नारा देने वाले सीएम बघेल ने धान का समर्थन मूल्य 2,500 रुपये करने का वादा कर पिछला विधानसभा चुनाव जीता था। लेकिन अब मिशन 2023 फतह करने के लिए प्रति एकड़ 15 की जगह 20 क्विंटल धान खरीदने की घोषणा कर बड़ा दांव चल दिया है।

छत्तीसगढ़ में पिछले साढ़े चार साल में कांग्रेस सरकार की राजनीति के केंद्र में किसान ही थे। यही कारण है कि इस साल एक लाख टन धान खरीदी के लक्ष्य को पार करते हुए सरकार ने एक लाख पांच हजार टन धान की खरीदी की। सरकार के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा धान खरीद में जा रहा है। केंद्र सरकार सेंट्रल पूल में राज्य सरकार से चावल लेती है, जिसके कारण धान खरीदी की प्रक्रिया आसानी से पूरी हो रही है। चुनाव से पहले बघेल सरकार ने प्रति एकड़ 15 की जगह 20 क्विंटल धान खरीदने की घोषणा कर बड़ा दांव चल दिया है। सीएम ने अगले वर्ष से चावल का दाम 2,800 रुपये होने की उम्मीद जताई है। भूपेश की चुनावी रणनीति में चावल की जगह धान ने ली है। गरीबों को पुरानी योजना के अनुसार एक रुपये किलो चावल अब भी मिल रहा है, किंतु धान अब उससे बड़ा मुद्दा बन गया है।

हालांकि भाजपा इस मुद्दे को दमदारी से नहीं उठा पा रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राजीव गांधी न्याय योजना से किसान मजबूत हुए हैं। भूमिहीन किसानों के लिए राजीव गांधी भूमिहीन खेतिहर मजदूर योजना भी भूपेश सरकार ने लांच की। इसमें उन किसानों को हर साल सात हजार रुपये दिए जाते हैं। जिनके पास जमीन नहीं है। केंद्र सरकार भी किसानों को पीएम सम्मान निधि के नाम पर छह हजार रुपये दे रही है।

चुनाव से पहले फिर गर्म हो रही है सियासत

प्रदेश में नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में धान और चावल को लेकर फिर से फिर से सियासत गर्म होने लगी है। दोनों पार्टियां एक दूसरे पर तंज कस रही हैं। भाजपा धान खरीद और किसानों को लेकर सरकार पर हमलावर है। जबकि कांग्रेस भाजपा की नीयत पर लगातार सवाल खड़ी कर रही है। अगर बात 2018 की करें तो राज्य की किसानों के प्रभाव वाले 21 सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार 30 हजार से ज्यादा वोटों से जीते थे। 90 विधानसभा क्षेत्रों में से 47 में किसान वोटर प्रभावी भूमिका में हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में किसानों के प्रभाव वाली ग्रामीण क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों की 30 से 50 हजार वोटों से जीत हुई थी। यही कारण है कि इस बार फिर कांग्रेस किसानों पर ही दांव लगा रही है। पिछले साल ही सीएम भूपेश बघेल ने 2500 रुपये प्रति क्विंटल खरीदने का वादा किया था। अब भाजपा की कोशिश है कि वो तमाम नए मुद्दों के साथ ही अपने पुराने विषय पर सीटों में इजाफा कर सके।

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